मंत्रोच्चार के साथ प्रकृति की आराधना: 51 वेदपाठियों के साथ विश्वनाथ धाम में मियावाकी पद्धति से हुआ पौधरोपण,

इंदौर | 25 जुलाई 2025 Best Indore News इंदौर के विश्वनाथ धाम में रविवार को एक विशेष और आध्यात्मिक वातावरण में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 51 वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पौधों का रोपण किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण का संगम था, बल्कि इसमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का आयोजन सार्वजनिक सेवा समिति और स्थानीय नागरिकों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। पौधरोपण के लिए मियावाकी पद्धति को अपनाया गया, जो तेजी से विकसित होने वाले और घने जंगल तैयार करने की जापानी तकनीक मानी जाती है। वेदपाठियों के मंत्रों से गूंजा धाम पौधरोपण कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 8 बजे वेद मंत्रों के गूंजते स्वर के साथ हुई। 51 ब्राह्मणों ने विधिपूर्वक भूमि पूजन कर, हर पौधे की जड़ों में गायत्री मंत्र, पृथ्वी सूक्त, रुद्र सूक्त आदि मंत्रों के साथ जल अर्पण किया। यह आयोजन धार्मिक श्रद्धा और प्रकृति प्रेम का ऐसा अद्भुत समन्वय था, जहां हर पौधे को देवत्व के प्रतीक रूप में देखा गया। “वृक्षों में देवताओं का वास होता है। जब मंत्रों के साथ पौधरोपण होता है, तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।”– पंडित रमेश शास्त्री, मुख्य वेदपाठी मियावाकी पद्धति से लगाए गए सैकड़ों पौधे इस अवसर पर लगभग 600 पौधे लगाए गए, जिनमें पीपल, नीम, बरगद, कचनार, अशोक, अर्जुन, बकुल जैसे औषधीय और छायादार वृक्ष शामिल थे।मियावाकी पद्धति की विशेषता है कि इसमें कम जगह में अधिक पेड़-पौधे लगाए जाते हैं, जिससे वे एक घना प्राकृतिक जंगल बनाते हैं। यह पद्धति मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जैव विविधता बढ़ाने और तेजी से कार्बन अवशोषण करने में सहायक होती है। “हमारा उद्देश्य सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि एक स्थायी जैविक हरित क्षेत्र बनाना है।”– आयोजक समिति सदस्य राजेश त्रिवेदी सपरिवार समाजजन भी हुए शामिल इस पौधरोपण में सैकड़ों परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई लोगों ने अपने बच्चों के नाम से पौधे लगाए और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी ली। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने प्राकृतिक संरक्षण की इस पुनीत मुहिम में भागीदारी निभाई। “मैंने अपने बेटे के नाम पर नीम का पौधा लगाया है। अब हम हर रविवार उसे देखने और उसकी सेवा करने आएंगे।”– शालिनी अग्रवाल, स्थानीय निवासी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व हिंदू धर्म में वृक्षों को अत्यधिक महत्व दिया गया है। इस कार्यक्रम में वृक्षारोपण को केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि धार्मिक अनुष्ठान की तरह संपन्न किया गया। पर्यावरण जागरूकता का संदेश इस आयोजन के माध्यम से नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण का गहरा संदेश दिया गया।कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी से आग्रह किया कि वे कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसकी देखरेख का संकल्प लें। “यदि हर नागरिक वर्ष में एक पौधा लगाए और उसकी रक्षा करे, तो इंदौर हरियाली के मामले में पूरे देश में मिसाल बन सकता है।”– नवीन दुबे, समाजसेवी आयोजन की झलकियाँ इंदौर का यह आयोजन साबित करता है कि जब आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चलें, तो परिणाम सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का विस्तार भी होता है।51 वेदपाठियों का मंत्रोच्चार न केवल पौधों को जीवन दे गया, बल्कि समाज को एक नया दिशा-बोध भी प्रदान कर गया। अब जरूरत है कि ऐसे आयोजनों को निरंतरता दी जाए और हर मोहल्ला, हर कॉलोनी, हर गली में इस प्रकार के प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
मंडे मानसून अपडेट: एमपी में अब तक सीजन की 45% बारिश पूरी, निवाड़ी और टीकमगढ़ में बंपर वर्षा; इंदौर-उज्जैन में बादल कंजूस

