इंदौर के सरकारी स्कूल में छात्राओं के साथ अमानवीय व्यवहार
Best Indore News: इंदौर जिले के खुड़ैल क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में नाबालिग छात्राओं के शोषण का मामला सामने आया है। दो शिक्षकों पर अश्लील बातें करने, मारपीट करने और छात्राओं की लैंगिक गरिमा के खिलाफ अमानवीय व्यवहार करने के आरोप हैं। शुरूआती घटना – कब और कहाँ? इंदौर इस वर्ष अगस्त में इंदौर के एक सरकारी कन्या उच्चतर माध्यमिक स्कूल (मल्हारगंज) में गंभीर घटना सामने आई। उस दिन एक शिक्षक ने मोबाइल की घंटी सुनकर कुछ छात्राओं को शौचालय में बुलाया और वहां उनके कपड़े उतारकर तलाशी ली। नाबालिग बच्चियाँ भयानक मानसिक आघात से गुज़र रही थीं । आरोप है कि शिक्षिका ने मोबाइल की खोज के बहाने यह करने के साथ-साथ कुछ छात्राओं को वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी और उनमें से कुछ को मारपीट से भी रूबरू कराया पुलिस में शिकायत और सीमित कार्रवाई घटना के पश्चात माता-पिता ने मल्हारगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई, तथापि पुलिस ने तत्काल FIR दर्ज नहीं की और न ही POCSO के तहत तत्काल मुकदमा शुरू किया गया । इस निष्क्रियता के कारण पालकों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उच्च न्यायालय की शरण ली। हाईकोर्ट की सख्ती मामले की गंभीरता पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस दुप्पला वेंकटरमणा की पीठ) ने घटना को बेहद गंभीर मानते हुए राज्य सरकार, पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर और मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया कोर्ट ने निर्देश दिया कि 7 दिन के भीतर POCSO एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करें और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें POCSO मुकदमा एवं रिपोर्ट में खामियाँ हाईकोर्ट की सुनवाई में सामने आया कि शिकायत के 1 सप्ताह बाद भी पुलिस POCSO जैसे गंभीर कानून के अंतर्गत कोई कार्यवाही नहीं कर रही थी सरकार को रिपोर्ट जमा करने के बावजूद, कुछ भी सख्त कार्रवाई नहीं की गई। एसडीएम रिपोर्ट और 9 साल में FIR नहीं हालांकि वर्तमान घटनाक्रम इस वर्ष का है, लेकिन इसके पीछे लंबे समय से चली जाने वाली प्रकिया है जिसके तहत शिकायतों को प्रबंधन स्तर (मैनेजमेंट कमेटी, SDM) तक ले जाया गया। विश्वास है कि स्कूल अधोसंरचना, कर्मचारियों की शिकायतों की जांच और आरोपों पर कोई सक्रिय कार्रवाई नहीं हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर SDM स्तर पर बनी जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि इतने समय में FIR दर्ज नहीं करने की प्रक्रिया का कोई उचित औचित्य नहीं दिखता, और इससे पीड़ित बच्चियों की सुरक्षा और न्याय वितरण दोनों प्रभावित हुए। PMO का हस्तक्षेप ऐसी घटनाओं से जुड़े सार्वजनिक आक्रोश को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने संज्ञान लिया। इसकी सूचना के अनुसार PMO ने उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस मामले की स्वतंत्र जांच करवाएं और पीड़ितों को न्याय दिलाने की पहल तेज़ करें विश्लेषण: क्या यह अकेली घटना है? इंदौर ही नहीं, मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सरकारी स्कूलों से जुड़ी ऐसी घटनाओं की श्रृंखला चली आ रही है— इन मामलों से स्पष्ट होता है कि बुनियादी ढाँचे की कमी और बच्चों की सुरक्षा‑संबंधी नीतियों का लागू नहीं होना मिलकर उन्हें चिंता का विषय बना रहे हैं। सहायता की दिशा: क्या कदम उठाने चाहिए? इंदौर के सरकारी स्कूल में हुई यह घटना केवल एक “घटना” नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थाओं में प्रणालीगत अंडरडेटेक्शन और नाबालिगों की सुरक्षा में मौजूदा खामियों की ज़ोरदार चेतावनी है। सरकार, पुलिस, शिक्षा विभाग और समाज का सहयोग ही एक संभावित बदलाव ला सकता है। न्यायपालिका से अख्तियार मिलने के बाद यदि कार्यवाही समय पर की जाए और सभी नियंत्रक संस्थाएँ मिलकर जवाबदेही फोकस करें—तो यह घटनाएँ दोबारा नहीं होंगी। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर के खजराना गणेश जी को मिलेगा नया स्वर्ण मुकुट:

Best Indore News: इंदौर के श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र खजराना गणेश मंदिर इन दिनों एक नई तैयारी के चलते सुर्खियों में है। यहां भगवान गणेश जी को जल्द ही एक नया स्वर्ण मुकुट पहनाया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा यह फैसला उस समय लिया गया जब गणेशजी के पुराने मुकुट में दरार (क्रैक) देखी गई। इस महत्वपूर्ण निर्णय ने भक्तों के बीच उत्साह और श्रद्धा को और अधिक गहरा कर दिया है। क्यों बदला जा रहा है मुकुट? इंदौर: खजराना गणेश मंदिर में भगवान गणेशजी के श्रृंगार में इस्तेमाल किया जाने वाला स्वर्ण मुकुट अब पुराने हो चुके है। नियमित पूजा और विशेष अवसरों पर होने वाले अलंकरण के कारण मुकुट में महीन दरारें आ गई हैं। इस बात की जानकारी मिलते ही मंदिर समिति ने इस पर गहन विचार-विमर्श किया और नया मुकुट बनाने का निर्णय