IIT इंदौर में प्लेसमेंट्स में रिकॉर्ड ग्रोथ

IIT Indore: आईआईटी इंदौर ने प्लेसमेंट में नया रिकॉर्ड बनाया है। 85 प्रतिशत बीटेक छात्रों को नौकरी मिली। एक छात्र को एक करोड़ रुपये का सालाना पैकेज मिला है। पिछले साल के मुकाबले इस साल पैकेज में बढ़ोतरी हुई है। इंदौर: आईआईटी इंदौर के बीटेक के 85% छात्रों को नौकरी मिली है। एक छात्र को तो 1 करोड़ रुपये सालाना का पैकेज मिला है। यह खबर आईआईटी इंदौर के लिए बहुत बड़ी है। इस साल प्लेसमेंट में कई रिकॉर्ड बने हैं। कई छात्रों को एक से ज्यादा कंपनियों से नौकरी के ऑफर मिले हैं। आईआईटी यानि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थान माने जाते हैं। मध्यप्रदेश में भी एक आईआईटी है। इस बार आईआईटी इंदौर ने नौकरी के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। आईआईटी इंदौर की 2024-25 की प्लेसमेंट रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। इस साल कई मामलों में यह रिपोर्ट ऐतिहासिक रही है। पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी की ग्रोथ आईआईटी इंदौर के डायरेक्टर प्रो. सुहास जोशी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईआईटी इंदौर के 85 फीसदी बीटेक छात्रों को नौकरी मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि एक छात्र को 1 करोड़ रुपये सालाना का पैकेज मिला है। प्रो जोशी ने कहा कि आईआईटी इंदौर के इतिहास में यह पैकेज अब तक का सबसे ऊंचा है और पिछले वर्ष के अधिकतम पैकेज 58 लाख रुपये की तुलना में 50 प्रतिशत की वृद्धि को प्रदर्शित कर रहा है। औसतन सैलरी पैकेज 27 लाख से ज्यादा आईआईटी की रिपोर्ट बताती है कि इस साल औसत सालाना सैलरी पैकेज 27.30 लाख रुपये रहा। पिछले साल यह 25.45 लाख रुपये था। इस साल पैकेज में औसतन 13% की बढ़ोतरी हुई है। आईआईटी इंदौर के 343 बीटेक छात्रों ने अलग-अलग कंपनियों से मिले नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। 800 से ज्यादा नौकरियों के ऑफर प्लेसमेंट की प्रक्रिया दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी। यह जुलाई 2025 तक चलेगी। अभी तक जिन 52 छात्रों को नौकरी नहीं मिली है, उन्हें भी मौका मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार कुल 395 बीटेक छात्रों में से 343 को 800 से ज्यादा नौकरियों के ऑफर मिले हैं। कई छात्रों को एक से ज्यादा कंपनियों से ऑफर आए हैं। 130 से ज्यादा कंपनियां हुईं शामिल प्लेसमेंट प्रक्रिया में 130 कंपनियां शामिल हुईं। इन कंपनियों में गूगल, डाटाब्रिक्स, क्वाडआई, गोल्डमैन सैक्स, डीई शा, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स, एनालॉग डिवाइसेज, बीपीसीएल, एचपीसीएल, सी-डॉट, एलएंडटी, डेलॉइट, एक्सेंचर, आइसीआइसीआइ बैंक, बीएनवाई मेलॉन जैसी बड़ी कंपनियां शामिल थीं। पिछले साल के मुकाबले इस बार 50 ज्यादा कंपनियों ने प्लेसमेंट प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इसका मतलब है कि इस साल ज्यादा कंपनियों ने छात्रों को नौकरी देने में दिलचस्पी दिखाई।
इंदौर के ऐतिहासिक गांधी हॉल में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कन्वेंशन सेंटर बन सकता है

अपने रणनीतिक स्थान और पार्किंग की उपलब्धता को देखते हुए, यह स्थल उच्च-स्तरीय सम्मेलनों के लिए आदर्श है इंदौर (मध्य प्रदेश): प्रतिष्ठित गांधी हॉल, जो कभी स्मार्ट सिटी इंदौर की सौंदर्यीकरण योजना का प्रमुख हिस्सा था, अब एक और बड़े उद्देश्य के लिए देखा जा रहा है – एक विश्व स्तरीय सम्मेलन केंद्र का विकास। सरकार ने केन्द्रीय स्थान पर स्थित इस हॉल को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे हॉल की तरह अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधा में परिवर्तित करने की योजना शुरू की है। अपनी रणनीतिक स्थिति और पार्किंग की उपलब्धता को देखते हुए, यह स्थल उच्च स्तरीय सम्मेलनों और पर्यटन सेवाओं के लिए आदर्श है। हाल ही में इंदौर की अपनी यात्रा के दौरान, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की सचिव वी विद्यावती मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के प्रस्ताव से प्रभावित हुईं। मध्य प्रदेश पर्यटन के क्षेत्रीय निदेशक टी. इलियाराजा ने गांधी हॉल का दौरा किया और इसे एक प्रमुख सम्मेलन केंद्र में परिवर्तित करने की व्यवहार्यता पर विचार किया। स्मार्ट सिटी के सीईओ दिव्यांक सिंह ने कहा कि राज्य सरकार मंजूरी के लिए विस्तृत प्रस्ताव भेजने पर विचार कर रही है। इस योजना में इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, आईएमसी और स्थानीय विरासत विशेषज्ञों के साथ सहयोग शामिल है। अत्याधुनिक अंदरूनी हिस्सों और कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं के अलावा, विकास में एक पर्यटक सूचना केंद्र, कैफे, स्मारिका दुकानें और प्रदर्शनी स्थल भी शामिल होंगे। अधिकारियों का लक्ष्य विरासत संरचना को संरक्षित करते हुए इसकी उपयोगिता को बढ़ाना है। अगर मंजूरी मिल जाती है, तो गांधी हॉल जल्द ही इंदौर के सांस्कृतिक और सम्मेलन परिदृश्य का केंद्र बन सकता है।
एक ही पोल से मिले अस्थायी बिजली कनेक्शन से दौड़ती रही इंदौर मेट्रो, डबल सप्लाय देना भूले