22 जुलाई 2025, भोपाल/इंदौर Best Indore News मध्यप्रदेश में मानसून की चाल अब धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ती दिख रही है। राज्य में अब तक सीजन की कुल अनुमानित बारिश का 45% पानी गिर चुका है। जहां निवाड़ी जिले में 102% और टीकमगढ़ में 90% बारिश रिकॉर्ड की गई है, वहीं इंदौर और उज्जैन संभाग अभी भी औसत से नीचे चल रहे हैं। सोमवार को मौसम विभाग द्वारा जारी अपडेट ने साफ कर दिया कि राज्य के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में मानसून मेहरबान रहा, जबकि पश्चिमी और मालवा क्षेत्रों में अभी भी राहत की दरकार है। राज्य की वर्षा स्थिति: कौन आगे, कौन पीछे मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से अब तक पूरे मध्यप्रदेश में औसतन 408 मिमी बारिश अपेक्षित थी, लेकिन 187 मिमी ही रिकॉर्ड हुई। यानी अब तक 45.8% बारिश हुई है। आइए नज़र डालते हैं कुछ प्रमुख जिलों पर: जिला सामान्य बारिश (मिमी) अब तक हुई बारिश (मिमी) प्रतिशत निवाड़ी 263 268 102% टीकमगढ़ 324 293 90% डिंडोरी 389 310 80% भोपाल 429 210 49% इंदौर 452 145 32% उज्जैन 418 138 33% इंदौर और उज्जैन संभाग में बारिश की कमी क्यों? विशेषज्ञों के अनुसार, इंदौर और उज्जैन संभागों में इस वर्ष अब तक कोई स्ट्रॉन्ग मानसून सिस्टम विकसित नहीं हुआ है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से उठने वाले दो अलग-अलग सिस्टम मध्य और उत्तर-पूर्वी एमपी की ओर सक्रिय रहे, लेकिन पश्चिमी एमपी अभी तक इनके दायरे से बाहर रहा। इसका असर यह हुआ कि इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम और खरगोन जैसे जिलों में बारिश न के बराबर हुई। कृषि क्षेत्र इससे खासा प्रभावित हो रहा है, क्योंकि इन जिलों में किसान अब तक सोयाबीन और मूंग की बुवाई नहीं कर पाए हैं। कृषि पर असर: किसान कर रहे इंतजार इंदौर जिले के किसान राजेश पाटीदार बताते हैं: “हर साल जुलाई के पहले हफ्ते तक खेतों में बुवाई हो जाती है, लेकिन इस बार अब तक ना तो खेत गीले हुए, ना ही बारिश आई। हम आसमान की ओर देख रहे हैं।” सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग और राजस्व अमले को अलर्ट पर रखा है। कुछ जिलों में बीज वितरण की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। आगे कैसा रहेगा मानसून? – IMD की भविष्यवाणी मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि: जलाशयों की स्थिति कम बारिश का असर प्रदेश के प्रमुख जलाशयों और बांधों पर भी पड़ा है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार: जनजीवन पर प्रभाव मध्यप्रदेश में भले ही अब तक 45% बारिश पूरी हो चुकी हो, लेकिन स्थिति अभी संतोषजनक नहीं मानी जा रही। कृषि, जल आपूर्ति और जनजीवन पर असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। अब उम्मीद की जा रही है कि आने वाले सप्ताहों में मानसून की सक्रियता बढ़े और राज्य के सभी क्षेत्रों में समान रूप से वर्षा हो। सरकार को चाहिए कि वह अग्रिम इंतजाम करे, ताकि किसी संकट की स्थिति में जल, बीज और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
सड़क पर गिरे बिजली तार ने ली मासूम की हँसी: करंट से झुलसा नाबालिग, पानी में तड़पता रहा; बिजली कंपनी और निगम पर लापरवाही के आरोप

इंदौर की एक दुखद घटना ने फिर खड़ा किया सवाल – क्या हमारी सार्वजनिक व्यवस्थाएं लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी हैं? Best Indore News इंदौर के XXX इलाके (स्थान परिवर्तन योग्य) में बीते सोमवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां सड़क पर गिरे बिजली के तार को हटाने गया एक 13 वर्षीय नाबालिग करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया। आसपास मौजूद लोगों ने जब तक कुछ समझा, तब तक वह पानी में तड़पता रहा। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय निवासियों को झकझोर कर रख दिया, बल्कि बिजली वितरण कंपनी और नगर निगम की घोर लापरवाही को भी उजागर कर दिया क्या हुआ उस दिन? – घटना का पूरा विवरण घटना सोमवार दोपहर लगभग 2 बजे की है। इलाके में दोपहर से ही तेज हवा और हल्की बारिश का दौर चल रहा था। इसी दौरान एक पुराना बिजली का तार टूटकर सड़क पर गिर गया। वहां से गुजरने वालों ने तुरंत इसकी सूचना बिजली कंपनी और नगर निगम को दी, लेकिन किसी ने समय पर रिस्पॉन्ड नहीं किया। कुछ देर बाद, स्थानीय निवासी 13 वर्षीय आर्यन (बदला हुआ नाम) अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। उसने देखा कि बिजली का तार पानी में पड़ा है और आने-जाने वालों को उससे खतरा हो सकता है। उसने साहस दिखाते हुए तार हटाने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही उसने तार को छुआ, वह करंट की चपेट में आ गया और मौके पर ही झुलस गया। पानी में पड़ा तड़पता रहा मासूम, कोई नहीं आया मदद को घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आर्यन करीब दो मिनट तक पानी में तड़पता रहा। लोग डर के मारे पास नहीं जा सके, क्योंकि पानी में करंट था। जब तक बिजली बंद की जाती और मदद पहुंचती, बालक बुरी तरह झुलस चुका था। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। बिजली कंपनी और निगम पर लगे गंभीर आरोप घटना के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने बिजली वितरण कंपनी और नगर निगम पर सीधा आरोप लगाया कि: एक स्थानीय निवासी ने कहा: “यदि समय पर कार्रवाई होती तो आज एक मासूम जिंदगी और मौत से नहीं जूझ रहा होता। जिम्मेदारों पर केस दर्ज होना चाहिए।” पीड़ित बालक का परिवार सदमे में पीड़ित आर्यन का परिवार पूरी तरह सदमे में है। उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वह कहती हैं: “मेरा बेटा किसी की मदद करना चाहता था, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने उसे बुरी तरह जला दिया। क्या यही इनाम मिलता है अच्छे काम का?” परिवार की मांग है कि: क्या कहती हैं जिम्मेदार संस्थाएं? बिजली कंपनी के जोनल इंजीनियर ने कहा: “घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें तार गिरने की सूचना देर से मिली। प्राथमिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं।” नगर निगम अधिकारी का बयान आया: “बारिश के कारण जलभराव हुआ, हम अपनी टीम मौके पर भेज चुके हैं। आगे से इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए अलग टीम बनाई जाएगी।” लेकिन सवाल उठता है – क्या बयान जिम्मेदारी से बड़ी हो सकती है? आंकड़ों की जुबानी: तार गिरने और करंट लगने की घटनाएं स्थानीय लोगों की मांगें इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हमारी व्यवस्थाएं कब संवेदनशील होंगी? एक मासूम ने अपनी समझ और साहस दिखाया, लेकिन सिस्टम की नासमझी ने उसे तड़पने के लिए मजबूर कर दिया। अब वक्त है कि प्रशासन कागजों से निकलकर ज़मीन पर काम करे। वरना ऐसी घटनाएं फिर किसी और घर की खुशियों को निगल जाएंगी। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में शराब दुकान पर रहवासियों का फूटा गुस्सा: तोड़फोड़ के बाद दुकान से भागे कर्मचारी, हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने भांजी लाठियां

घनी आबादी में चल रही दुकान पर लंबे समय से था विवाद, रविवार को भड़का जन आक्रोश Best Indore News इंदौर शहर में एक बार फिर शराब दुकान को लेकर विवाद गहराता नजर आया, जब एक घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित शराब दुकान को लेकर स्थानीय रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज़ लोगों ने दुकान पर तोड़फोड़ कर दी, जिसके बाद कर्मचारी जान बचाकर भाग निकले। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। यह घटना इंदौर के विजय नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्थित XXX कॉलोनी की है (स्थान परिवर्तन योग्य)। दुकान को लेकर लंबे समय से विरोध हो रहा था, लेकिन प्रशासन की अनदेखी ने इस जनाक्रोश को और भड़का दिया। क्या है पूरा मामला? स्थानीय रहवासियों का कहना है कि: “शराब दुकान हमारे घरों के बेहद पास है। रोज़ाना नशे में धुत लोग गाली-गलौज करते हैं, झगड़ा करते हैं। महिलाएं और बच्चे डर के माहौल में जी रहे हैं।” बीते कई महीनों से लोग दुकान को हटाने की मांग कर रहे थे। कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। रविवार को स्थिति तब बिगड़ी, जब कुछ युवकों ने दुकान के सामने बैठकर शराब पी और राह चलती महिलाओं से छींटाकशी की। इसके बाद स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर दुकान पर धावा बोल दिया। गुस्साए लोगों ने दुकान में घुसकर शीशे, गल्ला, काउंटर और शराब की बोतलों को तोड़ डाला। कर्मचारी दुकान छोड़कर भागे, पुलिस ने किया लाठीचार्ज तोड़फोड़ के दौरान दुकान के कर्मचारी खुद को असुरक्षित मानते हुए भाग खड़े हुए। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया है, लेकिन स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि: स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी प्रतिक्रिया वार्ड पार्षद का कहना है: “मैं खुद कई बार दुकान हटाने की मांग कर चुका हूँ। महिलाएं और बुज़ुर्ग भय के माहौल में जी रहे हैं। यह सिर्फ कानून व्यवस्था का नहीं, सामाजिक सम्मान का सवाल है।” वहीं, थाना प्रभारी ने कहा: “भीड़ ने कानून हाथ में लिया, इसलिए पुलिस ने कार्रवाई की। लेकिन उच्च अधिकारियों को इस दुकान के स्थानांतरण पर विचार करना चाहिए।” शहर में शराब दुकानों की स्थिति पर एक नजर स्थानीय लोगों की पीड़ा श्रीमती मंजू वर्मा, एक स्थानीय निवासी कहती हैं: “बच्चियों को स्कूल छोड़ने तक में डर लगता है। शराबी पीछा करते हैं, अश्लील बातें करते हैं। हम कब तक सहते रहेंगे?” रवि सोनी, एक युवा व्यापारी ने बताया: “हमने शांतिपूर्वक कई बार विरोध किया, कोई सुनवाई नहीं हुई। अब लोगों का सब्र जवाब दे गया।” कानून और सामाजिक दायित्व के बीच टकराव यह घटना केवल एक कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह बताती है कि यदि प्रशासन समय पर जनभावनाओं को नहीं समझता, तो स्थिति हाथ से निकल सकती है। एक ओर सरकार शराब से भारी राजस्व कमाती है, वहीं दूसरी ओर आम लोग शराब दुकानों के दुष्प्रभावों से पीड़ित हैं। ऐसे में संतुलन बनाना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है। अब आगे क्या? इंदौर की यह घटना एक साफ़ संदेश देती है — यदि जनता की आवाज़ को समय पर न सुना जाए, तो असंतोष आक्रोश बन सकता है। शराब की दुकानें केवल व्यापार नहीं, यह सामाजिक जीवन को प्रभावित करने वाला मुद्दा बन चुकी हैं। प्रशासन को अब ज़रूरत है कि वह जनता की मांगों पर गंभीरता से विचार करे, नहीं तो आने वाले समय में ऐसे आंदोलन और तीव्र रूप ले सकते हैं। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
एमपी में हाईवे पर पुल डूबे, बाढ़ जैसे हालात: उफनती नदियां, बस्तियों में घुसा पानी; लोग जान जोखिम में डाल कर कर रहे पार

प्रदेश में बारिश ने मचाई तबाही, पुल-पुलिया पानी में समाए Best Indore News मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार अब अपने उफान पर है और बारिश ने कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। खासकर पूर्वी और दक्षिणी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश से नदियां उफान पर हैं और राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर बने पुल डूब गए हैं। हाईवे के कई हिस्सों पर यातायात बंद कर दिया गया है, लेकिन लोग जान जोखिम में डालकर उफनती नदियां पार करते दिख रहे हैं। कई गांवों और बस्तियों में पानी घुस चुका है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हाईवे डूबे, यातायात पर ब्रेक बारिश का सबसे ज्यादा असर सीधी, सतना, रीवा, डिंडोरी, शहडोल, मंडला, बालाघाट, दमोह, छतरपुर, सिवनी और मंडसौर जिलों में देखने को मिल रहा है। नदियों ने बढ़ाई चिंता: कई इलाकों में रेड अलर्ट राज्य की प्रमुख नदियां जैसे कि नर्मदा, तवा, बान, सोन, टौंस और बनास नदी इस समय अपने खतरे के निशान के आसपास या ऊपर बह रही हैं। बस्तियों में घुसा पानी, लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त बारिश से न सिर्फ सड़कें जलमग्न हैं, बल्कि आवासीय कॉलोनियों और ग्रामीण इलाकों में पानी भर गया है। वीडियो में देखें हालात: जान जोखिम में डाल रहे लोग सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि: प्रशासन ने की चेतावनी जारी, SDRF-Police अलर्ट राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित जिलों में अलर्ट जारी किया है। एसडीआरएफ, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें तैनात की गई हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बयान में कहा गया: “लोग नदियों और पुलों को पार करने का प्रयास न करें। जहां कहीं भी पानी का बहाव हो, वहां से दूरी बनाएं।” मौसम विभाग का अलर्ट: 30 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी IMD (भारतीय मौसम विभाग) ने अगले 48 घंटों के लिए 30 से अधिक जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इनमें शामिल हैं: जनजीवन और यात्रा पर असर मध्यप्रदेश में बाढ़ जैसे हालात गंभीर चिंता का विषय हैं। हालांकि प्रशासन सक्रिय है, लेकिन लोगों को भी संवेदनशीलता और सावधानी बरतने की जरूरत है। बारिश प्रकृति की देन है, लेकिन लापरवाही से यह जानलेवा भी बन सकती है। सरकार और जनता मिलकर ही इस आपदा से सुरक्षित निकल सकते हैं। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर–देवास जाम केस में NHAI ने बदला वकील: हाईकोर्ट में अनीता शर्मा के बयान पर मचा था बवाल