लिया गया। पहले तैयार होगा चांदी का मॉडल मुकुट नए मुकुट को तैयार करने से पहले, मंदिर प्रशासन एक 3 से 3.5 किलो चांदी का मॉडल मुकुट तैयार करेगा। इसे गणेशजी पर पहनाकर देखा जाएगा कि आकार, डिज़ाइन और भार संतुलित है या नहीं। यदि यह मुकुट पूरी तरह अनुकूल और संतोषजनक पाया गया, तभी असली स्वर्ण मुकुट बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कितना होगा वजन और डिज़ाइन? नए स्वर्ण मुकुट का वजन लगभग 6 से 7 किलो प्रस्तावित है। इसके अलावा गणेश जी के साथ विराजमान रिद्धि और सिद्धि तथा शुभ और लाभ की प्रतिमाओं के लिए भी अलग-अलग मुकुट तैयार किए जाएंगे। रिद्धि-सिद्धि के मुकुट लगभग 1–1.5 किलो और शुभ-लाभ के मुकुट लगभग 500 ग्राम के होंगे। मुकुट के डिज़ाइन को बेहद भव्य और धार्मिक भावना से प्रेरित रखा गया है। इसमें ॐ, स्वास्तिक, कमल पुष्प, बेलपत्र आकृति, शंख जैसे पवित्र प्रतीकों को उकेरा जाएगा, जिससे मुकुट न केवल सौंदर्य की दृष्टि से मनोहारी हो, बल्कि उसमें आध्यात्मिक ऊर्जा का भी संचार हो। कौन देखेगा प्रक्रिया की निगरानी? इस कार्य की पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु मंदिर ट्रस्ट द्वारा एक 10-सदस्यीय निगरानी समिति बनाई गई है। इस समिति में पुजारियों, शिल्पकारों, नगर निगम के प्रतिनिधियों, खजाना विभाग तथा स्थानीय गणमान्य नागरिकों को शामिल किया गया है। यह समिति मुकुट निर्माण की हर प्रक्रिया पर नज़र रखेगी और गुणवत्ता सुनिश्चित करेगी। कब तक बनकर तैयार होगा मुकुट? मंदिर प्रशासन का लक्ष्य है कि यह नया मुकुट आगामी गणेश चतुर्थी से पहले बनकर तैयार हो जाए। हालांकि, यदि किसी कारणवश यह समयसीमा पूरी नहीं हो पाई, तो गणेश चतुर्थी पर भगवान को पुराना मुकुट पहनाया जाएगा और ‘तिल चतुर्थी’ (जनवरी) के अवसर पर नया मुकुट धारण कराया जाएगा। चांदी का मॉडल मुकुट तैयार होने में लगभग 1 महीना, और उसके बाद स्वर्ण मुकुट के निर्माण में लगभग 20–25 दिन का समय लगेगा। इस प्रक्रिया को पारंपरिक तौर-तरीकों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्ण किया जाएगा। सोने की व्यवस्था कैसे होगी? मंदिर ट्रस्ट के पास पहले से ही 6 से 6.5 किलो सोना विभिन्न रूपों में उपलब्ध है, जिसमें पुराने मुकुट, चैन, छत्र आदि शामिल हैं। यदि आवश्यकता पड़ी, तो भक्तों से स्वर्ण दान भी लिया जा सकता है। कई श्रद्धालु पहले ही इस धार्मिक कार्य में योगदान देने की इच्छा जता चुके हैं। श्रद्धालुओं में उत्साह इस समाचार के सामने आने के बाद से ही शहर सहित प्रदेशभर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। सभी की भावनाएं गणेशजी के नए मुकुट से जुड़ी हैं और भक्तगण इसकी भव्यता देखने को आतुर हैं। माना जा रहा है कि यह मुकुट खजराना गणेश जी के इतिहास में अब तक का सबसे भव्य अलंकरण होगा। खजराना गणेश मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि इंदौर की आत्मा है। यहां हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गणेशजी के इस नए स्वर्ण मुकुट से न केवल मंदिर की शोभा बढ़ेगी, बल्कि आस्था भी और अधिक प्रबल होगी। यह पहल मंदिर की धार्मिक गरिमा, संस्कृति संरक्षण और भव्यता को दर्शाती है। उम्मीद है कि इस मुकुट के साथ खजराना गणेशजी और भी अधिक भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करेंगे और सभी को सुख, समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद देंगे। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
संपत्ति कर वसूली में इंदौर नगर निगम हुआ सख्त: ₹50 हजार से अधिक बकाया

Best Indore News: नगर निगम ने शहर में राजस्व संग्रहण की गति को तेज करने के लिए संपत्ति कर के बकायेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। खासतौर पर ₹50 हजार से अधिक बकाया रखने वाले संपत्ति मालिक अब नगर निगम के रडार पर आ चुके हैं। निगम के राजस्व विभाग ने इस संबंध में एक विशेष अभियान की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत शहरभर में ऐसे बकायेदारों की पहचान की जा रही है और उनके विरुद्ध नोटिस जारी कर वसूली प्रक्रिया को गति दी जा रही है। राजस्व लक्ष्य को लेकर बढ़ी सक्रियता इंदौर नगर निगम को वित्तीय वर्ष 2025 के लिए संपत्ति कर से बड़े स्तर पर आय जुटाने का लक्ष्य दिया गया है। इस लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए राजस्व विभाग ने बकाया करदाताओं की सूची तैयार की है, जिन पर ₹50 हजार या उससे अधिक का टैक्स बाकी है। निगमायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बकाया राशि की वसूली में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। जो भी व्यक्ति तय समय सीमा के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाएगा, उसकी संपत्ति सील करने से लेकर कुर्की तक की कार्रवाई की जाएगी। मैन्युअल और डिजिटल डाटा का मिलान राजस्व विभाग ने विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से बकाया करदाताओं की पूरी सूची तैयार की है। इसके अलावा क्षेत्रीय अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में बकाया करदाताओं का भौतिक