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MP कॉलेजों में 15 दिन में छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट करने का आदेश

Order to promote students to the next class in 15 days in MP colleges

Best MP News: मध्य प्रदेश के कॉलेजों में विद्यार्थियों को अगली कक्षाओं में प्रमोट करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने नए आदेश जारी किए हैं। अब विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम जारी होने के 15 दिनों के भीतर प्रवेश नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा। विभाग ने कॉलेजों को प्रमोट करने पर जोर दिया है और विद्यार्थियों को तुरंत फीस भरने के निर्देश दिए हैं। इंदौर। उच्च शिक्षा विभाग ने स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए प्रवेश नवीनीकरण को लेकर नए आदेश जारी किए हैं। अब विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम जारी होने के 15 दिनों के भीतर प्रवेश नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा। छात्र निर्धारित समय सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं तो उन्हें नए सत्र की कक्षाओं में शामिल होने से रोका जा सकता है। इससे उनकी उपस्थिति और परीक्षा में बैठने की पात्रता प्रभावित हो सकती है। विभाग ने कॉलेजों को प्रमोट करने पर जोर दिया है। वहीं विद्यार्थियों को तुरंत फीस भरने के निर्देश दिए हैं। प्रवेश नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इसके लिए ई-प्रवेश पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। स्नातक द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष के साथ स्नातकोत्तर तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों को प्रमोट किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग आदेशों को लेकर सख्त विद्यार्थियों को पोर्टल पर लॉगिन की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और फीस संबंधी जानकारी के लिए अपने कॉलेज से संपर्क करना होगा। विभाग ने कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वे विद्यार्थियों को तकनीकी सहायता और स्पष्ट गाइडलाइन प्रदान करें। ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। निजी महाविद्यालय प्राचार्य संघ के अध्यक्ष डॉ. राजीव झालानी ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग इस बार आदेशों को लेकर सख्त है। यदि यह नियम प्रभावी ढंग से लागू होता है तो यह शैक्षणिक सत्र को समय पर शुरू करने और एकेडमिक कैलेंडर का पालन करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। मध्यप्रदेश के कॉलेजों में रिजल्ट घोषित होने के बाद विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि रिजल्ट आने के 15 दिनों के भीतर छात्रों को प्रमोशन देकर नई कक्षाओं में एडमिशन सुनिश्चित किया जाए। यह आदेश प्रदेशभर के सभी सरकारी और निजी कॉलेजों पर लागू होगा। क्या है नया नियम? नई गाइडलाइन के अनुसार, रिजल्ट घोषित होने के बाद कॉलेजों को अधिकतम 15 दिन के भीतर छात्रों का प्रमोशन कर देना होगा। इसका उद्देश्य यह है कि छात्रों की पढ़ाई में किसी प्रकार की देरी न हो और सत्र समय पर शुरू हो सके। कॉलेजों के लिए क्या होगा प्रोसेस? स्टूडेंट्स को क्या फायदा होगा? मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम छात्रों के हित में है। रिजल्ट आने के 15 दिनों के भीतर प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी करने से शैक्षणिक सत्र समय पर चलेगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

CM मोहन यादव की खुली चुनौती: दम है तो मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि के समर्थन में हलफनामा दे कांग्रेस

MP News:Open challenge of CM Mohan Yadav:

MP News: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद को लेकर कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए एक खुली चुनौती दी है। उन्होंने कांग्रेस से पूछा है कि अगर उनमें दम है, तो वे इस मामले में अदालत में जाकर साफ-साफ हलफनामा दायर करें और बताएँ कि वे श्रीकृष्ण जन्मभूमि के समर्थन में हैं या नहीं। मध्यप्रदेश: यह बयान उस समय आया जब देश में धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों पर राजनीतिक और सामाजिक बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है। राम जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ के बाद अब मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मस्थान मामला भी न्यायालय में लंबित है और इस पर विभिन्न पक्षों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा, “अब समय आ गया है कि कांग्रेस को अपना स्टैंड साफ करना चाहिए। अगर दम है तो कांग्रेस मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान के समर्थन में अदालत में हलफनामा दे। केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए धर्म और आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं चल सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सनातन आस्था और धर्म को लेकर लोगों की भावनाएं बहुत प्रबल हैं। राम मंदिर का निर्माण जनभावना की जीत का प्रतीक है और अब यही भावना मथुरा में भी जागृत हो रही है। कानूनी पृष्ठभूमि: क्या है मथुरा विवाद? मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच भूमि को लेकर विवाद दशकों पुराना है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण का वास्तविक जन्मस्थल है और मुग़ल काल में एक मंदिर को तोड़कर वहाँ मस्जिद बनाई गई। हालांकि, 1968 में एक समझौता हुआ था जिसमें दोनों धार्मिक संस्थानों के बीच सीमांकन किया गया था। लेकिन हाल के वर्षों में कई याचिकाएँ दाखिल की गई हैं, जिनमें इस समझौते को अवैध और असंवैधानिक बताया गया है। यह मामला अब मथुरा की अदालत में विचाराधीन है। भाजपा की रणनीति या आस्था का समर्थन? मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में चुनावी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस मुद्दे को चुनावी रणनीति के तहत फिर से उभारने की कोशिश कर रही है। हालांकि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा कि, “यह आस्था का विषय है, न कि चुनावी मुद्दा। भगवान श्रीकृष्ण केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक चरित्र नहीं हैं, वे हमारी सांस्कृतिक चेतना के केंद्र में हैं।” कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि कांग्रेस आज तक मथुरा और काशी जैसे धार्मिक मामलों पर दोगली नीति अपनाती आई है। जब-जब सनातन धर्म से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, कांग्रेस या तो चुप्पी साध लेती है या अप्रत्यक्ष रूप से विपक्षी रुख अख्तियार करती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कांग्रेस वास्तव में धर्मनिरपेक्ष है और सभी धर्मों का सम्मान करती है, तो उसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मसले पर खुलकर समर्थन करना चाहिए विपक्ष की प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने इसे भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति करार दिया है। उनके अनुसार, इस तरह के मुद्दों को उठाकर जनता के वास्तविक मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं से ध्यान भटकाया जा रहा है। क्या बोले धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि? विष्णु मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य रामेश्वर शास्त्री ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि, “यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। समय आ गया है कि मथुरा की धरती पर भी श्रीकृष्ण मंदिर पुनः भव्य स्वरूप में स्थापित हो।” वहीं मुस्लिम संगठनों की तरफ से संयमित प्रतिक्रिया आई है, जिनका कहना है कि न्यायालय का निर्णय सर्वोपरि होगा और सभी पक्षों को उसे स्वीकार करना चाहिए। आने वाले चुनावों पर असर? राजनीतिक पंडितों का मानना है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दा उत्तर भारत के राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में एक बार फिर धार्मिक भावनाओं को उद्वेलित करने का माध्यम बन सकता है। यह मुद्दा धार्मिक आस्था और राजनीतिक रणनीति का एक मिश्रण बन गया है, जिसमें हर पार्टी अपनी भूमिका तय करने की कोशिश में लगी हुई है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कांग्रेस को दिया गया यह खुला चैलेंज केवल एक बयान नहीं बल्कि आने वाले राजनीतिक और सामाजिक विमर्श की दिशा को दर्शाने वाला संकेत है। मथुरा जैसे आस्था से जुड़े मुद्दे देश की न्यायिक प्रणाली से लेकर जनभावनाओं तक व्यापक असर डालते हैं। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस चुनौती को स्वीकार कर कोर्ट में हलफनामा देती है या नहीं, और इससे आने वाले चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

MP विधानसभा में गरजने को तैयार कांग्रेस, भाजपा पर बरसेगा सवालों का मानसून!