पृष्ठभूमि: इंदौर–देवास हाईवे बना जाम का पर्याय Best Indore News मध्यप्रदेश के दो प्रमुख शहरों – इंदौर और देवास – को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-52) बीते कुछ समय से भारी जाम और यातायात अव्यवस्था के लिए चर्चा में है। रोज़ाना हज़ारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन निर्माण कार्य, खराब प्लानिंग और सुस्त प्रबंधन के चलते ये सड़क एक यात्री-कष्ट मार्ग बनती जा रही है। इंदौर इसी मुद्दे पर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी, जिसमें NHAI (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) से जवाब मांगा गया। लेकिन जवाब देने गईं अधिवक्ता अनीता शर्मा का एक विवादित बयान सबके लिए चौंकाने वाला रहा। हाईकोर्ट में उठे सवाल, अधिवक्ता के बयान से मचा विवाद हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान जब NHAI की ओर से अधिवक्ता अनीता शर्मा पेश हुईं तो उन्होंने कहा: “लोग बिना कारण के इतनी जल्दी क्यों निकलते हैं? ट्रैफिक जाम तो कभी भी हो सकता है। हर बार एनएचएआई को ही जिम्मेदार ठहराना सही नहीं।” उनके इस बयान से कोर्ट रूम में न केवल असहमति की लहर दौड़ी, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोग गुस्से में आ गए। नागरिकों ने कहा कि यह बयान आम जनता के संवेदनशील मुद्दे के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है। NHAI ने अधिवक्ता को हटाया, नया वकील किया नियुक्त बयान पर विवाद बढ़ने के बाद, NHAI ने तत्काल प्रभाव से अनीता शर्मा को केस से हटा दिया और एक नए वकील की नियुक्ति की पुष्टि की। प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा: “हम आम जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं। हमारी मंशा कभी भी किसी की परेशानी को अनदेखा करना नहीं है। बयान दुर्भाग्यपूर्ण था, इसलिए हमने वकील बदलने का फैसला किया है।” अब इस केस की अगली सुनवाई में एक नया अधिवक्ता पेश होगा, जो NHAI की ओर से हाईकोर्ट में पक्ष रखेगा। इंदौर–देवास हाईवे की समस्या क्या है? इन कारणों से अक्सर हाईवे पर 5–7 किमी लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है, जिससे लोग घंटों फंसे रहते हैं। जनता की पीड़ा देवास निवासी राजीव तिवारी कहते हैं: “ऑफिस के लिए हर दिन 8 बजे निकलता हूँ, फिर भी जाम में फंस कर 10:30 तक पहुंचता हूँ। NHAI को जवाबदेह बनाना जरूरी है।” इंदौर की नेहा ठाकुर बताती हैं: “मेरी बेटी की स्कूल बस भी जाम में फंसती है। बारिश के मौसम में हालात और बिगड़ जाते हैं। हमें लगता है सरकार सुन ही नहीं रही।” हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी हाईकोर्ट ने भी इस मामले में NHAI को जिम्मेदार ठहराते हुए सख्त टिप्पणी की थी कि: “जनता के धैर्य की परीक्षा ली जा रही है। सड़क निर्माण जनता के लिए हो रहा है, न कि जनता के विरोध में।” कोर्ट ने NHAI से कहा है कि वह एक विस्तृत कार्य योजना पेश करे जिसमें बताए कि ट्रैफिक नियंत्रण और निर्माण कार्य एक साथ कैसे चलेंगे। आगे की कार्रवाई सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया लोगों ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं दीं: इंदौर–देवास हाईवे का मामला अब सिर्फ जाम या असुविधा का नहीं रहा, यह जनता की गरिमा और शासन की जवाबदेही से जुड़ चुका है। NHAI का वकील बदलना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन असल बदलाव तभी होगा जब सड़कें समय पर बनें और यातायात की बेहतर व्यवस्था हो। आशा है कि हाईकोर्ट की सख्ती, जन आक्रोश और मीडिया की सतर्कता से जिम्मेदार संस्थाएं अब निष्क्रिय नहीं रहेंगी और इंदौर–देवास के लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
सीएम से बोले विजयवर्गीय – वन विभाग सहयोग नहीं करता:समय पर पौधे नहीं मिलते, विदेश दौरे से पहले अधिकारियों को निर्देश दें

