मप्र में जन्मी 5.43 किलो की बच्ची, बना नया रिकॉर्ड
Best Indore News मंडला, मध्यप्रदेश – मध्यप्रदेश के मंडला जिले में एक सरकारी अस्पताल में जन्मी बच्ची ने प्रदेश में अब तक के सबसे वजनी नवजात का रिकॉर्ड बना दिया है। इस बच्ची का वजन 5.43 किलोग्राम है, जो कि सामान्य नवजात शिशुओं की तुलना में लगभग दुगुना है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के अनुसार, यह वजन एक असाधारण मामला है और इसे ‘गिगेंटिसिज्म’ (Gigantism) या उच्च भ्रूणीय वृद्धि की श्रेणी में रखा जा सकता है। जन्म की प्रक्रिया और मेडिकल टीम का योगदान: यह असाधारण बच्ची मंडला के जिला अस्पताल में जन्मी, जहां डॉक्टरों की एक टीम ने सतर्कता और कुशलता के साथ डिलीवरी कराई। डॉ. सविता वर्मा, जो इस केस को लीड कर रही थीं, ने बताया कि मां पूरी तरह से स्वस्थ थीं और गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण करवा रही थीं। उन्होंने बताया: “हमें अनुमान था कि बच्चा सामान्य से बड़ा होगा, लेकिन 5.43 किलोग्राम का वजन आश्चर्यजनक था। यह प्रदेश का अब तक का सबसे वजनी नवजात है।” माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं: बच्ची के जन्म के बाद माता-पिता की खुशी देखते ही बन रही थी। नवजात की मां, रेखा बाई, ने कहा कि यह उनके लिए ईश्वर का विशेष आशीर्वाद है। बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और उसे सामान्य देखरेख में रखा गया है। पिता रामदास सिंह, जो पेशे से किसान हैं, ने मीडिया से कहा: “यह हमारे परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी है। अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों का धन्यवाद जिन्होंने सुरक्षित डिलीवरी कराई।” सामान्य वजन से कितना ज्यादा है? भारत में आमतौर पर नवजात शिशुओं का वजन 2.5 से 3.5 किलोग्राम के बीच होता है। 5 किलो से अधिक वजन बहुत ही दुर्लभ होता है, और ऐसे मामलों में शिशु को विशेष निगरानी में रखा जाता है। विशेषज्ञों की राय: स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा मामला मेटाबॉलिक बदलावों, गर्भवती महिला के पोषण स्तर और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। साथ ही, गेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावधि मधुमेह) भी ऐसे मामलों में एक आम कारण होती है। क्या हो सकती हैं आगे की चुनौतियां? मंडला के लिए गौरव का विषय: यह मामला पूरे मंडला जिले के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। जिला अस्पताल में यह केस एक उदाहरण बनकर उभरा है कि सरकारी संस्थानों में भी उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। सामाजिक और मेडिकल चर्चा का विषय: सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हो चुकी है और लोग इसे चमत्कारिक मान रहे हैं। कई लोग इस बच्ची को “गोलू-मोलू चमत्कारी बच्ची” कहकर संबोधित कर रहे हैं। साथ ही, मेडिकल कॉलेजों में भी इस केस को स्टडी केस के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है। मंडला की यह बच्ची प्रदेश के लिए एक विशेष पहचान बन चुकी है। 5.43 किलो वजन वाली यह नवजात केवल चिकित्सा क्षेत्र में नहीं, बल्कि आम जनमानस में भी जिज्ञासा का विषय बनी हुई है। समय पर जांच और डॉक्टरों की विशेषज्ञता ने इस प्रसव को सुरक्षित बनाया, जिससे यह उदाहरण बना – कि जब स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हों, तो किसी भी चुनौती को मात दी जा सकती है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
Z डिजाइन ब्रिज पर नाराज हुए मंत्री विजयवर्गीय:प्लानिंग पर उठाए सवाल

Best Indore News इंदौर में शहर के प्रमुख ट्रैफिक प्रोजेक्ट्स में से एक, Z शेप डिजाइन वाला ब्रिज इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में इस ब्रिज का निरीक्षण करने पहुंचे मध्यप्रदेश के शहरी विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने साइट पर मौजूद अफसरों की खामियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में कहा कि “जो जमीन मिली, उसमें ही बना दी प्लानिंग” जैसी सोच अब नहीं चलेगी। यह ब्रिज शहर के ट्रैफिक प्रेशर को कम करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है, लेकिन इसके डिजाइन और निर्माण में जिस तरह की जल्दबाजी और बिना दूरदृष्टि के प्लानिंग की गई है, उसने इस प्रोजेक्ट को सवालों के घेरे में ला दिया है। क्या है