MP News: Congress ready to roar in MP assembly

MP News: मध्य प्रदेश में अगले महीने विधानसभा का मानसून सत्र होगा। कांग्रेस ने अनुसूचित जाति वर्ग पर हो रहे अत्याचार के मामलों पर सरकार से सवाल पूछने का फैसला किया है। साथ ही ग्वालियर में लगातार चर्चा में बने डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा मामले में सरकार की चुप्पी पर भी हंगामा होगा। MP विधानसभा मानसून सत्र: कांग्रेस का वार, भाजपा पर सवालों की बौछार की तैयारी भोपाल, जून 2025 – मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है। इस बार कांग्रेस पूरी तरह से आक्रामक मुद्रा में है और उसने सत्र में भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। विधानसभा के अंदर सवालों की बारिश और विरोध का गरजता तूफान देखने को मिल सकता है। कांग्रेस ने दावा किया है कि सरकार कई मोर्चों पर विफल रही है और जनता के सवालों का जवाब देने से बच रही है। अब सदन में उसे हर जवाबदेही के लिए मजबूर किया जाएगा। आइए जानते हैं कांग्रेस किन मुद्दों पर सत्ता पक्ष को घेरने की योजना बना रही है और भाजपा का क्या जवाब है।  भोपाल (MP Assembly Monsoon Session)। विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस (Congress in MP) अनुसूचित जाति वर्ग पर हो रहे अत्याचार के मामलों को उठाएगी। इसके लिए सागर, छतरपुर, दमोह सहित अन्य जिलों में हुईं हत्या-मारपीट जैसी घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। साथ ही ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना के मामले में सरकार की चुप्पी, लगातार लिए जा रहे कर्ज, खाद की कमी सहित अन्य मुद्दों को भी उठाने की तैयारी है। कब से शुरू होगा एमपी में विधानसभा का मानसून सत्र इसी तरह दमोह के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में गुंडागर्दी के साथ बुरहानपुर जिले के नेपानगर में आदिवासियों के पट्टे निरस्त करने का मुद्दा उठाने की तैयारी है। पार्टी का आरोप है कि प्रदेश के तीन लाख से अधिक पात्र आदिवासियों की पात्रता होने के बाद भी अब तक वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पट्टे नहीं दिए हैं।दूसरी ओर आदिवासियों की जमीन बड़े पैमाने पर अधिकारियों द्वारा सांठगांठ करके गैर आदिवासियों को बेची जा रही है। प्रदेश के ऊपर कर्ज सवा चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसे कम करने के स्थान पर सरकार लगातार कर्ज ले रही है। वहीं, विभागों में पूंजीगत कामों की गति धीमी है, जिसके कारण अधोसंरचना विकास के काम प्रभावित हो रहे हैं। भाजपा संविधान और दलित विरोधी कांग्रेस पार्टी ने अपने विधायकों से कहा है कि वे विधानसभा में इस बात को पूरी ताकत के साथ रखें कि भाजपा संविधान और दलित विरोधी है। ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना से जुड़े विवाद पर अब तक न तो मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने समाधान निकालने की कोई पहल ही और न ही पार्टी की ओर से अपना पक्ष स्पष्ट किया गया। इससे साफ है कि भाजपा संविधान विरोधी है। दलितों पर अत्याचार के मामले में प्रदेश अव्वल है। कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। भाजपा का पलटवार – “विकास ही जवाब है” दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि कांग्रेस बेवजह का हंगामा खड़ा कर रही है। भाजपा के मुख्य सचेतक ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली जैसे हर क्षेत्र में रिकॉर्ड काम हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी संकेत दिए हैं कि मानसून सत्र में उनकी सरकार विकास के आंकड़ों के साथ विपक्ष को जवाब देगी। साथ ही राज्य में हाल ही में घोषित नई योजनाओं और निवेश आकर्षण की सफलता भी उजागर की जाएगी। MP विधानसभा का यह मानसून सत्र हंगामेदार होने के पूरे संकेत दे रहा है। विपक्ष तैयारी में है, सत्ता पक्ष जवाब के लिए मोर्चा संभाल रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सदन में असली मुद्दों पर कितनी चर्चा होती है और कितनी राजनीति। जनता की नजरें दोनों दलों पर हैं—वो जवाब चाहती है, बहाने नहीं। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

मध्यप्रदेश के GMC में बनेगी देश की दूसरी मल्टी‑डिसिप्लिनरी मेडिकल रिसर्च यूनिट

MP News: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज होने जा रही है। यहां जल्द ही देश की दूसरी मल्टी‑डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MDRU) की स्थापना की जाएगी। यह कदम न सिर्फ स्थानीय स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने वाला है, बल्कि पूरे भारत में चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को भी मजबूत करेगा। भोपाल: राजधानी का गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जल्द ही चिकित्सा अनुसंधान (मेडिकल रिसर्च) का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। यहां इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) के निर्देशन में देश की दूसरी ‘मेडिकल रिसर्च स्किल यूनिट’ स्थापित की जा रही है। इस तरह की यूनिट पहले पुणे में स्थापित की जा चुकी है। यह ऐसी इकाई होगी, जहां डाक्टरों को अनुसंधान की आधुनिक तकनीकों और नैतिक बारीकियों का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह यूनिट भोपाल समेत राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, पंजाब, चेन्नई, मुंबई, भुवनेश्वर और पूर्वोत्तर राज्यों के चिकित्सकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र के रूप में काम करेगी। जीएमसी में बनने वाली इस नई यूनिट के लिए तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला की शुरुआत बुधवार को हुई। MDRU क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण? MDRU यानी मल्टी‑डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट ऐसे केंद्र होते हैं जहाँ कई मेडिकल विभाग शोध कार्यों को संयोजित रूप से अंजाम देते हैं।भोपाल की यह यूनिट रायपुर (GMC का पहला MDRU) के बाद देश भर में दूसरी होगी, जिसे ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय की मान्यता मिली है GMC में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार यह मॉर्डनाइजेशन डॉक्टरों को सुविधाजनक और समयबद्ध चिकित्सा जांच की सुविधा प्रदान करेगा। खास शोध—क्या होंगे प्रमुख फोकस? MDRU के तहत कई गंभीर और सामूहिक स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध होगा: ये सभी पहलें न सिर्फ मरीजों को लाभ देंगी, बल्कि वैज्ञानिक और मेडिकल छात्रों के लिए भी अत्यधिक शिक्षाप्रद होंगी। शैक्षणिक और चिकित्सा छात्रों पर लाभ भोपाल चिकित्सा इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण योगदान अभी भी चुनौती क्या हैं? क्या कहते हैं जिम्मेदार? भोपाल होगा रिसर्च राजधानी भोपाल का GMC चिकित्सकीय अनुसंधान में नई गति प्राप्त करने वाला है।MDRU की स्थापना से: यह पहल मध्यप्रदेश को मेडिकल रिसर्च के मानचित्र में एक नई ऊँचाई प्रदान कर सकती है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

