सेंट्रल म्यूजियम इंदौर: मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर का अद्भुत संगम

सेंट्रल म्यूजियम, जिसे इंदौर संग्रहालय के नाम से भी जाना जाता है, न केवल मध्य प्रदेश के सबसे पुराने संग्रहालयों में से एक है, बल्कि यह उस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है जिसे इंदौर सदियों से संजोए हुए है। 1929 में होलकर शासकों द्वारा स्थापित यह संग्रहालय, आज भी इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और कला के जिज्ञासु विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। संग्रहालय का वर्तमान स्थान, जो इंदौर के जनरल पोस्ट ऑफिस के समीप(PV4H+3HW, Near GPO Square, Residency, Navlakha, Indore, Madhya Pradesh 452001) स्थित है, 1965 में तब निर्धारित किया गया जब इसे राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकार में लाकर केंद्रीय संग्रहालय घोषित किया गया। इस स्थान पर आने वाला प्रत्येक आगंतुक प्राचीन भारतीय सभ्यता की विविधताओं और सांस्कृतिक गहराइयों को देखने और समझने का एक दुर्लभ अवसर प्राप्त करता है। इस संग्रहालय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रागैतिहासिक काल से लेकर मध्यकालीन भारत तक की अनगिनत कलाकृतियां, मूर्तियां, सिक्के और हथियार एक ही छत के नीचे देखने को मिलते हैं। संग्रहालय में कुल आठ दीर्घाएँ हैं, जिनमें से दो प्रमुख दीर्घाएं विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं — एक प्रागैतिहासिक कलाकृतियों के लिए समर्पित है और दूसरी हिंदू पौराणिक कथाओं से जुड़ी मूर्तिकला और नक्काशी को प्रदर्शित करती है। विशेष रूप से परमार शैली की मूर्तियां इस संग्रहालय की शोभा को और भी बढ़ा देती हैं, क्योंकि इन मूर्तियों की जटिलता, बारीकी और उत्कृष्ट शिल्प कौशल देखने लायक होता है। इसके अतिरिक्त, संग्रहालय में 11वीं शताब्दी के वास्तुशिल्प अवशेष भी प्रदर्शित किए गए हैं, जिनमें एक भव्य दरवाजे का ढांचा प्रमुख आकर्षण का केंद्र है, जो तत्कालीन निर्माण कला और धार्मिक शिल्प की गहराई को दर्शाता है। इतना ही नहीं, संग्रहालय में मराठा, राजपूत और मुगल कालीन हथियारों का प्रभावशाली संग्रह भी है, जिससे यह समझना आसान हो जाता है कि भारत की युद्ध संस्कृति और सैन्य प्रणाली किस प्रकार से विकसित हुई। इन हथियारों में तलवारें, ढालें, भाले, और पुराने बंदूक जैसे स्वदेशी और आधुनिक दोनों प्रकार के शस्त्र सम्मिलित हैं। इसके साथ-साथ, मध्य प्रदेश के विभिन्न प्राचीन मंदिरों से प्राप्त अवशेषों का यह संग्रहालय संरक्षण भी करता है, जिससे राज्य की धार्मिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य कला के गौरवशाली अतीत की स्पष्ट झलक मिलती है। सिक्कों का संग्रह भी अत्यंत समृद्ध है, जो प्राचीन मुद्राओं के माध्यम से भारत के आर्थिक इतिहास की यात्रा कराता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि सेंट्रल म्यूजियम, इंदौर न केवल इंदौर शहर की शान है, बल्कि यह संपूर्ण मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक चेतना को संरक्षित करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र भी है। यदि आप भारतीय संस्कृति, कला और इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यह संग्रहालय आपके लिए अवश्य ही एक अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध होगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
MP बिजली बिल बढ़ेगा! बढ़े रेट और सुरक्षा निधि कटौती से ग्राहकों की जेब होगी हल्की