इंदौर में उजागर हुई पौधारोपण अभियान की हकीकत Best Indore News इंदौर में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराज़गी जताई। विजयवर्गीय ने कहा कि जब भी नगर निगम या प्रशासन द्वारा पौधारोपण अभियान चलाया जाता है, वन विभाग समय पर पौधे उपलब्ध नहीं कराता, जिससे योजनाओं पर असर पड़ता है। क्या बोले विजयवर्गीय? कैलाश विजयवर्गीय ने सार्वजनिक मंच से कहा: इंदौर “हम पौधारोपण करना चाहते हैं, लेकिन वन विभाग सहयोग नहीं करता। समय पर पौधे नहीं मिलते। ऐसे में अभियान कैसे सफल हो? मैं मुख्यमंत्री से निवेदन करता हूँ कि विदेश यात्रा से पहले अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दें कि वे अपना काम समय पर करें।” उनकी यह टिप्पणी सुनकर मंच पर बैठे अन्य अधिकारी और अतिथि भी थोड़े असहज दिखे, लेकिन यह साफ जाहिर हो गया कि मंत्री खुद भी पर्यावरण सुधार के लिए गंभीर हैं और चाहते हैं कि सभी विभागों का सहयोग मिलना चाहिए। क्यों उठी पौधों की उपलब्धता की समस्या? इंदौर नगर निगम और राज्य सरकार हर साल वृक्षारोपण अभियान चलाती है, जिसका उद्देश्य: है। परंतु, पिछले कुछ वर्षों से नगर निगम और सामाजिक संगठनों को समय पर उचित मात्रा और गुणवत्ता वाले पौधे नहीं मिल पा रहे। कई बार अभियान की तिथि निकल जाती है, लेकिन पौधे नहीं आते। इस समस्या को विजयवर्गीय ने सार्वजनिक मंच पर उठाकर प्रशासन की नींद तो जरूर तोड़ी है। मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा और प्रशासनिक कामकाज मुख्यमंत्री मोहन यादव जल्द ही विदेश यात्रा पर रवाना होने वाले हैं, जिसका उद्देश्य प्रदेश में निवेश और विकास के अवसरों को बढ़ाना है। इसी संदर्भ में विजयवर्गीय ने कहा कि: “मुख्यमंत्री विदेश जाएं, लेकिन उसके पहले यह सुनिश्चित करें कि अधिकारी अपने स्तर पर पूरी जिम्मेदारी निभाएं।” उनका संकेत था कि अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, ताकि योजनाएं समय पर पूरी हो सकें। जनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा विजयवर्गीय का यह बयान सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। इसके राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कई मायने निकाले जा रहे हैं: कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि “वन विभाग को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने की जरूरत है।” इंदौर और वृक्षारोपण: आंकड़े क्या कहते हैं? समाधान की क्या आवश्यकता है? इस तरह की समस्याओं को देखते हुए कुछ ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है: नागरिकों की राय नीरा वर्मा, एक समाजसेवी कहती हैं: “हमने स्कूल के बच्चों के साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम रखा, लेकिन हमें समय पर पौधे नहीं मिले। हमें खुद नर्सरी से महंगे पौधे खरीदने पड़े।” आरटीआई कार्यकर्ता महेश जैन ने कहा: “वन विभाग की नर्सरियों में अच्छा स्टॉक होने के बाद भी कई बार बहाना बना दिया जाता है। यह एक प्रशासनिक विफलता है।” कैलाश विजयवर्गीय का मुख्यमंत्री के सामने वन विभाग की शिकायत करना एक साहसिक कदम है। यह स्पष्ट करता है कि अब सिर्फ घोषणाएं नहीं, जमीनी कार्यों की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वन विभाग इन बातों से सीख लेकर अपनी व्यवस्था दुरुस्त करता है या फिर वही पुरानी कार्यशैली दोहराई जाती है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में कल रहा जुलाई का सबसे ज्यादा तापमान: 31 डिग्री पार, मौसम साफ पर उमस ने बढ़ाई परेशानी

मौसम ने बदला मिजाज, जुलाई में पहली बार ऐसा तापमान Best Indore News मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। जहां एक ओर लोग बरसात की उम्मीद में आसमान की ओर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गर्मी और उमस ने दिनचर्या को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मंगलवार को इंदौर में इस जुलाई महीने का सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया, जो 31 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच गया। यह तापमान अब तक जुलाई में दर्ज सबसे अधिक है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि बारिश की कमी और साफ आसमान के कारण धूप तेज हो गई है, जिससे तापमान में इजाफा हुआ है। सुबह से ही साफ आसमान, बीच-बीच में बादल मंगलवार को सुबह से ही आसमान साफ रहा और तेज धूप ने लोगों को परेशान किया। हालांकि दिन के मध्य कुछ देर के लिए हल्के बादल नजर आए, लेकिन वे बारिश लाने में नाकाम रहे। इस वजह से दोपहर में गर्मी और उमस का स्तर बढ़ गया, जिससे घर से बाहर निकलने वाले लोगों को काफी