मध्य प्रदेश: दिग्गज नेता Digvijay सिंह पर BJP विधायक ने लगाया जलालत का मुकदमा

MP Politics News: BJP MLA files case

MP Politics News: जबलपुर, 26 जून 2025 – मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) अब एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। BJP विधायक सुशील तिवारी ‘इंदु’ (Panagar) ने उन पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि सितंबर 2023 में जबलपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय ने उनके खिलाफ PDS खाद्यान्न की ब्लैक मार्केटिंग का आरोप लगाया था। अब विशेष न्यायाधीश की अदालत ने Digvijay सिंह को नोटिस जारी कर मुकदमें में पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। क्या कहा गया, कैसा आरोप लगाया गया? एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को नोटिस जारी किया है। मामला जबलपुर के पनागर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सुशील तिवारी इंदू की छवि धूमिल करने के आरोप से संबंधित है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को नियत की गई है। Digvijay सिंह का क्या कहना है? इस समय Digvijay ने अदालत में कोई जवाब दाखिल नहीं किया है। हालांकि वे अक्सर “राष्ट्रीय भ्रष्टाचार और योजनाओं की शिकायत” के ज़रिए सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना रहा है: “मैंने तथ्य और सबूतों के आधार पर आरोप लगाए थे, लेकिन अब मुझे अदालत तक बुलाया गया है।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP विधायक द्वारा यह मुकदमा Digvijay की जनप्रियता को प्रतिकूल ढंग से प्रभावित करने की एक कोशिश मानी जा सकती है। मामले का राजनीतिक-मध्यप्रदेश में परिप्रेक्ष्य यह मामला राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है: विश्लेषकों का कहना है कि यह मज़मून MPL चुनावों से पहले कांग्रेस–BJP दोनों के लिए अहम क्लैश बन सकता है। आगे की कार्यवाही और सुनवाई की योजना मुकदमा नहीं तो राजनीतिक संदेश Digvijay सिंह पर दर्ज यह defamation केस, केवल एक कानूनी विवाद नहीं—बल्कि राजनीतिक वार्तालाप और जनसमस्याओं की चिंगारी भी है: इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन तैयार, रेलवे चलाएगा 100 से अधिक विशेष ट्रेनें”