MP News: मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) की नई टैरिफ नीति में बिजली दरों में 3.46–3.5% तक की बढ़ोतरी की गई है, जिससे घरेलू एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा। साथ ही, बिल में एक नया सुरक्षा निधि (Security Fund) चार्ज भी शामिल हो गया है, जिससे सालाना खर्च और भी बढ़ने की आशंका है। यह खबर उन सभी नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिन्हें जून–जुलाई माह में बिजली बिल आएंगे। नया टैरिफ रेट क्या होगा? भारतीय समाचार में प्रकाशित खबर के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से लागू हो रहे नए रेट के अनुसार: उदाहरण: सुरक्षा निधि क्या है? सुरक्षा निधि एक नया कटौती-आधारित चार्ज है, जिसे डिस्कॉम्स उपभोक्ताओं से एकमुश्त या किश्तों में एकमुश्त जमा करवाएंगे।यह राशि ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रखने, स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन और अत्याधुनिक उपकरणों के रखरखाव में खर्च होगी। हालांकि, इसकी दर या वसूली की प्रक्रिया अभी पूर्ण स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह बिल की राशि में सीधे जुड़ चुकी है। औसत घरेलू उपभोक्ता पर असर ₹4/unit से लेकर ₹7/unit तक की दर बढ़ने पर औसत बिल प्रभावित होगा। मान लीजिए: केवल सुरक्षा निधि का अविशिष्ट शुल्क भी ₹50–₹200 प्रति माह हो सकता है, जिससे कुल मासिक बिल ₹1000–₹1500 तक पहुंच सकता है। किस पर क्या असर? सरकारी मुआवज़ा: ₹566 प्रति उपभोक्ता इस वृद्धि के बीच कुछ राहत भी आई है। MP राज्य सरकार ने घोषणा की है कि 1.07 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति उपभोक्ता ₹566 के रूप में बिजली बिल में सब्सिडी दी जाएगी कुल अनुमानित खर्चः ₹27,000 करोड़ वार्षिक। नीति की दरें: यह ठोस कदम घरेलू उपभोक्ताओं की जेब पर असर को कम करेगा। उपभोक्ता को क्या करना चाहिए? दीर्घकालिक सुधार—“सोलर फीडर” और सब्सिडी निष्कर्ष: सजगता और समझ जरूरी MPERC की टैरिफ बढ़ोतरी और सुरक्षा निधि कटौती के फैसले से उपभोक्ताओं की जेब पर निश्चित तौर पर असर पड़ेगा। लेकिन सरकारी सब्सिडी, किसान योजनाएं, सोलर प्रोजेक्ट और संभावित स्मार्ट मीटर छूट मंथन से यह असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है। फिर भी, यह समय सैद्धांतिक नहीं, बल्कि बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप सतर्कता, जानकारी और बचत का है। आपका अगला कदम—अपनी खपत का ट्रैक रखें, सब्सिडी कागजात संभालें और जरूरत हो तो शिकायत करें।
इंदौर न्यूज़: NEET परीक्षा में बारिश और बिजली ने डाला असर, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

Best Indore News: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 2024 में इस बार न केवल देशभर में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों ने माहौल गर्म किया, बल्कि मध्य प्रदेश के इंदौर में एक अलग ही तकनीकी और प्राकृतिक बाधा चर्चा में रही। बारिश और बिजली की कटौती के चलते कई छात्रों की परीक्षा बाधित हो गई। इस मुद्दे पर अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह मामला देशभर में हो रहे NEET विवादों के बीच एक अलग आयाम जोड़ता है। जानिए इस पूरे घटनाक्रम की गहराई, कोर्ट की प्रतिक्रिया और आगे की संभावनाएं। क्या था मामला? – इंदौर सेंटर पर बारिश और बिजली ने बिगाड़ी परीक्षा 4 मई 2024 को जब NEET की परीक्षा देशभर में हो रही थी, इंदौर के एक परीक्षा केंद्र पर अचानक तेज़ बारिश और बिजली की कटौती ने माहौल को चुनौतीपूर्ण बना दिया। इन कारणों से कई छात्रों ने यह आरोप लगाया कि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई है और उन्हें पुनः परीक्षा (re-test) का मौका मिलना चाहिए। हाईकोर्ट पहुंचा मामला: छात्रों की याचिका पर हुई सुनवाई घटना के बाद कई छात्रों और उनके अभिभावकों ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट की शरण ली। उनकी मांग थी कि: इस याचिका पर सुनवाई जबलपुर उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में हुई। NTA और केंद्र सरकार के वकीलों ने जवाब दाखिल किया, वहीं याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि छात्रों को परीक्षा देने का उचित वातावरण नहीं मिला था। कोर्ट