मामला? इंदौर नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत बन रहे इस ब्रिज को लेकर शुरुआती दिनों से ही तकनीकी और जमीन से जुड़ी चुनौतियां रही हैं। ब्रिज का डिजाइन Z आकार का है, जो देखने में भले ही आकर्षक लगे, लेकिन इसकी उपयोगिता और ट्रैफिक फ्लो के लिहाज से यह डिजाइन कई सवाल खड़े करता है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ब्रिज साइट का निरीक्षण करते हुए जब अफसरों से पूछा कि यह डिजाइन क्यों अपनाया गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि जितनी जमीन उपलब्ध थी, उसी के अनुसार यह डिजाइन तैयार किया गया। इस जवाब से मंत्री नाराज हो गए और उन्होंने कहा, “ऐसी तर्कहीन प्लानिंग स्वीकार्य नहीं है। अगर परियोजना की उपयोगिता ही प्रभावित हो, तो उसका सौंदर्य या सीमित स्थान का बहाना नहीं चलेगा।” मंत्री का फोकस: स्मार्ट प्लानिंग और लॉन्ग टर्म उपयोगिता कैलाश विजयवर्गीय हमेशा से ही शहर की प्लानिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर में लॉन्ग टर्म विजन को प्राथमिकता देते रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंदौर जैसा तेजी से बढ़ता हुआ शहर अगर आज से 10 साल आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम नहीं करेगा, तो समस्याएं और बढ़ेंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट की प्लानिंग करते समय केवल “मौजूदा स्थिति” नहीं, बल्कि “भविष्य की जरूरतों” को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। अफसरों को चेतावनी मंत्री विजयवर्गीय ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी प्रोजेक्ट में जल्दबाजी, बिना प्लानिंग और लोगों की सुविधाओं की अनदेखी हुई, तो सीधे कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इंदौर को स्मार्ट सिटी घोषित करने के बाद उसकी हर योजना में “स्मार्ट” और “प्रैक्टिकल” दोनों सोच झलकनी चाहिए। जनता की प्रतिक्रिया स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों का कहना है कि ब्रिज की बनावट जटिल है और इससे ट्रैफिक का प्रवाह बाधित होगा। वहीं कुछ नागरिकों ने कहा कि मंत्री का यह हस्तक्षेप सराहनीय है, क्योंकि यह आम लोगों की समस्याओं को सीधे स्तर पर हल करने का प्रयास है। आगे क्या होगा? मंत्री ने इंजीनियरों और टाउन प्लानिंग अफसरों को यह निर्देश दिए हैं कि वे ब्रिज की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करें और अगर आवश्यक हो तो उसमें सुधार की योजना बनाई जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में बनने वाली संरचनाओं में स्थान की कमी के कारण समझौता न हो। इंदौर में चल रहे विकास कार्यों में गुणवत्ता और दीर्घकालीन उपयोगिता सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं। Z डिजाइन वाला यह ब्रिज एक चेतावनी है कि सौंदर्य और स्पेस की सीमाओं को देखते हुए बनाई गई त्वरित योजनाएं अक्सर जनता को लंबे समय तक परेशान कर सकती हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का यह कदम एक सकारात्मक संदेश देता है कि शासन केवल उद्घाटन और निर्माण की गति नहीं, बल्कि योजनाओं की उपयोगिता और प्रभावशीलता पर भी ध्यान दे रहा है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में रालामंडल क्षेत्र के आसपास ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण: विकास को मिलेगी नई दिशा, पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता

Best Indore News इंदौर शहर में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शहर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और वन क्षेत्र रालामंडल के आसपास अब ग्रीन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस निर्णय के तहत, ईको सेंसेटिव ज़ोन (Eco Sensitive Zone) के अंतर्गत रालामंडल से एक किलोमीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार का नया निर्माण या विकास कार्य प्रतिबंधित रहेगा। पर्यावरण को मिलेगा संरक्षण ग्रीन कॉरिडोर बनने से रालामंडल के आसपास के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा होगी। यह क्षेत्र पक्षियों और जंगली जीवों का आवास स्थल है, जिनकी रक्षा करना बेहद जरूरी है। ग्रीन कॉरिडोर न केवल वनों और जीव-जंतुओं की सुरक्षा करेगा, बल्कि शहर को प्रदूषण से भी राहत देगा। क्या है ग्रीन कॉरिडोर योजना? ग्रीन कॉरिडोर एक ऐसा क्षेत्र होता