Best Indore News: Ujjain is ready for Simhastha 2028,

MP, Ujjain News: मध्यप्रदेश के उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर तैयारियों की रफ्तार तेज कर दी है। इस क्रम में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं CEO जितेंद्र बोक्सी उज्जैन पहुंचे और रेलवे परियोजनाओं का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ के दौरान देशभर से श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए रेलवे 100 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाएगा, ताकि सभी यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और समय पर आवागमन उपलब्ध हो सके। मध्यप्रदेश का धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव – सिंहस्थ 2028 सिंहस्थ मध्यप्रदेश की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। उज्जैन में हर 12 वर्षों में आयोजित होने वाला यह आयोजन करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। अनुमान है कि इस बार 4.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। रेलवे इस बार मल्टी लेवल इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान के तहत व्यवस्था कर रहा है, जिसमें विशेष ट्रेनें, रिडिजाइन स्टेशन, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल सुविधाएं शामिल हैं। उज्जैन स्टेशन का कायाकल्प: नया रूप, नई सुविधाएं रेलवे चेयरमैन ने बताया कि उज्जैन स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त किया जाएगा: 100+ स्पेशल ट्रेनें: श्रद्धालुओं के लिए सुविधा का वादा रेलवे विभाग उज्जैन आने वाले यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, जयपुर, अहमदाबाद समेत दर्जनों शहरों से विशेष ट्रेनें चलाएगा। ट्रेन संचालन सिंहस्थ शेड्यूल के अनुसार होगा। रेल सिंहस्थ मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया जाएगा जिसमें लाइव ट्रेन स्टेटस, स्टेशन मैप, भीड़ की स्थिति और मेडिकल सहायता की जानकारी होगी। रेलवे + प्रशासन का साझा प्लान मध्यप्रदेश शासन, उज्जैन प्रशासन और रेलवे बोर्ड ने मिलकर सिंहस्थ की तैयारी के लिए एक संयुक्त कार्य योजना बनाई है। इसमें शामिल हैं: निरीक्षण में क्या हुआ खास? चेयरमैन जितेंद्र बोक्सी ने इंदौर-उज्जैन रेलमार्ग, माधव नगर, देवास जंक्शन, और फतेहाबाद यार्ड का भी दौरा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि काम डेडलाइन से पहले पूरे हों, इसकी निगरानी मुख्यालय स्तर से की जाएगी। मध्यप्रदेश सरकार का फोकस – श्रद्धालुओं की सेवा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ को लेकर स्पष्ट किया है कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के वैश्विक सांस्कृतिक महत्व को दर्शाने वाला आयोजन है। रेलवे, पर्यटन, शहरी विकास, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सभी मिलकर इसे आदर्श आयोजन बनाने में जुटे हैं। सिंहस्थ 2028 सिर्फ एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश का गौरवशाली परिचय होगा। रेलवे की सक्रिय भूमिका, स्पेशल ट्रेनें, स्टेशन का कायाकल्प और श्रद्धालुओं की सुरक्षा-सुविधा पर केंद्रित योजनाएं बताती हैं कि भारत और मध्यप्रदेश एक संगठित और तकनीकी दृष्टि से उन्नत आयोजन की ओर बढ़ रहा है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

RISE Conclave 2025: रतलाम में 500 MSME को भूमि प्रमाण पत्रऔद्योगिक विकास को नई गति

MP news: RISE Conclave 2025

MP Ratlam News: 27 जून 2025 को रतलाम में आयोजित हो रहा RISE Conclave 2025 (Regional Industry, Skill & Employment), मध्य प्रदेश में औद्योगिक विकास और MSME सेक्टर को नई ऊंचाई देने का एक प्रमुख मंच साबित होगा। इस सम्मेलन का आयोजन MPIDC (मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) द्वारा किया जा रहा है, जहां 500 MSME इकाइयों को भूमि आवंटन प्रमाणपत्र (Land Entitlement Certificate) प्रदान किए जाएंगे। यह समारोह ना सिर्फ स्थल वितरण कार्यक्रम है, बल्कि औद्योगिक विस्तार के लिए नीतिगत वार्ता, निवेश प्रोत्साहन और कौशल विकास जैसे बड़े मुद्दों पर गहन चर्चा का अवसर भी बना रहेगा। मुख्य आकर्षण और उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव उद्यमियों एवं विशेषज्ञों का मानना राजेश राठौड़, MPIDC Ujjain के कार्यकारी निदेशक, ने कहा: “यह आयोजन न केवल उद्योग-निवेशकों को एक मंच पर ला रहा है, बल्कि Made-in-MP ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” विशेषज्ञों का सुझाव: “MSME को जमीन पर अधिकार मिलने से न सिर्फ बैंकिंग और लोन प्रक्रियाएं सुलभ होंगी, बल्कि इकाइयों का दीर्घकालिक विकास भी सुनिश्चित होगा।” आयोजन की रूपरेखा सेगमेंट विवरण प्रधानमन्त्री स्तर की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उद्घाटन एवं भूमि प्रमाणपत्र वितरण तकनीकी सत्र MSME प्रदर्शन, कौशल विकास, निवेश नीतियाँ पर गहन चर्चा प्रदर्शनी 100+ स्टॉलों में मशीनरी, ODOP और GI उत्पादों की प्रदर्शनी निवेश समझौते NPCI, ONDC, Walmart, FPO जैसे संगठनों के साथ MOU अपेक्षित मुख्य अवसर और चुनौती मध्य प्रदेश को मिलेगा विकास की नई दिशा RISE Conclave 2025 केवल एक औद्योगिक सम्मेलन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश में “आत्मनिर्भर प्रदेश” की दिशा में एक विशिष्ट पहल है। यह कदम न केवल रतलाम जैसे ज़िले को औद्योगिक पहचान दिलाएगा, बल्कि पूरे राज्य में MSME सेक्टर को एक नई प्रेरणा और गति प्रदान करेगा। 27 जून को रतलाम वह दिवस होगा, जब मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास के नए इतिहास की शुरुआत करेगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक तेज़: भोपाल, इंदौर समेत 24 जिलों में भारी बारिश