ने सभी पक्षों की बात सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति अमरनाथ के वर्मा की खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इसका मतलब है कि अदालत अब इस मामले पर सोच-विचार कर रही है और जल्द ही अंतिम निर्णय सुनाएगी। अदालत ने ये प्रमुख बिंदु उठाए: छात्रों की पीड़ा: मेहनत पर पानी फिर गया परीक्षा देने वाले छात्र आदित्य शर्मा ने कहा: “मैंने एक साल दिन-रात पढ़ाई की, लेकिन जिस सेंटर में मैं गया, वहां अचानक लाइट चली गई और फैन बंद हो गए। गर्मी में पसीने से OMR शीट भीग गई, और ध्यान भंग हो गया।” प्रियंका त्रिवेदी, एक छात्रा की मां ने कहा: “हमने अपने बच्चे को लाखों रुपये की कोचिंग करवाई, लेकिन परीक्षा के दिन ऐसी लापरवाही क्यों?” इन अभिभावकों और छात्रों की भावनाएं यह दर्शाती हैं कि ऐसी घटनाएं सिर्फ तकनीकी समस्याएं नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ी संवेदनशील परिस्थितियां हैं। NTA का पक्ष: परिस्थितियां अप्रत्याशित थीं NTA ने अपने जवाब में कहा कि: राष्ट्रीय स्तर पर भी विवादों में रहा NEET 2024 NEET 2024 पर इस बार कई विवाद छाए रहे: इस माहौल में इंदौर की तकनीकी बाधा वाला मामला छात्रों के लिए न्याय और निष्पक्षता की नई कसौटी बनकर सामने आया है। आगे क्या? – कोर्ट का फैसला और संभावित प्रभाव यदि कोर्ट पुनः परीक्षा का आदेश देती है: शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की राय वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र जोशी का मानना है: “इस तरह की तकनीकी बाधाएं एक बड़ी परीक्षा के दौरान कभी-कभी आ सकती हैं, लेकिन उनका समाधान समय पर होना चाहिए और छात्रों को न्याय मिलना चाहिए।” वहीं पूर्व विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. अनामिका गुप्ता कहती हैं: “अगर छात्रों को लगता है कि उनका हक मारा गया है, तो अदालत का दरवाजा खटखटाना उनका अधिकार है।” न्याय की प्रतीक्षा में छात्र और अभिभावक इस मुद्दे ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET न सिर्फ कठिन है, बल्कि इसकी प्रक्रिया भी उतनी ही संवेदनशील है।बारिश और बिजली जैसी मामूली दिखने वाली समस्याएं भी परीक्षा को किस हद तक प्रभावित कर सकती हैं, यह इंदौर के छात्रों के अनुभव से समझा जा सकता है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के उस फैसले पर टिकी हुई हैं, जो न सिर्फ इन छात्रों के लिए बल्कि भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के लिए भी दिशा तय करेगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर का छत्रीबाग – होलकर राजवंश की भव्य धरोहर और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम

इंदौर का छत्रीबाग: जहां इतिहास, कला और संस्कृति एक साथ जीवंत होती है जब पेशवाओं ने मालवा की बागडोर होलकर वंश को सौंपी, तब मल्हार राव होलकर ने प्रथम सूबेदार के रूप में इस भूमि पर शासन की नींव रखी। प्रारंभ में उन्होंने कंपेल गांव को चुना, किंतु शीघ्र ही इंदौर में आकर सत्ता को विस्तार दिया। यद्यपि स्वतंत्रता के बाद राजे-रजवाड़ों और रियासतों का युग समाप्त हो गया, फिर भी उन गौरवशाली दिनों की छाप आज भी इंदौर की हवाओं में महसूस की जा सकती है। इन्हीं ऐतिहासिक यादों का सुंदर प्रतिबिंब छत्रीबाग परिसर में देखा जा सकता है, जहां एक किलेनुमा परकोटे के बीच, होलकर परिवार के राजाओं और रानियों की छत्रियां आज भी गर्व से खड़ी हैं। जीर्णोद्धार के बाद बदली तस्वीर: बदहाली से खुशहाली तक का सफर स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत लगभग 4.3 करोड़ रुपये की लागत से छत्रीबाग का कायाकल्प किया गया है। पहले जहां वीरानी और उपेक्षा का आलम था, अब वहीं सुव्यवस्थित उद्यान, सुंदर पाथवे और आधुनिक लाइटिंग ने इस ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान दी है। अब यह परिसर खासगी ट्रस्ट के संरक्षण में है और पर्यटक सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक यहां भ्रमण कर सकते हैं। होलकर राजवंश की छत्रियां: हर कृति में है इतिहास की आत्मा इस परिसर में आठ प्रमुख छत्रियों के अतिरिक्त अन्य सदस्य जैसे गौतमाबाई, खांडेराव, तुकोजीराव द्वितीय, स्नेहलता राजे आदि की छत्रियां भी स्थापित हैं। सबसे पहली छत्री मल्हार राव होलकर की थी, जिसका निर्माण 1780 में देवी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था। इन छत्रियों की विशिष्टता यह है कि हर एक छत्री की शिल्पकला, नक्काशी और स्थापत्य शैली भिन्न है। मल्हार राव व मालेराव की छत्रियां राजपूत छत्री परंपरा में बनी हैं, जिनमें ऊँची जगती और अष्टकोणीय गर्भगृह हैं। स्थापत्य कला का अद्भुत समागम: राजपूत और मराठा शैली की झलक यहां की छत्रियां राजपूत और मराठा स्थापत्य का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती हैं। मल्हार राव की छत्री विशेष रूप से आकर्षक है, जिसमें देवी-देवताओं की मूर्तियां, बेलबूटे, सूर्य और यम जैसी आकृतियां बनी हुई हैं। गौतमाबाई की छत्री में स्थापित पार्वती जी की मूर्ति विशेष ध्यान आकर्षित करती है, जिसमें वे शिवजी का अभिषेक करती प्रतीत होती हैं। वहीं खांडेराव की छत्री में अहिल्याबाई समेत अन्य रानियों की मूर्तियां स्थापित हैं। आधुनिक रोशनी और सुविधाएं: अब शूटिंग और इवेंट्स की भी है अनुमति हाल ही में परिसर में सुंदर विद्युत सज्जा की गई है, जिससे रात के समय भी छत्रियों की भव्यता निखरकर सामने आती है। अब यह स्थल न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए बल्कि फोटोग्राफरों, शूटिंग और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। हालांकि, शूटिंग व इवेंट्स के लिए पूर्व अनुमति और शुल्क आवश्यक है। इसके साथ ही यहां एक खूबसूरत बगीचा भी विकसित किया जा रहा है। छत्रीबाग कैसे पहुंचें: Indore में यात्रा की पूरी जानकारी रेलमार्ग से: छत्रीबाग, इंदौर जंक्शन से लगभग 2.8 किलोमीटर और सैफी नगर स्टेशन से मात्र 2.2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से आसानी से ऑटो या टैक्सी द्वारा पहुंचा जा सकता है। बस मार्ग से: GDC, Old GDC, कर्बला, कलेक्टोरेट और मालगंज बस स्टॉप्स इसके निकटवर्ती बस स्टॉप हैं। हवाई मार्ग से: देवी अहिल्या बाई होलकर एयरपोर्ट से यह स्थल केवल 9 किलोमीटर की दूरी पर है। हवाई अड्डे से कैब की सुविधा सरलता से उपलब्ध है। छत्रीबाग खुलने का समय: प्रवेश समय: सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तकफोटोग्राफी और शूटिंग: निर्धारित शुल्क व अनुमति के बाद छत्रीबाग – अतीत की महिमा और वर्तमान की प्रेरणा छत्रीबाग न केवल इंदौर की ऐतिहासिक विरासत है, बल्कि यह स्थापत्य कला, संस्कृति और राजवंश की भव्यता का प्रतीक भी है। दिन में इसकी भव्यता तो रात में रोशनी से नहाए छत्रियों की सुंदरता देखने योग्य है। यदि आप इंदौर के राजघराने के इतिहास को करीब से जानना चाहते हैं, स्थापत्य प्रेमी हैं या बस कुछ शांत और सुंदर देखना चाहते हैं – तो छत्रीबाग आपके लिए एक आदर्श स्थल है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
रंजीत हनुमान मंदिर इंदौर: आस्था, रहस्य और हनुमान जी की विशेष कृपा का अद्भुत संगम

इंदौर, जो मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता है, अपने धार्मिक स्थलों के लिए विशेष पहचान रखता है। इसी श्रृंखला में स्थित है एक ऐतिहासिक और रहस्यमय मंदिर – रंजीत हनुमान मंदिर, जो अन्नपूर्णा रोड के पास स्थित है और हनुमान जी के अनन्य भक्तों के लिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और श्रद्धा का केंद्र है। रंजीत हनुमान मंदिर की पौराणिक कथा इस मंदिर का इतिहास बेहद रोचक और अलौकिक है। मान्यता है कि यह मंदिर मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर के समय में बनवाया गया था। खास बात यह है कि रंजीत हनुमान नाम इसलिए पड़ा क्योंकि ऐसा विश्वास है