है जहां हरित आवरण (पेड़-पौधों का संरक्षण) को प्राथमिकता दी जाती है। इस योजना के तहत सड़कें, भवन या अन्य शहरी विकास कार्य सीमित कर दिए जाते हैं ताकि पारिस्थितिकी संतुलन बना रहे। यह योजना इंदौर को ‘स्वच्छ और हरित शहर’ के रूप में और भी आगे ले जाने में मदद करेगी। एक किलोमीटर दायरे में नहीं होगा कोई डेवलपमेंट इस योजना के अंतर्गत यह स्पष्ट रूप से तय किया गया है कि रालामंडल के ईको सेंसेटिव ज़ोन से एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का नया डेवलपमेंट नहीं किया जाएगा। इस निर्णय से अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर भी अंकुश लगेगा। पर्यावरणविदों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे इंदौर की स्थायी विकास योजना की दिशा में एक सशक्त कदम बताया है। नागरिकों और पर्यटकों को होगा लाभ रालामंडल में आने वाले पर्यटकों और शहरवासियों को अब अधिक हरित वातावरण मिलेगा। साथ ही, वनों की हरियाली और स्वच्छता भी बनी रहेगी। इससे इंदौर के टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा और लोग अधिक संख्या में यहां प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने आएंगे। प्रशासन का सकारात्मक कदम इंदौर नगर निगम और पर्यावरण विभाग द्वारा इस योजना को लागू करने के लिए संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, स्थानीय नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस क्षेत्र की स्वच्छता और हरियाली को बनाए रखने में सहयोग करें। इस पहल से इंदौर को न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पर्यावरण के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलेगी। इंदौर के रालामंडल क्षेत्र में ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण एक दूरदर्शी और सराहनीय कदम है। इससे शहर को स्वच्छता, हरियाली और पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में नई ऊंचाई मिलेगी। यदि अन्य शहर भी ऐसी योजनाओं को अपनाएं, तो भारत में हरित क्रांति संभव हो सकती है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर के दो भाई नर्मदा में डूबे, रीवा में नाले में बहा बच्चा, तीन जिलों में स्कूल बंद

Best Indore News इंदौर | मध्यप्रदेश में भारी बारिश और नदियों में जलस्तर बढ़ने के कारण एक के बाद एक दर्दनाक हादसे सामने आ रहे हैं। रविवार को इंदौर के दो भाई ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में डूब गए। वहीं, रीवा जिले में तेज बारिश के बीच एक डेढ़ साल का मासूम बच्चा नाले में बह गया। इन हादसों ने प्रदेशभर में चिंता की लहर दौड़ा दी है। जलभराव और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन उज्जैन, धार और झाबुआ जिलों में सोमवार को स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। इंदौर के दो सगे भाई नर्मदा में डूबे इंदौर के निवासी दो भाई रविवार को अपने परिवार के साथ ओंकारेश्वर तीर्थ स्थल पर दर्शन करने गए थे। दर्शन के बाद नर्मदा नदी के घाट पर नहाने के लिए उतरे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पानी का बहाव तेज था और घाट पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। इसी दौरान दोनों भाई अचानक गहरे पानी में चले गए और डूब गए।स्थानीय गोताखोरों और प्रशासन की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया लेकिन देर शाम तक शव नहीं मिल सके थे। इस हादसे ने पूरे इंदौर को गमगीन कर दिया है। रीवा में नाले में बहा डेढ़ साल का बच्चा रीवा जिले में भी एक अत्यंत दर्दनाक हादसा हुआ, जहां लगातार बारिश के चलते घर के पास खुले नाले में गिरकर एक डेढ़ साल का मासूम बह गया। परिजनों ने तत्काल शोर मचाया और खोजबीन शुरू की, लेकिन तेज बहाव के कारण बच्चे का पता नहीं चल सका। जिला प्रशासन और बचाव दल मौके पर मौजूद हैं और लगातार तलाशी अभियान जारी है। मौसम का कहर और प्रशासन की तैयारी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बीते कुछ दिनों से तेज बारिश हो रही है। नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे जान-माल का खतरा बना हुआ है। कुछ क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तीन जिलों—उज्जैन, धार और झाबुआ—में 24 जून को स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी है। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इन हादसों के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या प्रशासन की तरफ से तीर्थ स्थलों और जलस्रोतों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं? ओंकारेश्वर जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थल पर यदि लाइफ गार्ड और चेतावनी बोर्ड मौजूद होते तो शायद इन मासूम जिंदगियों को बचाया जा सकता था। जनता से अपील प्रशासन ने जनता से अपील की है कि भारी बारिश और जलभराव के दौरान बच्चों को अकेला बाहर न निकलने दें। नदियों, नालों और जलस्त्रोतों से दूरी बनाए रखें। यदि कहीं जलजमाव या किसी आपात स्थिति की सूचना मिले तो तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। इंदौर और रीवा की यह घटनाएं सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, ये हमारे लिए एक चेतावनी हैं कि मौसम की गंभीरता को हल्के में लेना जीवन के लिए खतरा बन सकता है। प्रशासन को चाहिए कि तीर्थ स्थलों और नदी किनारों पर सुरक्षा को प्राथमिकता दे और नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
“7 साल के बच्चे के नाम पर ज़मीन हड़पने का खुलासा, 28 साल बाद साजिश बेनकाब”

28 साल बाद ज़मीन घोटाले का पर्दाफाश: 7 साल के मासूम को 18 का बताकर हड़पी ज़मीन, हाईकोर्ट के आदेश पर लोकायुक्त ने दर्ज किया केस Best Indore News मध्यप्रदेश में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और ज़मीन घोटालों का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक मासूम 7 साल के बच्चे को 18 साल का दिखाकर उसकी ज़मीन को हथियाने का सनसनीखेज़ खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला करीब 28 साल पुराना है और अब जाकर जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश पर लोकायुक्त ने इसमें शामिल जिला खनिज अधिकारी (DMO) समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। क्या है मामला? यह मामला मध्यप्रदेश के एक ग्रामीण क्षेत्र का है, जहां वर्ष 1996 में एक 7 वर्षीय बालक के नाम पर ज़मीन के दस्तावेज़ों में हेराफेरी कर उसे 18 साल का बताया गया और उसकी ज़मीन को गैर-कानूनी तरीके से हड़प लिया गया। इस कारनामे में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और ज़मीन माफियाओं की मिलीभगत सामने आई है। बच्चे के अभिभावकों को भी सही जानकारी नहीं दी गई और दस्तावेज़ों में उनकी सहमति को फर्जी तरीके से दर्शाया गया। ज़मीन का हस्तांतरण इस प्रकार किया गया, जैसे वह बालिग होते ही अपनी संपत्ति किसी और को सौंप रहा हो। 28 साल बाद कैसे खुला मामला? इस मामले को उजागर करने में एक सामाजिक कार्यकर्ता और RTI एक्टिविस्ट की अहम भूमिका रही, जिन्होंने वर्ष 2023 में इस मामले से जुड़े दस्तावेज़ों को सार्वजनिक कराया। इसके बाद प्रभावित परिवार ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच के आदेश दिए और इस बात की पुष्टि हुई कि दस्तावेज़ों में झूठी उम्र दर्ज की गई थी। इस आधार पर हाईकोर्ट ने लोकायुक्त पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। लोकायुक्त की कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लोकायुक्त ने जिला खनिज अधिकारी (DMO), तत्कालीन पटवारी, तहसीलदार और ज़मीन रजिस्ट्रेशन विभाग के कुछ कर्मचारियों पर केस दर्ज कर लिया है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस तरह के और भी कई मामले हो सकते हैं, जो अभी तक प्रकाश में नहीं आए हैं। लोकायुक्त ने इस केस को एक मिसाल मानते हुए पूरी प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इस मामले में IPC की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिसमें धोखाधड़ी, सरकारी दस्तावेज़ों में फर्जीवाड़ा और पद का दुरुपयोग जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। प्रशासन पर सवाल इस मामले से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक नाबालिग के नाम पर इस तरह की हेराफेरी न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह नैतिक रूप से भी निंदनीय है। इतने वर्षों तक इस मामले का सामने न आना, यह दर्शाता है कि किस तरह से सिस्टम में बैठे कुछ भ्रष्ट लोग आम जनता की संपत्ति और अधिकारों को छीनने में लगे हैं। अब आगे क्या? हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज़ हो गई है। प्रभावित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही अन्य पीड़ित भी अब सामने आ सकते हैं, जिन्होंने सालों पहले ऐसी ही धोखाधड़ी का सामना किया हो। लोकायुक्त की जांच टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस तरह की कितनी और ज़मीनों पर इसी तरह के फर्जी तरीके से कब्जा किया गया है। राज्य सरकार ने भी इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों में पुराने ज़मीन ट्रांजैक्शन की समीक्षा के निर्देश दिए हैं। यह घटना न सिर्फ एक व्यक्तिगत पीड़ा है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की भयावह तस्वीर भी है। 