MP Weather News: Monsoon knocks fast

MP Weather News: 24 जून 2025 को मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के 24 जिलों के लिए भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर और ग्वालियर सहित अधिकांश जिलों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है। इस बार मानसून अपेक्षाकृत समय से पहले सक्रिय हो गया है और शुरुआती दौर में ही यह तेज़ बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने जैसी स्थितियां उत्पन्न कर रहा है। किन जिलों में जारी हुआ है भारी बारिश का अलर्ट? मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार निम्नलिखित 24 जिलों में भारी बारिश की संभावना है: इन जिलों में गरज के साथ तेज़ हवाएं चलने, बिजली गिरने और कहीं-कहीं जलभराव की स्थिति बनने की भी संभावना जताई गई है। बारिश का कारण: बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी मौसम विभाग के अनुसार, बारिश का यह दौर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही मजबूत नमीयुक्त हवाओं के कारण है। क्या है येलो और ऑरेंज अलर्ट? मौसम विभाग ने कुछ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि सावधानी आवश्यक है। वहीं भोपाल, इंदौर, धार और जबलपुर जैसे जिलों में ऑरेंज अलर्ट भी घोषित किया गया है, जो दर्शाता है कि मौसम की स्थिति गंभीर हो सकती है और लोगों को सतर्क रहना चाहिए। सावधान! बिजली गिरने की घटनाएं भी संभावित पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में मानसून के दौरान बिजली गिरने से मौतों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। इस बार भी IMD ने चेतावनी दी है कि बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना अधिक है, विशेष रूप से खुले क्षेत्रों, खेतों और ऊंची इमारतों के आसपास। सुरक्षा सुझाव: नदी-नालों में बढ़ सकता है जलस्तर लगातार बारिश के कारण नदी-नालों और डेमों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। विशेष रूप से नर्मदा, ताप्ती, चंबल और बेतवा नदियों के किनारे बसे गांवों और बस्तियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। नगर निगमों और जिला प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि जलभराव की स्थिति को लेकर पहले से तैयारियां रखें। इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे शहरों में निचले इलाकों में जलभराव की संभावना अधिक है। यातायात और जन-जीवन पर असर बारिश के कारण: ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह सड़कों की निगरानी और जलभराव क्षेत्रों में बैरिकेड्स की व्यवस्था करें। कृषि पर असर: किसानों को मिली राहत, पर चिंता भी बरकरार हालांकि भारी बारिश का अलर्ट सामान्य तौर पर चिंता का कारण बनता है, लेकिन किसानों के लिए यह राहत की खबर है। इस बारिश से: लेकिन यदि बारिश जरूरत से अधिक हो गई, तो फसल क्षति, बीज बहाव और जलभराव की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। प्रशासन की तैयारी: राहत और बचाव दल अलर्ट पर राज्य सरकार और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि: निष्कर्ष: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें मध्य प्रदेश में मानसून ने पूरी तरह से सक्रिय रूप ले लिया है। आगामी कुछ दिनों में लगातार बारिश की संभावना है। ऐसे में आम नागरिकों को चाहिए कि वे: यह बारिश लाभकारी भी हो सकती है और हानिकारक भी, यह इस पर निर्भर करता है कि हम कितना सतर्क रहते हैं। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पीएम मोदी से महत्वपूर्ण मुलाकात:

Best MP News:Chief Minister Dr. Mohan Yadav with PM Modi:

MP News: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री निवास पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण विषयों पर गंभीर संवाद और प्रस्तावों की प्रस्तुति का अवसर भी थी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को प्रदेश की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं, जल संरक्षण प्रयासों, किसानों के सम्मेलन, टेक्सटाइल पार्क, मेट्रो प्रोजेक्ट, नक्सलवाद पर कार्रवाई और उज्जैन से जुड़ी वैदिक कालीन समय गणना की पहल जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री से कई कार्यक्रमों के उद्घाटन एवं सम्मिलनों में शामिल होने का अनुरोध भी किया, जिसे पीएम मोदी ने सहर्ष स्वीकार किया। सबका साथ, सबका विकास” की भावना से कार्य कर रही है मप्र सरकार: सीएम यादव मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से चर्चा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के मूलमंत्र ‘सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास-सबका प्रयास’ के अनुरूप कार्य कर रही है। केंद्र की नीतियों और योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में मप्र सरकार पूरी तरह तत्पर है।जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता: पीएम को वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि प्रदेश में 30 मार्च से 30 जून 2025 तक जल संरक्षण हेतु “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाया गया। इस अभियान से भूजल स्तर सुधारने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। खंडवा जिला, देश भर में भूगर्भीय जल भंडारण में प्रथम स्थान पर रहा, जबकि मध्य प्रदेश ने देश के शीर्ष चार राज्यों में जगह बनाई। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह अभियान गुजरात सरकार से प्रेरित था, जिसमें पुराने कुएं, बावड़ियां और नदी तटों का पुनर्जीवन किया गया। उन्होंने पीएम मोदी को इस अभियान के समापन कार्यक्रम में वर्चुअली सम्मिलित होकर आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रित किया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। सीहोर में 2 लाख किसानों का महासम्मेलन: पीएम को किया आमंत्रित मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने और कृषि आधारित उद्योगों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसी क्रम में आगामी 12-14 अक्टूबर 2025 को सीहोर जिले में दो लाख से अधिक किसानों का वृहद सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को इस ऐतिहासिक सम्मेलन के उद्घाटन हेतु आमंत्रित किया। धार में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क: भूमि पूजन के लिए आमंत्रण मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी कि धार जिले में पीएम मित्र योजना के अंतर्गत टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य राज्य में वस्त्र उद्योग को नया आयाम देना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।मुख्यमंत्री ने इस परियोजना के भूमि पूजन और औद्योगिक खंडों के आवंटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का आग्रह किया। भोपाल मेट्रो अक्टूबर में होगी शुरू, पीएम से उद्घाटन की अपेक्षा डॉ. यादव ने बताया कि भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट अक्टूबर 2025 तक प्रारंभ हो जाएगा। मेट्रो के संचालन से शहरी यातायात को नई दिशा मिलेगी और आमजन को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को मेट्रो के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया। नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार: मुख्यमंत्री ने दी जानकारी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को प्रदेश में नक्सलवाद समाप्त करने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विगत डेढ़ वर्षों में प्रदेश में 10 से अधिक नक्सलवादी मारे गए, जिन पर कुल 1.62 करोड़ रुपये का इनाम था। अब सिर्फ बालाघाट जिले के कुछ हिस्सों में नक्सली गतिविधियां सीमित हैं। गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा के अनुसार, मार्च 2026 तक मप्र को नक्सल मुक्त बना दिया जाएगा। कर्मचारियों की पदोन्नति नीति में बड़ा सुधार मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्षों से अटकी हुई कर्मचारियों की पदोन्नति को प्रदेश सरकार ने हल किया है। नई पदोन्नति नीति के अनुसार, यह सरकारी कर्मचारियों के मनोबल और प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि लाएगा। उज्जैन को फिर से बनाना चाहते हैं समय गणना का केंद्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए बताया कि तीन हजार वर्ष पूर्व उज्जैन से ही समय की गणना होती थी, जिसे औपनिवेशिक शक्तियों ने पेरिस और बाद में ग्रीनविच स्थानांतरित कर दिया। अब भारत को फिर से वैश्विक समय गणना का केंद्र बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। उज्जैन के पास एक नई वेधशाला स्थापित की गई है, जो वैज्ञानिक समय निर्धारण का प्रमुख केंद्र बनेगी। जनवरी 2026 में वैश्विक सम्मेलन का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसके उद्घाटन हेतु प्रधानमंत्री को आमंत्रण दिया गया। सम्राट विक्रमादित्य की गाथा को वैश्विक मंच पर लाने की योजना मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने आदिकाल में गणतंत्र और सुशासन की स्थापना की थी। उनकी महान गाथा को देशभर में महानाट्य के माध्यम से मंचित किया गया है। अब राज्य सरकार, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अलंकरण शुरू करने का प्रस्ताव तैयार कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव में प्रधानमंत्री से सहयोग का अनुरोध किया। मप्र विकास की नई ऊंचाइयों की ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रधानमंत्री मोदी से यह मुलाकात मध्य प्रदेश के विकास के अगले चरण का संकेत है। उन्होंने प्रदेश की प्राथमिकताओं को केंद्र तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया और अनेक योजनाओं, कार्यक्रमों और अभियान के लिए प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन और सहभागिता की अपेक्षा जताई। इस मुलाकात से न केवल प्रदेश को केंद्र से सहयोग की नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। आने वाला समय मध्य प्रदेश के लिए विकास, नवाचार और गौरव की नई कहानियों से भरा होगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