सत्यापन करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपें। विभाग ने बकाया करदाताओं को चेतावनी दी है कि यदि वे निर्धारित अवधि में कर का भुगतान नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। बढ़ते बकायों पर चिंता नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक शहर में ऐसे हजारों संपत्ति करदाता हैं, जिन पर हजारों-लाखों रुपये तक का बकाया है। इनमें कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने वर्षों से कर जमा नहीं किया। इस वजह से नगर निगम की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है, और विकास कार्यों के लिए फंड की कमी हो रही है। इसे देखते हुए निगम ने यह निर्णय लिया है कि वह अब विशेष वसूली अभियान चलाकर बड़े बकायेदारों को भुगतान के लिए बाध्य करेगा। नोटिस वितरण शुरू राजस्व अधिकारियों ने पहले चरण में 500 से अधिक बकायेदारों को नोटिस थमा दिए हैं। इसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यदि वे आगामी 7 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करते हैं, तो उनकी संपत्ति को सील कर दिया जाएगा या संपत्ति कर अधिनियम के अंतर्गत कुर्की की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विभाग ने यह भी बताया कि नियमित करदाताओं को प्रोत्साहन के तौर पर छूट भी दी जाएगी। जनता से अपील इंदौर नगर निगम ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अपने लंबित कर समय पर चुकाएं ताकि शहर के विकास कार्यों में किसी तरह की बाधा उत्पन्न न हो। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग स्वेच्छा से आकर कर का भुगतान करेंगे, उन्हें जुर्माने और ब्याज में कुछ राहत दी जा सकती है, लेकिन जानबूझकर चूक करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इंदौर नगर निगम की यह मुहिम साफ संकेत देती है कि अब समय पर कर न चुकाने वाले संपत्ति मालिकों के लिए राहत की गुंजाइश नहीं रहेगी। इससे न केवल राजस्व संग्रहण बढ़ेगा बल्कि शहर के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों में भी तेजी आएगी। जनता को भी यह समझना होगा कि कर देना न केवल एक कानूनी दायित्व है, बल्कि यह शहर के विकास में उनकी भागीदारी भी दर्शाता है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में बोले शिवराज सिंह: “अब खेत के फैसले खेत में होंगे, दिल्ली में नहीं”

Best Indore News: खेती अब कागजों में नहीं, जमीन पर किसानों से बातचीत के आधार पर चलेगी। कृषि नीतियों के फैसले अब मंत्रालय के कमरों में नहीं, खेतों की मिट्टी में लिए जाएंगे। यह संदेश केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को इंदौर स्थित भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान में हुई बैठक में दिया। यहां देशभर से आए वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, किसानों और अधिकारियों के बीच उनका अलग ही अंदाज नजर आया। खेत में ट्रैक्टर चलाकर उन्होंने न केवल वैज्ञानिकों को व्यावहारिक ज्ञान की अहमियत समझाई, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वे नकली नहीं, असली किसान हैं। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में चौहान(Shivraj Singh Chouhan) ने कहा, अब कृषि शोध और नीति निर्माण की प्रक्रिया बदलने जा रही है। शोध के विषय अब दिल्ली में नहीं, खेत में किसानों से चर्चा कर तय होंगे। किसान जो अनुभव और सुझाव देंगे, वही वैज्ञानिकों और नीतिकारों की दिशा तय करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने चौथी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनकर विकास की दिशा में बड़ी छलांग लगाई है। अब समय है कि विकसित भारत के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान की दिशा में भी उतनी ही गंभीरता से काम हो। लैब-टू-लैंड का मॉडल मंत्री चौहान ने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत देशभर में 2170 वैज्ञानिक टीमें बनाई गईं, जिन्होंने 1.23 लाख गांवों में जाकर 1.35 करोड़ किसानों से सीधा संवाद किया। इस अभियान में किसानों ने कई अहम मुद्दों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि खेतों में अब मजदूरों की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। ऐसे में खेती को ‘मैकेनाइजेशन’ यानी मशीनों के उपयोग की दिशा में ले जाना होगा। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को इंदौर में एक किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब खेती से जुड़े फैसले “दिल्ली के दफ्तरों” में नहीं, बल्कि “खेत की मिट्टी” में होंगे। यह वक्तव्य किसानों के हितों की प्राथमिकता और कृषि नीति में आमूलचूल बदलाव की ओर इशारा करता है। शिवराज सिंह ने कहा, “किसान अब सिर्फ उत्पादन नहीं करेगा, बल्कि उसकी राय पर योजनाएं बनेंगी। एमएसपी, बीमा योजना, खाद बीज की आपूर्ति और नई कृषि तकनीकें – सब कुछ स्थानीय जरूरत के मुताबिक तय होगा।” पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से आग्रह किया कि कृषि क्षेत्र को नौकरशाही के निर्णयों से मुक्त कर, किसानों को नीति निर्माण में भागीदार बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश के किसान अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं, निर्णयकर्ता भी होंगे। कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों ने शिवराज के बयान का स्वागत किया और इसे कृषि सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। एक राष्ट्र, एक कृषि, एक टीम चौहान ने कहा कि इसके बाद कोयंबटूर में कपास पर, मेरठ में गन्ने पर और कानपुर में दलहन पर इसी तरह के संवाद होंगे। हमारी योजना है कि हर फसल, हर क्षेत्र और हर किसान की समस्या सुनी जाए व उसका वैज्ञानिक समाधान तैयार हो। उन्होंने इसे ‘एक राष्ट्र, एक कृषि, एक टीम’ का मंत्र बताया और कहा कि अब देशभर की कृषि व्यवस्था को एक साथ, संगठित रूप से आगे बढ़ाना है। सोयाबीन उत्पादकता को आत्मनिर्भरता से जोड़ेंगे अनुसंधान केंद्र पर अन्य राज्यों से आए वैज्ञानिकों, अधिकारियों के साथ हुई विशेष बैठक में चौहान ने कहा कि सोयाबीन देश के लिए प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है और इसका तेल भारत की बड़ी आवश्यकता। भारत को सोयाबीन तेल के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, यह कहते हुए उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले बीज, जीनोम एडिटिंग तकनीक, बीज उपचार और रोग प्रतिरोधक किस्मों के विकास की आवश्यकता बताई। उन्होंने बताया कि ‘यलो मोजैक वायरस’ जैसे रोग फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके समाधान के लिए वैज्ञानिकों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी किस्में विकसित करें, जो इन रोगों से मुकाबला कर सकें। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में कार रेंटल फ्रॉड का पर्दाफाश: Zoom App से कार किराए पर लेकर बेचते थे

Best Indore News: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक चौंकाने वाला कार रेंटल फ्रॉड सामने आया है, जिसमें दो आरोपियों ने Zoom App जैसे कार रेंटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करते हुए कारों को किराए पर बुक किया और फिर उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते दामों में बेच दिया। परदेशीपुरा पुलिस ने इस मामले में दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है। फरियादी की सतर्कता से हुआ खुलासा इंदौर में कार रेंटल फ्रॉड का पर्दाफाश: Zoom App से कार किराए पर लेकर बेचते थे स जालसाजी का भंडाफोड़ तब हुआ जब भवन सक्सेना नामक एक नागरिक ने अपनी कार के रेंटल पीरियड को बार-बार बढ़ाने की संदिग्ध मांग पर संदेह जताया। उन्होंने जब Zoom App से अपनी कार को बुक कराने वाले व्यक्ति से संपर्क किया, तो जवाब संतोषजनक नहीं मिला। उन्हें शक हुआ कि कहीं उनकी कार का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए तुरंत परदेशीपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की तफ्तीश में निकली चौंकाने वाली जानकारी शिकायत मिलते ही पुलिस ने डिजिटल ट्रेसिंग और गाड़ी की लोकेशन ट्रैकिंग शुरू की। जांच में सामने आया कि जिन लोगों ने कार किराए पर ली थी, वे महज उपयोग के लिए नहीं बल्कि उसे ग्रामीण क्षेत्रों में बेचने के मकसद से बुक कर रहे थे। आरोपी अब तक लगभग 10 से अधिक कारें इस तरह बेच चुके थे। Zoom App से गाड़ियों की बुकिंग और फिर ग़ायब पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी Zoom जैसी प्रतिष्ठित रेंटल कंपनियों के ऐप्स से फर्जी डॉक्युमेंट्स के सहारे गाड़ियों को बुक करते थे। वे कार लेकर बड़े शहरों से दूर, छोटे कस्बों और गांवों में चले जाते, जहां वाहन के असली मालिक की जांच करने वाला कोई नहीं होता। यहां वे कम दामों पर अनजान ग्रामीणों को ये गाड़ियाँ बेच देते थे। कार बेचने की तरकीब आरोपियों ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पहुंच बना रखी थी और वहां पहले से कुछ ‘बिचौलियों’ से संपर्क कर रखा था। वे वहां की भोली-भाली जनता को ये कहकर गाड़ियाँ बेचते थे कि यह बैंक से नीलामी में मिली है या मालिक विदेश जा रहा है। इस तरह वे एक नई गाड़ी को भी कम कीमत पर बेच देते थे और जल्द पैसा कमा लेते थे। दो आरोपी गिरफ्तार, गिरोह में और लोगों की तलाश पुलिस ने फिलहाल दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके नाम गोपनीय रखे गए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में इस रैकेट में और भी लोगों के शामिल होने की संभावना है, विशेषकर वे लोग जो ग्रामीण इलाकों में कारें खरीदते और बेचते हैं। पुलिस का कहना है कि जल्दी ही इस फ्रॉड रैकेट के मास्टरमाइंड को भी पकड़ा जाएगा। क्या बोले पुलिस अधिकारी? परदेशीपुरा थाना प्रभारी ने कहा – “यह एक सुनियोजित ठगी का मामला है। आरोपियों ने तकनीक का इस्तेमाल करके कारों को किराए पर लिया और फिर उन्हें बेचने की योजना बनाई। फरियादी की सतर्कता और समय पर रिपोर्टिंग से हम इस फ्रॉड का जल्दी खुलासा कर सके।” Zoom App जैसी सेवाओं के लिए चेतावनी इस घटना के बाद ऑनलाइन रेंटल प्लेटफॉर्म्स को भी सजग रहने की सलाह दी गई है। पुलिस ने कंपनियों से अपील की है कि वे बुकिंग के लिए यूज़ किए जा रहे दस्तावेजों की दोबारा जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रिपोर्ट करें। आम जनता के लिए सबक यह मामला आम नागरिकों के लिए भी एक चेतावनी है कि जब भी आप अपनी कार रेंट पर दें या किसी भी प्रकार की संपत्ति को किराए पर दें, तो सभी दस्तावेजों और उपयोग की निगरानी करें। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय आवश्यक सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। इंदौर पुलिस की तेज़ कार्यवाही ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। इस घटना से यह स्पष्ट है कि टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग करके भी फ्रॉड संभव है, लेकिन समय पर सतर्कता और सही कदम उठाकर इससे बचा जा सकता है। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए नागरिकों, प्लेटफॉर्म्स और प्रशासन – सभी को मिलकर काम करना होगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर के उर्दू स्कूलों में हिंदी-संस्कृत शिक्षकों की तैनाती बनी शिक्षा में बाधा

Best Indore News: मध्य प्रदेश की शैक्षणिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के कई शासकीय उर्दू स्कूलों में हिंदी और संस्कृत विषय के शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है, जबकि इन स्कूलों में सभी विषय उर्दू भाषा में पढ़ाए जाते हैं। नतीजा यह हो रहा है कि जिन छात्रों को उर्दू माध्यम में पढ़ाई करनी थी, वे या तो विषय के शिक्षक के अभाव में पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं या फिर उन्हें ऐसे विषय पढ़ाए जा रहे हैं जिनका उनके सिलेबस से कोई संबंध नहीं है। नियुक्ति में हो रहा है रसूख का दुरुपयोग मध्य प्रदेश स्थानीय सूत्रों और अभिभावकों की शिकायतों के अनुसार, कई हिंदी और संस्कृत विषय के शिक्षक अपने रसूख का उपयोग कर उर्दू माध्यम के स्कूलों में पदस्थापना ले लेते हैं। यहाँ आने के बाद वे जानते हैं कि उन्हें पढ़ाने की बाध्यता नहीं है, क्योंकि स्कूल की भाषा, पाठ्यक्रम और छात्रों की जरूरत उनके विषय से मेल नहीं खाती। परिणामस्वरूप, वे दिनभर विद्यालय में आराम करते हैं और समय पूरा होते ही घर चले जाते हैं। छात्रों के भविष्य पर असर इन स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग से आते हैं। उर्दू माध्यम ही उनकी पढ़ाई का एकमात्र सहारा है। लेकिन जब उनके लिए निर्धारित विषयों के शिक्षक ही नहीं मिलते, तो शिक्षा की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है। कई छात्र समझ ही नहीं पाते कि उन्हें हिंदी और संस्कृत पढ़ाई क्यों जा रही है, जबकि बोर्ड परीक्षा में उनकी भाषा उर्दू है। स्कूल प्रशासन मौन, शिक्षा विभाग भी उदासीन शहर के कुछ उर्दू स्कूलों के प्राचार्यों ने इस स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग से लिखित शिकायत भी की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। कुछ स्कूलों ने इस समस्या को लेकर नगरीय प्रशासन एवं शिक्षा मंत्री तक बात पहुँचाने का प्रयास किया है, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है। एक वरिष्ठ शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह सिस्टम की खामी है। शिक्षक तबादला लेकर उर्दू स्कूल में इसलिए आते हैं क्योंकि यहाँ अपेक्षाकृत कम कार्यभार है। लेकिन इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है।” कई स्कूल जहां हिंदी माध्यम के शिक्षकों की कमी इंदौर के विजय नगर, बाणगंगा आदि क्षेत्र में कई ऐसे शासकीय स्कूल हैं, जहां शिक्षकों की कमी है। बावजूद इसके उर्दू स्कूलों में आराम कर रहे शिक्षकों को पढ़ाने के लिए यहां नहीं भेजा जा रहा है। कई बार हो चुकी शिकायत उर्दू स्कूलों में हिंदी और संस्कृत माध्यम के शिक्षकों के स्थानांतरण के संबंध में पालक संघ ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को कई बार शिकायत की है। विद्यार्थी भी अपने स्तर पर स्कूलों के प्राचार्य समस्या बता चुके हैं। फिर भी निराकरण नहीं हुआ है। विद्यार्थियों ने बताया कि उर्दू स्कूलों में गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान ऐसे विषय भी उर्दू में पढ़ाए जाते हैं। इस कारण हिंदी भाषा के शिक्षक नहीं पढ़ा पा रहे हैं। समाधान की मांग अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और उर्दू भाषा से जुड़े शिक्षाविदों ने सरकार से मांग की है कि: इंदौर जैसे शिक्षित शहर में उर्दू माध्यम के छात्रों को उनके अधिकारों से वंचित किया जाना न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह शिक्षा की समावेशी नीति पर भी सवाल खड़े करता है। यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो यह उर्दू स्कूलों के भविष्य और वहाँ पढ़ रहे हजारों छात्रों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में शिवराज और कैलाश विजयवर्गीय की बंद कमरे में 18 मिनट की अहम बैठक