7 साल के मासूम के साथ हुई यह साजिश अब 28 साल बाद सामने आई है, लेकिन यह हमारे सिस्टम को आईना दिखाने के लिए पर्याप्त है। अब ज़रूरत है, पारदर्शिता, जवाबदेही और आम जनता को ज़मीन और संपत्ति से जुड़े मामलों में सजग करने की। इस मामले को एक चेतावनी के रूप में देखते हुए समाज को ऐसे मामलों में आवाज उठानी चाहिए। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
“जैन मंदिर से लौट रही बुजुर्ग महिला से ठगी, फर्जी पुलिस बनकर उड़ाई सोने की चेन”

इंदौर में बुजुर्ग महिला से ठगी का मामला: फर्जी पुलिस बनकर ठग ने उड़ाई सोने की चेन Best Indore News इंदौर में बढ़ते अपराधों के बीच एक और शर्मनाक घटना सामने आई है। जैन मंदिर से दर्शन करके लौट रही एक बुजुर्ग महिला को शातिर ठग ने अपना शिकार बना लिया। खुद को पुलिसकर्मी बताकर ठग ने पहले महिला को झांसे में लिया और फिर चालाकी से उसकी सोने की चेन चुरा ली। यह घटना शहरवासियों को एक बार फिर सतर्क रहने की चेतावनी दे रही है। घटना का विवरण: यह घटना इंदौर के एक प्रमुख जैन मंदिर के आसपास की है। मंदिर से दर्शन कर वापस लौट रही एक वृद्ध महिला को रास्ते में एक व्यक्ति मिला, जिसने खुद को पुलिसकर्मी बताया। उसने महिला को यह कहते हुए रोका कि इलाके में चेन स्नेचिंग की घटनाएं बढ़ गई हैं, इसलिए वे गहनों को बैग में रख लें ताकि सुरक्षित रहें। भरोसा जीतने के लिए फर्जी आईडी और यूनिफॉर्म का इस्तेमाल: बताया जा रहा है कि आरोपी ने पुलिस जैसी वर्दी पहन रखी थी और उसके पास एक नकली आईडी भी थी। वृद्ध महिला को भरोसे में लेने के लिए उसने बहुत ही आत्मविश्वास और अधिकारिक भाषा का इस्तेमाल किया। आरोपी ने बुजुर्ग महिला से कहा, “आपके गहनों को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है, हम रोज यहां चेकिंग कर रहे हैं।” ठगी की चाल: जैसे ही महिला ने अपनी सोने की चेन उतारकर बैग में रखने के लिए दी, आरोपी ने चेन को एक कागज में लपेटने का नाटक किया और महिला को वही पैकेट थमा दिया। महिला को शक न हो इसलिए उसने जल्दी में चेन की जगह नकली धातु का सामान लपेट दिया और असली चेन लेकर मौके से फरार हो गया। जब महिला ने घर पहुंचकर पैकेट खोलकर देखा, तो उसमें केवल पीतल जैसी दिखने वाली नकली वस्तु निकली। पुलिस में शिकायत दर्ज: महिला के परिवार द्वारा तुरंत नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि आरोपी की पहचान की जा सके। हालांकि अब तक आरोपी का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। हाई अलर्ट और जागरूकता की अपील: पुलिस ने इस घटना के बाद लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अजनबी व्यक्ति, चाहे वह खुद को पुलिसकर्मी ही क्यों न बता रहा हो, पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई खुद को पुलिस बताकर गहने हटाने या बैग में रखने को कहे, तो पहले उसकी पहचान सत्यापित करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं: इंदौर में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, जहां बदमाश खुद को सरकारी अधिकारी, बैंक कर्मचारी या पुलिस बताकर लोगों को लूट चुके हैं। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और अकेले चल रहे लोग ऐसे अपराधियों के आसान शिकार बनते हैं। प्रशासन को सख्ती बरतने की जरूरत: शहर में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने के बावजूद अब तक अपराधियों को रोकने में प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए हैं। नागरिकों की सुरक्षा के लिए अब तकनीकी निगरानी (जैसे सीसीटीवी नेटवर्क, फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर) को और सशक्त करने की आवश्यकता है। क्या करें, क्या न करें – कुछ सावधानियां: इंदौर जैसी स्मार्ट सिटी में इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। पुलिस और प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करें ताकि आम जनता में सुरक्षा की भावना बनी रहे। साथ ही नागरिकों को भी सतर्क और जागरूक रहना होगा ताकि अपराधियों की चाल में न फंसें। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