असहजता महसूस हुई। खासकर दुकानदार, यात्री और सड़क पर चलने वाले आम लोग परेशान दिखे। मौसम विभाग की रिपोर्ट क्या कहती है? मौसम विज्ञान केंद्र, इंदौर के अनुसार: मौसम विभाग ने यह भी बताया कि आने वाले 2-3 दिन तक जोरदार बारिश के आसार नहीं हैं। आसमान साफ या आंशिक रूप से मेघाच्छन्न रहेगा, लेकिन अभी कोई सक्रिय मानसूनी सिस्टम नहीं बना है आम जनता पर असर तापमान बढ़ने और बारिश न होने का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है: जुलाई में अब तक बारिश का हाल इंदौर में जुलाई माह की शुरुआत में ही कुछ स्थानों पर हल्की फुहारें देखने को मिली थीं, लेकिन अब तक संतोषजनक बारिश नहीं हुई। तारीख बारिश (मिमी में) 1 जुलाई 2.6 मिमी 2 से 10 जुलाई 0.0 मिमी कुल अब तक 2.6 मिमी यह सामान्य से बहुत कम है और चिंता का विषय बनता जा रहा है, खासकर कृषि और जल प्रबंधन के नजरिए से। क्या कहती है जनता? शहर के रहने वाले सुनील चौधरी बताते हैं: “हर साल जुलाई में बारिश हो जाती है, लेकिन इस बार धूप और उमस से बहुत परेशानी हो रही है। खेत में बुआई भी रोक दी है क्योंकि बारिश नहीं हो रही।” कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एक सप्ताह के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई, तो सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों का पूर्वानुमान मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि: तब तक नागरिकों को सलाह दी गई है कि गर्मी और उमस से बचने के लिए सतर्कता बरतें, पर्याप्त पानी पिएं और दिन के समय लंबी यात्राओं से बचें। जुलाई के इस मौसम में जहां बारिश की उम्मीदें अधूरी रह गई हैं, वहीं तापमान का बढ़ता ग्राफ चिंता का विषय बन गया है। इंदौर के निवासियों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा जब तक कि मानसून फिर से सक्रिय न हो जाए। शहर प्रशासन और नागरिकों को मिलकर पानी के संरक्षण, बिजली की बचत और स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में सावधानी बरतनी चाहिए। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
उज्जैन में रोपवे से हर घंटे 2000 यात्री करेंगे सफर: 55 गोंडोले चलेंगे, 2025 के अंत तक बनकर तैयार होगा प्रोजेक्ट

महाकाल की नगरी उज्जैन में लगेगा विकास का एक और पंख Best Indore News मध्यप्रदेश की धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी उज्जैन अब एक नई ऊंचाई की ओर बढ़ रही है। जल्द ही यहां देश के सबसे आधुनिक और उच्च क्षमता वाले रोपवे प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद हर घंटे लगभग 2000 यात्री एक साथ रोपवे से यात्रा कर सकेंगे। 55 अत्याधुनिक गोंडोले (केबिन) इस सिस्टम का हिस्सा होंगे, जो यात्रियों को महाकाल लोक, काल भैरव मंदिर और अन्य पर्यटन स्थलों से जोड़ेंगे। निर्माण कार्य जोरों पर, CEO ने दिया आश्वासन इस महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। निर्माण कंपनी के CEO ने जानकारी दी कि: “यह प्रोजेक्ट अगले साल के अंत तक तैयार हो जाएगा। आधुनिक तकनीक, पर्यावरण अनुकूल निर्माण और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यह सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं, बल्कि उज्जैन के पर्यटन को नई ऊंचाई देने वाला प्रोजेक्ट है।” रोपवे प्रोजेक्ट की खास बातें विशेषता विवरण कुल गोंडोले (केबिन) 55 एक घंटे में यात्रा करने वाले यात्री लगभग 2000 यात्री यात्रा की लंबाई लगभग 2 किमी से अधिक प्रमुख स्टेशनों की संख्या 3 (शुरुआती, मध्य और अंतिम बिंदु) संचालन समय सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक (संभावित) किराया (प्रारंभिक अनुमान) ₹100–₹150 प्रति व्यक्ति (राउंड ट्रिप) किन स्थानों को जोड़ेगा रोपवे? यह रोपवे प्रणाली उज्जैन के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ेगी: इन क्षेत्रों में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। रोपवे शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की यात्रा न केवल आसान होगी, बल्कि समय और ऊर्जा की बचत भी होगी। उज्जैन में क्यों जरूरी था रोपवे? उज्जैन एक धार्मिक नगरी है जहां प्रति दिन हजारों श्रद्धालु आते हैं। खासकर श्रावण मास, महाशिवरात्रि, नाग पंचमी और सिंहस्थ कुंभ जैसे आयोजनों में यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। ऐसे में: इन सबका समाधान