कि यहां की एक झलक मात्र से ही जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं, और भक्त विजयी और प्रसन्नचित्त हो जाते हैं। इसी क्रम में, मंदिर में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति एक ही पत्थर से बनी हुई है, जो अन्य मंदिरों की तुलना में आकार में भिन्न और प्रभावशाली है। विशेष रूप से, मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और आरती का विशेष आयोजन होता है। रंजीत हनुमान मंदिर कैसे पहुँचें? यदि आप इंदौर में रहते हैं या बाहर से आ रहे हैं, तो यहां पहुंचना अत्यंत सरल है। मंदिर अन्नपूर्णा रोड के पास स्थित है, और इंदौर रेलवे स्टेशन से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर है। राजवाड़ा या 56 दुकान जैसे प्रमुख स्थलों से मात्र 15-20 मिनट में यहां पहुंचा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, मंदिर के पास कई छोटी दुकानों में प्रसाद और पूजन सामग्री भी आसानी से उपलब्ध रहती है, जिससे आपको अलग से तैयारी करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। रंजीत हनुमान मंदिर का समय और विशेष आयोजन यह मंदिर प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे से लेकर रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है। हालांकि, मंगलवार और शनिवार को मंदिर देर रात तक खुला रहता है, क्योंकि ये दोनों दिन हनुमान जी के विशेष दिन माने जाते हैं। इन दिनों भक्तगण विशेष आरती, भजन संध्या और कीर्तन में भाग लेते हैं। मंदिर के अंदर बना विशाल प्रांगण भक्तों को शांत वातावरण में ध्यान और भक्ति का अवसर देता है, जो आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। रंजीत हनुमान मंदिर पहुंचने के साधन सड़क मार्ग से – यदि आप बस, ऑटो या निजी वाहन से आ रहे हैं, तो अन्नपूर्णा रोड मार्ग आपके लिए सबसे आसान है। यहां पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध है। रेल मार्ग से – सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन इंदौर जंक्शन है, जो केवल 7 किमी की दूरी पर स्थित है। वहां से ऑटो या टैक्सी आसानी से मंदिर तक पहुंचाते हैं। हवाई मार्ग से – नजदीकी एयरपोर्ट देवी अहिल्या बाई होल्कर एयरपोर्ट है, जो लगभग 10-12 किमी दूर है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी या कैब के माध्यम से आराम से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न : रंजीत हनुमान मंदिर कहां स्थित है?यह मंदिर इंदौर के अन्नपूर्णा रोड के पास स्थित है और रेलवे स्टेशन से लगभग 7 किमी की दूरी पर है। मंदिर के खुलने और बंद होने का समय क्या है?मंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। मंगलवार और शनिवार को देर रात तक खुला रहता है। मंदिर तक कैसे पहुंचा जा सकता है?आप बस, ऑटो, टैक्सी, ट्रेन या फ्लाइट के माध्यम से मंदिर पहुंच सकते हैं। मंदिर में कौन से दिन विशेष होते हैं?मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ होती है और आरती का आयोजन होता है। क्या मंदिर के पास प्रसाद या पूजन सामग्री मिलती है?जी हां, मंदिर के बाहर कई दुकानें हैं जहां से आप प्रसाद और पूजन सामग्री आसानी से खरीद सकते हैं। रंजीत हनुमान मंदिर इंदौर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक ऊर्जा का संगम है। यहां आने वाला हर भक्त हनुमान जी की कृपा और चमत्कारों का अनुभव करता है। अगर आप इंदौर या आसपास के क्षेत्र में हैं, तो इस मंदिर की यात्रा अवश्य करें — क्योंकि एक बार दर्शन से ही जीवन के कष्ट दूर हो सकते हैं। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
MP Weather Alert: मध्य प्रदेश में मानसून का कहर भारी बारिश का अलर्ट