“सुपर लीग जीत पर इंदौर में जश्न, राजबाड़ा पर उमड़ा जनसैलाब”

सुपर लीग के तमगे के बाद इंदौर में जबर्दस्त उत्साह: ऐतिहासिक राजबाड़ा पर जश्न शुरू, सफाईकर्मियों का होगा सम्मान Best Indore News इंदौर ने एक बार फिर अपने स्वच्छता के रिकॉर्ड को कायम रखते हुए सुपर लीग में स्थान पाकर पूरे देश में अपनी छवि को और भी मजबूत किया है। जैसे ही यह खबर शहरवासियों तक पहुंची, पूरा इंदौर उत्साह और गर्व से झूम उठा। ऐतिहासिक राजबाड़ा में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और वहां जश्न का माहौल बन गया। इंदौर – स्वच्छता में लगातार अग्रणी पिछले 7 वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब अपने नाम कर चुका इंदौर, अब स्वच्छता सुपर लीग का हिस्सा बन चुका है। इस उपलब्धि ने न केवल नगर निगम और प्रशासन के प्रयासों को सम्मानित किया है, बल्कि शहरवासियों की जागरूकता और सहयोग को भी सलाम किया गया है। स्वच्छता की यह परंपरा अब इंदौर के डीएनए में शामिल हो चुकी है। यहां न केवल सड़कें और मोहल्ले साफ हैं, बल्कि नागरिकों में भी गंदगी के प्रति जीरो टॉलरेंस देखने को मिलता है। राजबाड़ा पर भव्य आयोजन, लोगों में जोश इस सम्मान की घोषणा होते ही, राजबाड़ा पर विशेष समारोह आयोजित किया गया। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और तिरंगे के साथ हजारों लोग जमा हुए। स्कूल के छात्र, सफाई कर्मचारी, नगर निगम अधिकारी, स्थानीय समाजसेवी, और आम नागरिक – सभी इस गौरव के साक्षी बनने पहुंचे। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, स्वच्छता पर जागरूकता गीतों, और सम्मान समारोहों ने इस कार्यक्रम को और भव्य बना दिया। इंदौर की जनता ने दिखा दिया कि यह केवल एक अवॉर्ड नहीं बल्कि एक भावना है, जो उन्हें एकजुट करती है। सफाईकर्मियों का होगा विशेष सम्मान इंदौर को इस मुकाम तक पहुँचाने में सफाईकर्मियों की मेहनत और लगन का बड़ा हाथ है। नगर निगम ने ऐलान किया है कि आगामी दिनों में शहर के हर ज़ोन से चुने गए श्रेष्ठ सफाईकर्मियों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। नगर निगम आयुक्त ने कहा, “सफाईकर्मी हमारे असली नायक हैं। उनके बिना यह संभव नहीं होता। हम उन्हें सिर्फ एक दिन नहीं, पूरे साल सम्मान देना चाहते हैं।” युवा और महिलाओं की भागीदारी सराहनीय इंदौर की इस स्वच्छता यात्रा में युवाओं और महिलाओं की भूमिका भी उल्लेखनीय रही है। कॉलेजों में स्वच्छता क्लब बनाए गए हैं, स्कूलों में बच्चों को पर्यावरण शिक्षा दी जाती है, और कई महिला मंडल घर-घर जाकर कचरा अलग करने की मुहिम चला रहे हैं। इस बार की स्वच्छता सुपर लीग में इंदौर की खास बात रही – “कचरा अलग करो अभियान”, जिसने गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग इकट्ठा करने की आदत को सामान्य बनाया। अगला लक्ष्य: हर मोहल्ला मॉडल ज़ोन नगर निगम अब स्वच्छता के अगले चरण की तैयारी में जुट गया है। योजना है कि शहर के हर वार्ड को “मॉडल स्वच्छता ज़ोन” में बदला जाए, जहां कचरा न हो, दीवारें रंगीन हों, और लोगों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की पूरी जानकारी हो। डिजिटल समाधान और नवाचार भी प्रमुख कारण इंदौर ने स्वच्छता में तकनीकी उपायों को भी अपनाया है। नगर निगम द्वारा चलाया गया “स्वच्छ ऐप”, जीपीएस युक्त कचरा गाड़ियों की निगरानी, और हाईटेक कचरा प्रोसेसिंग प्लांट्स – ये सभी पहलुओं ने शहर को सुपर लीग तक पहुँचाने में मदद की। मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री ने दी बधाई इंदौर की इस ऐतिहासिक सफलता पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहरवासियों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर लिखा – “इंदौर ने फिर कर दिखाया। देश के लिए यह प्रेरणा है।” इंदौर की सफलता सिर्फ एक शहर की नहीं, बल्कि पूरे भारत की प्रेरणा है। यह साबित करता है कि जब प्रशासन, नागरिक और समाज एक साथ आते हैं, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। अब इंदौर का अगला कदम होगा – सस्टेनेबल स्वच्छता की ओर। और यकीनन, यह शहर हर बार की तरह फिर मिसाल बनेगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