Best Indore News: इंदौर की राजनीतिक फिजा रविवार को उस समय अचानक गर्मा गई, जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य सरकार में वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक बंद कमरे में हुई मुलाकात चर्चा का विषय बन गई। यह मुलाकात लगभग 18 मिनट तक चली और खास बात यह रही कि इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ठाकुर को बाहर इंतजार करना पड़ा। घटना इंदौर के एक विशिष्ट कार्यक्रम की है, जिसमें कई भाजपा के वरिष्ठ नेता, राज्य सरकार के मंत्रीगण और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम से पहले ही यह साफ हो गया था कि शिवराज सिंह चौहान और कैलाश विजयवर्गीय किसी अहम विषय पर चर्चा करना चाहते हैं। इसी के चलते दोनों नेताओं ने खुद को एक कमरे में अलग किया, जहाँ करीब 18 मिनट तक बातचीत होती रही। क्या थी बंद कमरे की चर्चा? हालांकि बातचीत का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हैं कि यह चर्चा आने वाले मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार, लोकसभा उपचुनाव की रणनीति, या पार्टी के आंतरिक समन्वय से जुड़ी थी। सूत्रों के अनुसार, चर्चा का विषय भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, और हाल ही में सामने आई नीति मतभेदों को लेकर था। यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले समय में भाजपा के भीतर बड़ी जिम्मेदारियों के फेरबदल हो सकते हैं। 18 मिनट का इंतजार और अनुप्रिया ठाकुर का संयम जैसे ही शिवराज और कैलाश बंद कमरे में गए, कार्यक्रम में मौजूद अन्य नेताओं और अतिथियों के बीच हड़बड़ाहट और कुर्सियों पर कानाफूसी शुरू हो गई। सभी की निगाहें उस कमरे के दरवाज़े पर टिकी रहीं, जहाँ ये दोनों नेता भीतर विचार-विमर्श कर रहे थे। इस बीच, केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ठाकुर जो पहले से बैठक के लिए आमंत्रित थीं, उन्हें बाहर इंतजार करना पड़ा। उन्होंने संयमित व्यवहार दिखाते हुए किसी भी असहजता को सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन यह स्पष्ट था कि वह इस “अप्रत्याशित बैठक” से अनभिज्ञ थीं। राजनीतिक संदेश और संकेत इस मुलाकात ने राजनीतिक विश्लेषकों को एक बार फिर सक्रिय कर दिया है। जहाँ एक ओर शिवराज सिंह चौहान हाल ही में भाजपा संसदीय बोर्ड में नई भूमिका के लिए चर्चा में हैं, वहीं कैलाश विजयवर्गीय इंदौर और मध्य प्रदेश की राजनीति में एक पावर सेंटर माने जाते हैं। कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों नेताओं की यह मुलाकात एक “सहमति-संकेत” रणनीति का हिस्सा हो सकती है। इसमें वे यह तय कर रहे हैं कि राज्य में संगठन और प्रशासन के स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ना है। भाजपा कार्यकर्ताओं और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं भाजपा के कार्यकर्ताओं में इस चर्चा को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ इसे नेतृत्व के बीच अच्छा समन्वय मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इससे संदेश गलत जा सकता है, विशेषकर जब केंद्रीय मंत्री को इंतजार करना पड़े। विपक्ष ने भी इस पर चुटकी ली। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि यह भाजपा की आंतरिक अस्थिरता और वर्चस्व की लड़ाई को उजागर करता है। “जब एक केंद्रीय मंत्री को इंतजार करना पड़े और प्रदेश नेता बंद कमरे में बैठक करें, तो इससे कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े होते हैं,” – कांग्रेस नेता का बयान। आने वाले फैसलों पर असर? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह 18 मिनट की बातचीत आने वाले नौकरशाही फेरबदल, नीति निर्माण, और राजनीतिक नियुक्तियों को प्रभावित कर सकती है। खासकर इंदौर, भोपाल, उज्जैन जैसे प्रमुख जिलों में प्रशासनिक निर्णयों और पार्टी संगठन में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इंदौर में शिवराज सिंह चौहान और कैलाश विजयवर्गीय की बंद कमरे की बैठक केवल एक साधारण बातचीत नहीं थी। इसके पीछे कई गहरे राजनीतिक संदेश छुपे हो सकते हैं। आने वाले दिनों में भाजपा और मध्यप्रदेश सरकार के भीतर होने वाले बदलाव इस बैठक के प्रभाव को स्पष्ट कर देंगे। राजनीति में हर संकेत का एक संदेश होता है – और इस बार यह संदेश दिल्ली से भोपाल तक पहुंच चुका है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
FSSAI – अब खाद्य पैकिंग पर नहीं दिखेगा 100% शुद्धता का दावा