MP Samwad 2025: CM मोहन यादव के साथ विकास पर संवाद

Best Indore News:MP Samwad 2025

MP News: ‘अमर उजाला संवाद’ का कारवां इस बार भारत के हृदय यानी मध्य प्रदेश पहुंच रहा है। राजधानी भोपाल में 26 जून को होने वाले इस संवाद में अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां शामिल होंगी। विकास से जुड़ी नीतियां, अर्थव्यवस्था, सिनेमा, खेल और अध्यात्म जैसे विषयों पर सारगर्भित चर्चा के लिए पहचाने जाने वाले ‘अमर उजाला संवाद’ का मंच पहली बार मध्य प्रदेश में सजने जा रहा है। 26 जून को राजधानी भोपाल के ताज लेकफ्रंट होटल में यह ‘संवाद’ होगा, जहां अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां जुटेंगी और मध्य प्रदेश के विकास समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगी। कार्यक्रम मुख्यमंत्री मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में होगा। वे मध्य प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर मुख्य उद्बोधन देंगे। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद से वे मध्य प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव का संक्षिप्त परिचय मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को उज्जैन में हुआ था। उनके पिता का नाम पूनमचंद यादव और मां का नाम लीलाबाई यादव है। सीमा यादव उनकी धर्मपत्नी हैं। मोहन यादव ने एमबीए किया है और पीएचडी की डिग्री भी हासिल की है। उनके परिवार में पत्नी सीमा यादव के अलावा दो पुत्र और एक पुत्री हैं।  सीएम के बारे में और जानिए… गीता कालोनी निवासी पूनमचंद यादव के घर जन्मे मोहन यादव का बचपन आर्थिक तंगी में गुजरा। पिता पूनमचंद मिल में नौकरी करते थे। कमाई ज्यादा नहीं होती थी। परिवार का गुजारा करने के लिए पूनमचंद अपने भाई शंकर लाल के साथ मालीपुर इलाके में चाय-पोहे भजिए की दुकान भी चलाते थे। मोहन यहां कभी-कभी पिता-चाचा की मदद करने आते थे। 1982 में जब मोहन यादव ने छात्रसंघ का पहला चुनाव जीता, उस वक्त भी वह अपनी चाय-पोहे की दुकान पर काम करते थे। चाय-पोहे की दुकान ठीक चलने लगी तो उन्होंने उसे बढ़ाकर एक रेस्टोरेंट भी डाला था। शिक्षक ने की पढ़ाई में मदद, उज्जैन विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष रहते किया एमए और पीएचडी परिवार की मदद के साथ मोहन पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान रखते थे। परिवार की आर्थिक हालत और मोहन की प्रतिभा को देखते हुए सालिगराम नाम के शिक्षक ने उन्हें अपने साथ रख लिया। उसे पढ़ाया-लिखाया। पूरा खर्च भी उठाया। अभाव के बीच शिक्षक से मिली मदद के साथ मोहन यादव ने पीएचडी तक की शिक्षा ग्रहण की। मोहन यादव ने उज्जैन विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष रहते हुए पॉलिटिकल साइंस में एमए और इसके बाद पीएचडी भी की। 2010 में उन्हें पीएचडी की उपाधि मिली।   छात्रसंघ के सह-सचिव से राज्य के मुख्यमंत्री पद तक ऐसी है राजनीतिक यात्रा डॉ. मोहन यादव ने माधव विज्ञान महाविद्यालय से छात्र राजनीति की शुरुआत की। 1982 में वे माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव और 1984 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे हैं। 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री और 1986 में विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। 1988 में यादव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे हैं। 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री और सन 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री रह चुके हैं। 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खंड कार्यवाह, सायं भाग नगर कार्यवाह और 1996 में खण्ड कार्यवाह और नगर कार्यवाह रहे हैं। संघ में सक्रियता की वजह से मोहन यादव 1997 में भाजयुमो प्रदेश समिति में अपनी जगह बनाई। 1998 में उन्हें पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य बनाया गया। इसके बाद उन्होंने संगठन में रहकर अलग-अलग पदों पर काम किया।  2004-2010 के बीच वह उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) रहे। 2011-2013 में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) भी बने। भाजपा की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य और सिंहस्थ मध्य प्रदेश की केंद्रीय समिति के सदस्य भी रहे। मध्य प्रदेश विकास प्राधिकरण के प्रमुख, पश्चिम रेलवे बोर्ड में सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं। पहली बार 2013 में उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक बने। 2018 में दूसरी बार इस सीट से जीतने में सफल रहे। 2020 में भाजपा सरकार बनी तो मोहन यादव मंत्री बने और 2023 में राज्य के मुख्यमंत्री बनाए गए। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।