गंभीर चोट पर हल्की धाराएं क्यों? हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार”

Best Indore News गंभीर जख्मों पर कमजोर धाराओं में केस दर्ज करने की प्रवृत्ति पर हाई कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगीमध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि अगर किसी व्यक्ति को गंभीर चोटें आई हैं, तो केवल मामूली धाराएं लगाने के बजाय उचित गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया जाए। साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि घायल की चोटों की फोटो केस दर्ज करते समय अवश्य ली जाए ताकि मामले की गंभीरता को नकारा न जा सके। यह आदेश राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि सभी जिलों में कार्यरत पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे गंभीर मामलों को हल्के में न लें और प्राथमिकी (FIR) में उचित धाराएं लगाई जाएं। कोर्ट का सख्त रुख हाईकोर्ट ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि जब किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से चोट लगती है, तब भी पुलिस सिर्फ कमजोर धाराओं जैसे धारा 323 (साधारण मारपीट) के तहत केस दर्ज करती है। इससे आरोपी को लाभ मिल जाता है और पीड़ित को न्याय मिलने में देरी होती है। यह बात विशेष रूप से उजागर हुई जब कोर्ट के समक्ष एक केस आया जिसमें पीड़ित के सिर पर गंभीर चोट आई थी, लेकिन पुलिस ने सिर्फ मामूली धाराएं लगाकर आरोपी को छोड़ दिया। क्या है धाराओं का महत्व? भारतीय दंड संहिता (IPC) में विभिन्न धाराएं अलग-अलग अपराधों के लिए निर्धारित की गई हैं। यदि किसी को साधारण चोट लगती है, तो धारा 323 लगाई जाती है। लेकिन यदि फ्रैक्चर, सिर में गहरी चोट, या जानलेवा हमला होता है, तो धारा 325, 326, या 307 जैसी गंभीर धाराएं लगाई जानी चाहिए। यदि पुलिस इन गंभीर धाराओं को नजरअंदाज करती है, तो आरोपी को जमानत मिलना आसान हो जाता है और वह कानून की गिरफ्त से बच जाता है। DGP को निर्देश कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया है कि इस मुद्दे पर जल्द से जल्द एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया जाए और सभी पुलिस अधीक्षकों (SPs) को निर्देश दिया जाए कि वे घायल के मेडिकल प्रमाणों को ध्यान में रखते हुए उचित धाराओं में केस दर्ज करें। साथ ही कहा गया कि: पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल पुलिस का यह रवैया, जहां गंभीर मामलों में भी सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है, कोर्ट ने ‘चिंताजनक’ बताया है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को न केवल शारीरिक पीड़ा सहनी पड़ती है, बल्कि उन्हें न्याय पाने के लिए वर्षों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी काटने पड़ते हैं। आमजन की अपेक्षाएं अब जब हाई कोर्ट ने सख्त आदेश जारी कर दिए हैं, तो आम लोगों को उम्मीद है कि पुलिस अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पुलिस अकसर मामलों को रफा-दफा कर देती है, वहां इस आदेश से बड़ी राहत मिल सकती है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद करेगा, बल्कि पुलिस को भी जवाबदेह बनाएगा। गंभीर मामलों को कमजोर धाराओं में दर्ज करना न्याय की अवमानना है और इसे अब रोका जाना आवश्यक है। यह निर्देश अगर ईमानदारी से लागू किया गया, तो पुलिस और जनता के बीच विश्वास की डोर मजबूत होगी, और कानून का सम्मान भी बढ़ेगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
“मप्र में बिजली का नया दौर: अगस्त से शुरू होगी प्रीपेड व्यवस्था”

Best Indore News मध्यप्रदेश में बिजली उपभोग की प्रणाली में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगस्त 2025 से प्रदेश में प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू की जा रही है। सबसे पहले यह व्यवस्था सरकारी कार्यालयों में लागू होगी, जिसके बाद आम उपभोक्ताओं को भी चरणबद्ध तरीके से इस मोड पर स्थानांतरित किया जाएगा। यह फैसला ऊर्जा विभाग द्वारा बिजली बिल वसूली को दुरुस्त करने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। क्या है प्रीपेड बिजली व्यवस्था? प्रीपेड बिजली प्रणाली ठीक उसी प्रकार है जैसे हम मोबाइल में रिचार्ज करवाते हैं। उपभोक्ताओं को पहले से तय यूनिट के लिए भुगतान करना होगा और