Best Indore News: इंदौर मेट्रो के लिए बिजली कनेक्शन देने में लापरवाही का मामला सामने आया है। मेट्रो ट्रेन को एक ही पोल से मिले अस्थायी बिजली कनेक्शन के सहारे दौड़ाया गया, जबकि नियमानुसार मेट्रो के लिए डबल सर्किट की बिजली व्यवस्था होनी चाहिए थी। इस लापरवाही को बाद में सुधार लिया गया और दूसरी वैकल्पिक लाइन से मेट्रो को जोड़ा गया। इंदौर। इंदौर के सबसे महत्वाकांक्षी मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए बिजली कनेक्शन देने में भी लापरवाही की गई। उद्घाटन के बाद मेट्रो सिर्फ एक ही पोल से मिले अस्थायी बिजली कनेक्शन के सहारे दौड़ती रही। वैकल्पिक दूसरे कनेक्शन की व्यवस्था पर ध्यान ही नहीं दिया गया। करीब एक सप्ताह बाद लापरवाही पकड़ में आई और खामोशी से उसे सुधार लिया गया। 31 मई से मेट्रो ट्रेन आधिकारिक रूप से पटरियों पर दौड़ने लगी। मेट्रो परियोजना की बिजली ग्रिड का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में अभी मेट्रो रेल के लिए पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से 2 एमवीए का अस्थायी बिजली कनेक्शन लिया गया है, ताकि ग्रिड बनने और स्थायी कनेक्शन होने से पहले तक मेट्रो को चलने के लिए बिजली मिलती रही। नियमानुसार मेट्रो के लिए डबल सर्किट की बिजली व्यवस्था होनी थी। यानी उसे दो जगह से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था करना थी, ताकि किसी आपात स्थिति में यदि एक खंभे से बिजली आपूर्ति रुके तो दूसरी जगह से आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। हालांकि वितरण कंपनी के इंजीनियरों ने खानापूर्ति करते हुए डबल सर्किट के नाम पर सिर्फ इतना किया कि एक ही खंभे से दो लाइन डाल दी। तो मेट्रो रेल वहीं रुक जाती मेट्रो इसी के सहारे दौड़ती भी रही। इस बीच बिजली कंपनी में कामों की समीक्षा शुरू हुई। किसी ने ध्यान दिला दिया कि जिस खंबे से मेट्रो ट्रेन को बिजली आपूर्ति की जा रही है। यदि उसे किसी गाड़ी ने टक्कर मारकर गिरा दिया या उसमें किसी तकनीकी रुकावट से आपूर्ति बाधित हुई तो मेट्रो ट्रेन को भी बिजली आपूर्ति रुक जाएगी। यह ऐसे समय होता है जब ट्रेन पटरियों पर दौड़ रही है तो मेट्रो जहां है वहीं रुक जाएगी। मेट्रो शुरुआत में एक सप्ताह जैतपुरा पैंथर लाइन से जुड़े मोनोपोल-ए से अस्थायी कनेक्शन दिया गया। इसी से दो केबल मेट्रो की बिजली के लिए दे दिए गए। करीब सप्ताहभर इस सिंगल पोल से सप्लाई के सहारे ट्रेन दौड़ती भी रही। इसके बाद बिजली कंपनी के मुख्यालय से वैकल्पिक व्यवस्था के आदेश दिए। तुरत-फुरत में मेट्रो ट्रेन के लिए निरंजनपुर ग्रिड से भी दूसरी वैकल्पिक लाइन देने का आदेश हुआ। इसके बाद दूसरी लाइन से मेट्रो को जोड़ा गया। ताकि यदि जैतपुरा मोनोपोल से बिजली आपूर्ति रुके तो मेट्रो को निरंजनपुर से बिजली मिल सके। हालांकि लापरवाही दबा दी गई और इंजीनियरों से ना जवाब मांगा गया ना कार्रवाई हुई। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।