Best Indore News: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य पदार्थों की पैकिंग पर 100 प्रतिशत के चिह्न का उपयोग करने पर रोक लगा दी है। एफएसएसएआई का मानना है कि इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। यह निर्देश सभी तरह के खाद्य पदार्थों पर लागू होगा और पुरानी पैकिंग को सितंबर माह तक बाजार से हटा लिया जाएगा। किसी भी तरह के खाद्य पदार्थ की पैकिंग पर अब 100 प्रतिशत के चिह्न का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने इस पर रोक लगा दी है। प्राधिकरण ने माना है कि 100 प्रतिशत के दावे और निशान से उपभोक्ता भ्रमित हो रहे हैं। पहले प्राधिकरण ने सिर्फ पैक्ड फलों के रस को लेकर ऐसे निर्देश दिए थे लेकिन अब सभी तरह के खाद्य पदार्थों को इसके दायरे में लिया गया है। इसमें इंटरनेट मीडिया इंफ्लूएंसरों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। हालांकि उद्योगों का धड़ा इस नियम पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है। सभी को जारी किए निर्देश बीते दिनों एफएसएसएआई ने सभी खाद्य पदार्थ निर्माताओं के लिए निर्देश जारी करते हुए कहा कि खाद्य उत्पाद लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री पर 100 प्रतिशत शब्द का उपयोग न किया जाए। इसके साथ ही ऐसे शब्द या चिह्न वाली पुरानी पैकिंग भी सितंबर माह तक बाजार से हटा ली जाए। इस आदेश के पीछे कारण बताते हुए एफएसएसएआई ने माना कि नियामक प्रविधानों तहत इसमें अस्पष्टता है, ऐसे में इसकी गलत व्याख्या उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है। खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम 2018 में 100 प्रतिशत शब्द को किसी भी तरह से परिभाषित नहीं किया गया है। ऐसे में यह शब्द उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है। इस बीच देश में खाद्य तेल उत्पादकों की शीर्ष संस्था साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) ने एफएसएसएआई को ज्ञापन सौंप कर मांग रखी है कि जारी निर्देश पर पुनर्विचार किया जाए। नियमों में ही मिलावट की छूट दरअसल, देश के खाद्य सुरक्षा और मानक विनिमय में ही तमाम खाद्य पदार्थों में सम्मिश्रण या तय पैमानों तक सम्मिश्रण की छूट दे रखी है। जैसे किसी खाद्य वस्तु चाहे बिस्किट हो या घी-तेल से बना कोई पदार्थ या कुकिंग मीडियम, यदि उसमें दो प्रतिशत तक ट्रांसफेट है तो उसे नियमों में ट्रांसफेट फ्री माना जाएगा। इसी तरह खाद्य तेलों में 20 प्रतिशत तक ब्लेंडिंग (मिश्रण) की छूट सरकार ने ही दे रखी है, यानी एक तेल में दूसरे तेल की 20 प्रतिशत तक मिलावट की जा सकती है। सिर्फ सरसों तेल में किसी अन्य तेल की ब्लेंडिंग पर रोक है। काफी पावडर भी उदाहरण है क्योंकि देश के खाद्य सुरक्षा नियम छूट देते हैं कि इंस्टेंट काफी पावडर में चिकोरी के पौधों का पावडर मिलाया जा सकता है। तमाम इंस्टेंट काफी पावडर में 49 प्रतिशत तक चिकोरी की ब्लेंडिंग की छूट दी गई है। इसी तरह मक्खन के विकल्प के तौर पर बटरिन या माजरिन जैसे पदार्थ बाजार में बिक रहे हैं। किसी पदार्थ के 100 ग्राम या 100 मिली में 0.59 ग्राम शुगर है तो उसे शुगर फ्री माना जाने की इजाजत नियम देते हैं। ऐसे में ऐसे तमाम उत्पादों पर 100 प्रतिशत का मार्का उपयोग किए जाने पर भी इससे पहले तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती थी। क्या कहती हैं मौजूदा नियमावली? भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम 2018 में 100 प्रतिशत शब्द की कोई परिभाषा नहीं है। जबकि नियम कई उत्पादों में सीमित मात्रा में मिलावट की छूट पहले से ही देते हैं: इन स्थितियों में “100 प्रतिशत” का दावा प्रैक्टिकली गलत साबित होता है। एफएसएसएआई का यह कदम खाद्य उत्पादों में गुणवत्ता और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है। उपभोक्ताओं को जहां इस निर्णय से लाभ मिलेगा, वहीं उद्योग जगत को अपनी ब्रांडिंग रणनीतियों पर नए सिरे से काम करना होगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में आरटीओ की कार्रवाई बनी चर्चा का विषय – बुक की टैक्सी, फिर किया जब्त
Best Indore News: इंदौर में आरटीओ ने बिना परमिट और पंजीकरण के टैक्सी सेवाएं देने वाले निजी वाहन चालकों पर कार्रवाई की। टीम ने यात्री बनकर निजी कारों को बुक किया और जब्त कर लिया। आरटीओ ने बताया कि यह वाहन तय नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, इसलिए उनको जब्त किया गया। इंदौर। इंदौर जिले में नियम विरुद्ध टैक्सी के रूप में उपयोग की जा रही निजी कारों पर बुधवार को आरटीओ द्वारा कार्रवाई की गई। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए यात्री बनकर निजी कारों को बुक किया। इन कारों में सवार होकर विजय नगर स्थित पुराने आरटीओ कार्यालय पहुंचे और यहां पर सभी कारों को जब्त कर लिया। आरटीओ की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही अन्य निजी वाहन चालक वाहन लेकर भाग गए। परिवहन विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ निजी वाहन चालक बगैर परमिट और पंजीकरण के टैक्सी सेवाएं दे रहे हैं। इसके कारण अधिकृत टैक्सी चालकों को नुकसान हो रहा है। कैसे हुई कार्रवाई? घटना इंदौर के विजय नगर क्षेत्र की बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग को शिकायत मिली थी कि शहर में कई टैक्सी व कैब सेवा देने वाले वाहन बिना वैध परमिट, फिटनेस, या बीमा के दौड़ रहे हैं। इसके बाद आरटीओ की टीम ने एक योजना बनाई। उन्होंने एक ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर ऐप से एक टैक्सी बुक की। जैसे ही टैक्सी ड्राइवर बताए गए स्थान पर पहुंचा, आरटीओ टीम ने मौके पर ही उसकी गाड़ी की फिटनेस, बीमा, परमिट और प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच शुरू कर दी। जांच में