रोपवे प्रणाली से संभव होगा। यह प्रदूषण रहित, ट्रैफिक फ्री और सुविधाजनक विकल्प प्रदान करेगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम परियोजना में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है: पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता रोपवे का मार्ग और निर्माण इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि: पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा इस प्रोजेक्ट से ना सिर्फ श्रद्धालुओं को लाभ होगा, बल्कि: सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी यह प्रोजेक्ट PPP मॉडल (Public-Private Partnership) पर आधारित है, जिसमें सरकार और निजी कंपनी मिलकर कार्य कर रही हैं। राज्य सरकार द्वारा भूमि, अनापत्ति प्रमाण पत्र और इन्फ्रास्ट्रक्चर की सहायता दी जा रही है। नागरिकों और पर्यटकों से अपील प्रशासन और निर्माण कंपनी की ओर से नागरिकों से अपील की गई है कि निर्माण कार्य के दौरान: उज्जैन का रोपवे प्रोजेक्ट एक ऐतिहासिक और तकनीकी बदलाव का प्रतीक है। यह सिर्फ एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि उज्जैन की धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति की नई दिशा है। अगले कुछ वर्षों में जब श्रद्धालु गोंडोला में बैठकर ऊपर से महाकाल लोक की छटा देखेंगे, तो यह अनुभव न केवल भक्तिभाव से भरपूर होगा, बल्कि आधुनिक भारत की क्षमता का भी प्रतीक होगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर: अब भारी या असामान्य कचरा भी उठेगा एक क्लिक पर स्वच्छता में एक और स्मार्ट कदम

इंदौर नगर निगम की नई पहल Best Indore News: स्वच्छता में लगातार नंबर वन रहने वाले इंदौर शहर ने अब एक और बड़ी सुविधा नागरिकों को दी है। अब घरों, दुकानों या निर्माण स्थलों पर जमा भारी और असामान्य कचरा (Bulk Waste) के लिए नगर निगम ने डिजिटल सेवा की शुरुआत की है। यानी यदि आपके घर पर टूटा हुआ फर्नीचर, कबाड़, पुराने गद्दे, निर्माण सामग्री या बागवानी से जुड़ा वेस्ट पड़ा है, तो एक क्लिक पर निगम की टीम आकर उसे उठाकर ले जाएगी। इस सेवा का उद्देश्य केवल स्वच्छता बनाए रखना ही नहीं है, बल्कि नागरिकों को सुविधा और जिम्मेदारी का अनुभव भी देना है। कैसे काम करेगी यह सेवा? इंदौर नगर निगम द्वारा शुरू की गई इस डिजिटल सेवा में नागरिक अपने मोबाइल ऐप या वेबसाइट के ज़रिए ऑनलाइन रिक्वेस्ट कर सकते हैं। सेवा की प्रक्रिया इस प्रकार है: किस प्रकार के कचरे के लिए है यह सेवा? इस सेवा के अंतर्गत निम्नलिखित भारी और असामान्य कचरे को उठाया जाएगा: महत्वपूर्ण: घरेलू गीला और सूखा कचरा रोज़ की तरह पहले से ही नियमित रूप से उठाया जा रहा है। यह सेवा सिर्फ बड़े और विशेष वेस्ट के लिए है। क्या लगेगा कोई शुल्क? नगर निगम ने प्रारंभिक स्तर पर सेवा निःशुल्क रखी है, लेकिन यदि कचरा बहुत अधिक मात्रा में हुआ या कॉर्पोरेट उपयोग में आया तो प्रतीकात्मक शुल्क वसूला जा सकता है। शुल्क की सूचना अनुरोध के बाद ही दी जाएगी। प्रशासन का क्या कहना है? “स्वच्छता का स्तर बनाए रखने और स्मार्ट सुविधा देने के लिए यह सेवा शुरू की गई है। नागरिकों को अब बड़ी वस्तुएं बाहर फेंकने या जलाने की ज़रूरत नहीं। एक क्लिक पर नगर निगम उसे responsibly dispose करेगा।”– प्रशांत सिंह, उपायुक्त, स्वच्छता शाखा, इंदौर नगर निगम पर्यावरण को भी लाभ इस पहल से न केवल शहर साफ-सुथरा रहेगा, बल्कि कूड़े के गलत निपटान से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान में भी कमी आएगी। पहले कई लोग: अब इन सभी समस्याओं का समाधान एक व्यवस्थित प्रक्रिया से होगा। इंदौर की स्वच्छता में फिर एक कदम आगे इंदौर पिछले 7 वर्षों से स्वच्छता में देश का नंबर 1 शहर बना हुआ है। इसके पीछे: अब इस डिजिटल सेवा से स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 में भी इंदौर एक बार फिर देश को उदाहरण देगा। नागरिकों से अपील इंदौर नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है: “एक साफ़ शहर, एक स्वस्थ समाज” – इसी सोच के साथ इंदौर नगर निगम ने इस अत्याधुनिक सेवा की शुरुआत की है। तकनीक और नागरिक भागीदारी का यह अनूठा उदाहरण देश के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा है। भारी कचरा अब समस्या नहीं, समाधान है – बस एक क्लिक की दूरी पर। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।