उसी अनुसार उन्हें बिजली की सुविधा मिलेगी। यदि बैलेंस समाप्त हो जाता है, तो बिजली कनेक्शन स्वतः बंद हो जाएगा, जब तक उपभोक्ता पुनः रिचार्ज न करवा ले। पहले चरण में सरकारी दफ्तर अगस्त महीने से सभी सरकारी विभागों, दफ्तरों, स्कूलों, हॉस्पिटल्स, और अन्य संस्थानों में प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। इससे इन संस्थानों में अनावश्यक बिजली खपत पर नियंत्रण लगेगा और समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा। आम उपभोक्ताओं के लिए भी तैयारी ऊर्जा विभाग की योजना के अनुसार, सितंबर 2025 से आम नागरिकों को भी प्रीपेड सिस्टम में लाया जाएगा। इसके लिए नई तकनीक आधारित स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ कॉलोनियों और कस्बों में इस योजना की शुरुआत की जा रही है। उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा? चुनौतियाँ भी हैं हालांकि इस नई प्रणाली के कई लाभ हैं, लेकिन इसके सामने कुछ व्यवहारिक चुनौतियाँ भी हैं: सरकार की योजना ऊर्जा मंत्री ने बयान दिया कि “प्रीपेड बिजली व्यवस्था से पूरे राज्य में बिजली की बर्बादी रुकेगी और राजस्व बढ़ेगा। हम इसे एक बड़ी सुधार प्रक्रिया के रूप में देख रहे हैं।” इसके लिए राज्य सरकार ने स्मार्ट ग्रिड टेक्नोलॉजी, मोबाइल ऐप और हेल्पलाइन नंबर भी विकसित किए हैं। उपभोक्ता को क्या करना होगा? मध्यप्रदेश में प्रीपेड बिजली व्यवस्था एक बड़ा बदलाव है जो न केवल बिजली की खपत को नियंत्रित करेगा बल्कि सरकारी और आम नागरिक दोनों के लिए पारदर्शी व्यवस्था प्रदान करेगा। शुरुआत में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह एक सुधारात्मक कदम सिद्ध होगा। अगर आप भी उपभोक्ता हैं, तो इस नई प्रणाली को समझना और अपनाना जरूरी है ताकि आप बिना किसी रुकावट के बिजली सेवा का लाभ उठा सकें। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
8 साल पहले ही इंदौर दे चुका था गीले कचरे से खाद बनाने की सीख: अब देश भर में बना उदाहरण

Best Indore News इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, ने सफाई और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। 8 साल पहले जब देश के कई शहरों में कचरा निपटान और स्वच्छता एक बड़ी समस्या थी, तब इंदौर नगर निगम ने गीले कचरे से खाद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया था। उस समय यह पहल न केवल साहसिक थी, बल्कि देशभर के शहरों के लिए एक प्रेरणा भी बन गई। कैसे शुरू हुई थी पहल? 2016 में इंदौर नगर निगम ने यह महसूस किया कि शहर में प्रतिदिन हजारों टन गीला कचरा निकलता है, जो बिना उपयोग के फेंक दिया जाता है। इस कचरे को अगर सही तकनीक से प्रोसेस किया जाए, तो इससे ऑर्गेनिक खाद तैयार की जा सकती है, जो खेती के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है। इसके बाद नगर निगम ने शहर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की शुरुआत की, जिसमें सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा किया जाने लगा। गीले कचरे को विशेष प्लांट्स में भेजा जाता था, जहां उसे खाद में बदला जाता था। शुरुआत में इस प्रक्रिया में कुछ चुनौतियाँ आईं, लेकिन नगर निगम, सफाई मित्रों और आम जनता के सहयोग से यह प्रणाली सफल रही। परिणाम क्या निकले? देशभर में इंदौर का मॉडल इंदौर की इस पहल ने बाकी शहरों को भी प्रेरित किया। भोपाल, उज्जैन, देवास, नागपुर, पुणे जैसे शहरों ने इंदौर के मॉडल को अपनाया और अपने शहरों में कंपोस्ट प्लांट शुरू किए। भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत भी इंदौर की इस सफलता को विशेष स्थान मिला। केंद्र सरकार की टीमों ने कई बार इंदौर के कंपोस्ट प्लांट्स का दौरा किया और अन्य राज्यों को इससे सीख लेने की सलाह दी। तकनीक और प्रक्रिया लाभ इंदौर की उपलब्धियां इंदौर की यह पहल बताती है कि अगर स्थानीय प्रशासन, नागरिक और सफाईकर्मी मिलकर कार्य करें, तो कोई भी बदलाव असंभव नहीं होता। गीले कचरे से खाद बनाने की जो सीख इंदौर ने 8 साल पहले दी थी, वह आज पूरे देश में फल-फूल रही है। इंदौर न सिर्फ सफाई में आगे है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी नेतृत्व कर रहा है। यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित और स्वच्छ भारत का सपना साकार करने की दिशा में बड़ा कदम है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।