सामने आया कि वाहन के दस्तावेज अपूर्ण और अवैध थे। टैक्सी का बीमा समाप्त हो चुका था, साथ ही उसका कमर्शियल परमिट भी नहीं था। इसके बाद वाहन को वहीं से सीज (जब्त) कर लिया गया। प्राइवेट कार को बना लिया टैक्सी नियमों का उल्लंघन की शिकायत मिलने पर परिवहन विभाग की टीम ने टैक्सी बुक कर निजी नंबर प्लेट के वाहनों को उपयोग करते पाए जाने पर कार्रवाई की गई। आरटीओ प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि एयरपोर्ट एवं उसके आसपास के क्षेत्र में लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ निजी वाहन ड्राइवर बिना परमिट और पंजीकरण के टैक्सी सेवाएं दे रहे हैं। यह वाहन तय नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, इसलिए उनको जब्त किया गया। टैक्सी गाड़ियों में फिटनेस जरूरी निजी कारों का टैक्सी के रूप में उपयोग परमिट बनाने के बाद ही किया जा सकता है। इन कारों का फिटनेस भी बनता है, ताकि यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। दस साल से पुरानी कार को टैक्सी परमिट नहीं दिया जाता है। वहीं स्पीड गवर्नर, पैनिक बटन भी अनिवार्य होता है। इंदौर शहर के सुगम, सुरक्षित, सुखद यातायात के लिए नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक लाने के उद्देश्य से नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई भी की जा रही है। इसी कड़ी में यातायात पुलिस के सूबेदार अमित कुमार यादव व टीम तेजाजी नगर क्षेत्र में यातायात प्रबंधन कर रहे थे। इस दौरान अनधिकृत हूटर लगे वाहनों की जांच भी की गई। तीन वाहनों पर हूटर लगा होने पर रोका गया। परीक्षण करने पर अनधिकृत हूटर लगा होने के लिए तीन-तीन हजार का जुर्माना कर हूटर उतरवाया गया। यातायात नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई। पुलिस उपायुक्त यातायात प्रबंधन अरविंद तिवारी के दिशा-निर्देशन में यातायात प्रबंधन पुलिस द्वारा सघन यातायात जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आप क्या करें यदि आपके पास टैक्सी या कमर्शियल वाहन है? इंदौर में RTO की यह कार्रवाई साफ तौर पर यह संदेश देती है कि अब लापरवाह टैक्सी ऑपरेटरों के लिए “नो टॉलरेंस पॉलिसी” लागू हो गई है। ऐसे मामलों में विभाग सख्त रुख अपनाएगा और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। अगर आप टैक्सी या कमर्शियल गाड़ी चला रहे हैं, तो आज ही अपने सभी दस्तावेज जांच लें, क्योंकि अगली बुकिंग RTO की हो सकती है! इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में भारी बारिश का यलो अलर्ट, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

Indore Weather Updait: इंदौर, 26 जून 2025 – मौसम विभाग ने इंदौर और आसपास के इलाकों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। चेतावनी में कहा गया है कि आज दीर्घावधि बादल और मॉनसून की सक्रियता के चलते मध्यम स्तर की बारिश होगी, साथ ही बिजली और तेज हवाओं की संभावना भी बनी रहेगी । पिछले 24 घंटों में पूर्वी इंदौर में 15.5 मिमी और पश्चिमी भाग में 1 मिमी बारिश दर्ज हुई महत्वपूर्ण राहत मिली है इस सप्ताह, इंदौर का तापमान लगभग 4–6°C नीचे दर्ज किया जा रहा है—अधिकतम रीडिंग 28–29°C के आसपास और न्यूनतम 23–24°C बनी हुई है । इंदौर में आज भारी बारिश के आसार हैं, मौसम विभाग ने इसके लिए यलो अलर्ट जारी किया है। शहर में गरज-चमक के साथ भारी वर्षा हो सकती है और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवा चल सकती है। विभाग के अनुसार, वर्तमान में उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश पर ऊपरी हवा का चक्रवात और बंगाल की खाड़ी पर एक चक्रवात सक्रिय है। परिस्थिति और अगले चार दिन का पूर्वानुमान मौसम विज्ञानियों के अनुसार, आज से लेकर आगामी शनिवार तक इंदौर में मानसून की सक्रियता बनी रहेगी। अगले 4–7 दिनों में हल्की से मध्यम बारिश, आंशिक बादल, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी रहेगा । विशेष दिन-wise पूर्वानुमान है: 27 जून के बाद बारिश में आएगी कमी वहीं अरब सागर से एक द्रोणिका उत्तर-पूर्व मप्र की ओर जा रही है। ऐसे में अरब सागर से आ रही नमी के कारण इंदौर में अभी मध्यम से भारी वर्षा की स्थितियां दिखाई दे रही हैं। गुरुवार को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनेगा। इस वजह से बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी पर रोक लगेगी। ऐसे में 27 जून को शहर में मध्यम बारिश होगी और इसके बाद बारिश में कमी आएग क्या जोखिम है – तैयारी आवश्यक संभावित चुनौतियों पर नजर अपनी सुरक्षा के लिए उठाएं ये कदम सावधान रहें, सुरक्षित रहें मौसम की यह सक्रियता किसानों के लिए फायदेमंद है, लेकिन शहरवासियों के लिए यह चुनौतियाँ भी ला सकता है—खासकर ट्रैफिक और स्वास्थ्य के संदर्भ में।इसलिए आवश्यकता है कि हम सभी योजना और समय की निगरानी के साथ सतर्क रहें, बारिश से उत्पन्न जोखिमों को नियंत्रित करें। बारिश जारी है, लेकिन सावधानी के साथ आप शिविर में सुरक्षित रह सकते हैं। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।