Mp Weather News: में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, और अब राज्य के अधिकांश जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा सोमवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, आने वाले 24 से 48 घंटों में प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, देवास, रतलाम, ग्वालियर, विदिशा, रायसेन, सीहोर, अशोकनगर, शिवपुरी और श्योपुरकलां जैसे जिलों में भारी बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश: मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इन जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक और नदी-नालों के उफान की स्थिति बन सकती है, जिससे जन-जीवन प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। पूरे प्रदेश पर छाया मानसून, अधिकांश जिलों में बारिश का दौर जारी सोमवार को प्रदेश के अधिकांश इलाकों में सुबह से ही घने बादलों की चादर छाई रही। कुछ स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश होती रही, जबकि कुछ जिलों में तेज बौछारें गिरने से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। इंदौर, उज्जैन और रतलाम में सुबह के समय हल्की बारिश के बाद दोपहर में गर्म हवा और उमस ने लोगों को परेशान किया। हालांकि रात के समय फिर से बूंदाबांदी ने राहत दी। ग्वालियर, जो पिछले कुछ दिनों से मानसून की मेहरबानी झेल रहा है, वहां भी सोमवार को 10 मिनट की झमाझम बारिश के बाद सूरज और बादलों के बीच आँखमिचौली चलती रही। रात 9 बजे के बाद पुनः बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। MD ने जारी किया यलो अलर्ट, तेज हवाओं की भी चेतावनी मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ के ऊपर 3.1 किमी की ऊंचाई पर बना ऊपरी हवा का चक्रवात, और साथ ही दक्षिण मध्य उत्तर प्रदेश से बंगाल की खाड़ी तक फैली द्रोणिका के कारण मध्य प्रदेश में भारी नमी आ रही है। इसके चलते पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी मप्र में भारी वर्षा की संभावना बन रही है। मौसम विभाग ने बताया कि आने वाले 24 घंटे में कुछ जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जो पेड़ गिरने, बिजली के खंभों के हिलने और यातायात में बाधा जैसी स्थितियां पैदा कर सकती हैं। इन जिलों में भारी वर्षा की संभावना: नदी-नाले उफान पर, प्रशासन अलर्ट लगातार बारिश के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में बचाव दलों को तैनात कर दिया है। इंदौर, उज्जैन और सीहोर जिलों में निचले इलाकों से लोगों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में पुल-पुलियाओं पर पानी बहने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे आवागमन बाधित हो सकता है। स्कूलों और सरकारी कार्यालयों को भी सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं। तापमान में गिरावट, लेकिन उमस बनी रही हालांकि मानसून के सक्रिय होने से दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन उमस भरे वातावरण ने लोगों को हलाकान किया। इंदौर में अधिकतम तापमान 29.2°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3°C कम था। ग्वालियर में 31°C और भोपाल में 30.5°C अधिकतम तापमान रहा। रात के समय बारिश के बाद तापमान और गिरा, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली, लेकिन ह्यूमिडिटी स्तर 80% तक पहुंच जाने से गर्मी का अहसास बना रहा।जनता से अपील: सतर्क रहें, पानी भरे इलाकों से दूर रहें जनता से अपील: सतर्क रहें, पानी भरे इलाकों से दूर रहें मौसम विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम जनता से आग्रह किया है कि वे: सोशल मीडिया पर वायरल हुए बारिश के नज़ारे सोमवार को सोशल मीडिया पर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से बारिश के वीडियो और तस्वीरें वायरल होती रहीं। देवास के पावन क्षेत्र में बहते झरनों का वीडियो, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में गिरती बारिश, और इंदौर के राजवाड़ा चौक पर बारिश में नाचते युवाओं का दृश्य देखने लायक था। मध्य प्रदेश में मानसून ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है और अब लगातार बारिश का दौर शुरू हो चुका है। हालांकि यह राहत भी दे रहा है, लेकिन साथ ही प्राकृतिक खतरे भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में अब प्रशासन और आम जनता दोनों की सजगता और संयम से ही इस मौसम को सुरक्षित और लाभकारी बनाया जा सकता है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
राजवाड़ा पैलेस: होलकर वंश की गौरवशाली विरासत

जब बात भारत के ऐतिहासिक स्थलों की होती है, तो आमतौर पर दिल्ली का लाल किला, कुतुब मीनार या आगरा का ताजमहल याद आता है। लेकिन क्या आपने कभी मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित राजवाड़ा पैलेस के बारे में सुना है? यह भव्य महल होलकर वंश की शक्ति और संस्कृति का प्रतीक है। आइए जानते हैं राजवाड़ा पैलेस की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के बारे में। राजवाड़ा पैलेस का इतिहास राजवाड़ा पैलेस को होलकर महल या राजवाड़ा महल के नाम से भी जाना जाता है। इसकी वास्तुकला मुग़ल, मराठा और फ्रेंच शैली का अनूठा संगम है। इसका निर्माण होलकर वंश के संस्थापक मल्हारराव होलकर ने वर्ष 1747 में करवाया था। उन्होंने इंदौर को अपनी राजधानी बनाया और प्रशासनिक व आवासीय उद्देश्य से इस महल का निर्माण कराया। यह महल कई ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव का गवाह बना है। राजवाड़ा को पिडारी, सिंधिया और ब्रिटिश आक्रमणकारियों द्वारा तीन बार जलाया गया। इतिहासकारों के अनुसार अंतिम बार यह महल 1984 के दंगों में जलकर खाक हो गया, जिसमें ऊपरी चार मंज़िलें नष्ट हो गईं और केवल पत्थर से बनी निचली मंज़िलें ही बच पाईं। लेकिन भारत सरकार और होलकर परिवार के प्रयासों से यह महल फिर से पुनर्निर्मित हुआ। आज यह महल मालवा उत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों का केंद्र है, जो इंदौर की कला और संस्कृति को प्रदर्शित करता है। राजवाड़ा पैलेस की वास्तुकला यह सात मंज़िला महल अद्भुत वास्तुकला का उदाहरण है। इसकी निचली तीन मंज़िलें पत्थर की बनी हैं, जबकि ऊपरी मंज़िलें लकड़ी की हैं। इसका मुख्य द्वार विशाल लकड़ी का है, जो अपने आप में भव्यता को दर्शाता है। महल का आकार आयताकार है और यह लगभग 2.4 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यह दो हिस्सों में बंटा है — मुख्य महल और पिछला महल (Rear Palace)। मुख्य महल पुराना भाग है जो मुख्य सड़क की ओर है, जबकि पिछला महल नया हिस्सा है जो बगीचे और झरने की ओर खुलता है। मुख्य महल राजवाड़ा का मुख्य महल तीन मंज़िला है और इसका प्रवेशद्वार लकड़ी का विशाल दरवाज़ा है, जिसमें फूलों की कलाकारी और लोहे की कीलें लगी हैं। यह कीलें पुराने समय में हाथी के आक्रमण से सुरक्षा के लिए लगाई जाती थीं। इस महल में मुग़ल शैली की मेहराबें, आंगन, मंदिर, और विभिन्न कक्ष हैं। मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है, जिसका दरवाज़ा चाँदी का बना है और गणेशजी की मूर्ति सोने की बनी है। पिछला महल यह भाग चार मंज़िला है जिसमें एक सुंदर बगीचा, झरना, फव्वारा और पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर की कांस्य प्रतिमा है। बगीचे में रंग-बिरंगे फूल हैं और झरने की मधुर ध्वनि मन को शांति देती है। यहाँ का फव्वारा इतना शक्तिशाली है कि पानी की धार 100 फीट तक ऊपर उठती है। हर शाम यहाँ एक लाइट एंड साउंड शो आयोजित किया जाता है, जिसमें राजवाड़ा की ऐतिहासिक गाथा को चित्रित किया जाता है। राजवाड़ा पैलेस घूमने का सर्वोत्तम समय मध्यप्रदेश का मौसम उपोष्ण कटिबंधीय है, जहाँ गर्मी, सर्दी और बारिश तीनों ऋतुएं होती हैं। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय राजवाड़ा महल घूमने के लिए सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि इस दौरान मौसम ठंडा और सुहावना रहता है। राजवाड़ा पैलेस खुलने का समय राजवाड़ा पैलेस सोमवार से शनिवार तक सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है। यहाँ प्रवेश टिकट वयस्क और बच्चों की श्रेणी के अनुसार काफी सुलभ दरों पर उपलब्ध है। इंदौर के दिल में स्थित राजवाड़ा पैलेस न केवल इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करता है बल्कि आम पर्यटकों के लिए भी यह एक अद्भुत अनुभव प्रदान करता है। यह महल दर्शाता है कि भारत का इतिहास कितना समृद्ध और प्रेरणादायक है। तो जब भी आप इंदौर आएं, राजवाड़ा पैलेस जरूर देखने जाएं और होलकर वंश की गाथा को नजदीक से महसूस करें। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट बेस्ट इंदौर पर अवश्य जाएं।
इंदौर का लाल बाग पैलेस: शाही भव्यता का जीवंत उदाहरण

इंदौर शहर की शान लाल बाग पैलेस न केवल स्थापत्य कला की दृष्टि से बेजोड़ है, बल्कि यह होलकर राजवंश के गौरवशाली इतिहास की भी एक झलक प्रस्तुत करता है। यह ऐतिहासिक महल 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत के बीच बना था, और आज भी इसकी भव्यता हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर देती है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से शुरुआत करें तो, लाल बाग पैलेस का निर्माण 1886 से 1921 के बीच महाराजा शिवाजी राव होलकर द्वारा करवाया गया था। इस महल को होलकर राजाओं के शाही निवास और राजकीय समारोहों के लिए उपयोग में लाया जाता था। आगे बढ़ते हुए, इसकी वास्तुकला की बात करें तो, यह महल इंडो-यूरोपीय वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसमें यूरोपीय और भारतीय शैली का सुंदर संगम देखने को मिलता है, जो इसकी खास पहचान है। यही नहीं, इसके अंदरूनी हिस्से भी उतने ही शानदार हैं, यहाँ की सजावट में इतालवी संगमरमर, भव्य झूमर, फ़ारसी कालीन, बेल्जियम के रंगीन कांच और ग्रीक पौराणिक कथाओं पर आधारित भित्ति चित्र प्रमुख हैं। इन विशेषताओं के कारण यह महल केवल एक इमारत नहीं बल्कि कला का जीवंत संग्रहालय बन चुका है। समय के साथ, इस महल ने नया रूप भी लिया, 1978 के बाद, लाल बाग पैलेस को एक संग्रहालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। अब इसमें होलकर राजवंश की विरासत को संजोया गया है – जैसे कि शाही फर्नीचर, पेंटिंग्स, शिकार की ट्रॉफियाँ, और ऐतिहासिक दस्तावेज। इसके अलावा, महल में एक शानदार बॉलरूम भी है जो उस दौर की शाही जीवनशैली को दर्शाता है। इतना ही नहीं, इसका मुख्य द्वार लंदन के बकिंघम पैलेस की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रभाव वाली स्थापत्य शैली को दर्शाता है। पर्यटन के लिहाज से, लाल बाग पैलेस न केवल इतिहास प्रेमियों, बल्कि वास्तुकला, संस्कृति और कला के विद्यार्थियों के लिए भी एक अद्भुत स्थल है। महल 28 एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसके चारों ओर बना सुंदर उद्यान शांति और प्रकृति से जुड़ने का अवसर देता है। घूमने का समय: अगर आप लाल बाग पैलेस घूमने का विचार कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि यह सोमवार को बंद रहता है। बाकी दिनों में यह सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है। स्थान की बात करें तो, यह महल इंदौर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है और खान नदी के तट पर बना हुआ है। इसका प्राकृतिक परिवेश इसे और भी मनोहारी बनाता है। फिल्मों और शोज़ की पसंद: इतिहास और सुंदरता का अद्भुत संगम होने के कारण, इस महल का उपयोग कई फिल्मों और टीवी शोज़ की शूटिंग के लिए भी किया गया है। लाल बाग पैलेस, केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं बल्कि इंदौर की आत्मा का एक जीवंत हिस्सा है। यदि आप शाही इतिहास, कला और संस्कृति में रुचि रखते हैं, तो यह स्थान आपकी यात्रा सूची में अवश्य शामिल होना चाहिए। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट बेस्ट इंदौर पर अवश्य जाएं।
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