इंदौर में कार रेंटल फ्रॉड का पर्दाफाश: Zoom App से कार किराए पर लेकर बेचते थे

Best Indore News: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक चौंकाने वाला कार रेंटल फ्रॉड सामने आया है, जिसमें दो आरोपियों ने Zoom App जैसे कार रेंटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करते हुए कारों को किराए पर बुक किया और फिर उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते दामों में बेच दिया। परदेशीपुरा पुलिस ने इस मामले में दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है। फरियादी की सतर्कता से हुआ खुलासा इंदौर में कार रेंटल फ्रॉड का पर्दाफाश: Zoom App से कार किराए पर लेकर बेचते थे स जालसाजी का भंडाफोड़ तब हुआ जब भवन सक्सेना नामक एक नागरिक ने अपनी कार के रेंटल पीरियड को बार-बार बढ़ाने की संदिग्ध मांग पर संदेह जताया। उन्होंने जब Zoom App से अपनी कार को बुक कराने वाले व्यक्ति से संपर्क किया, तो जवाब संतोषजनक नहीं मिला। उन्हें शक हुआ कि कहीं उनकी कार का गलत इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए तुरंत परदेशीपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की तफ्तीश में निकली चौंकाने वाली जानकारी शिकायत मिलते ही पुलिस ने डिजिटल ट्रेसिंग और गाड़ी की लोकेशन ट्रैकिंग शुरू की। जांच में सामने आया कि जिन लोगों ने कार किराए पर ली थी, वे महज उपयोग के लिए नहीं बल्कि उसे ग्रामीण क्षेत्रों में बेचने के मकसद से बुक कर रहे थे। आरोपी अब तक लगभग 10 से अधिक कारें इस तरह बेच चुके थे। Zoom App से गाड़ियों की बुकिंग और फिर ग़ायब पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी Zoom जैसी प्रतिष्ठित रेंटल कंपनियों के ऐप्स से फर्जी डॉक्युमेंट्स के सहारे गाड़ियों को बुक करते थे। वे कार लेकर बड़े शहरों से दूर, छोटे कस्बों और गांवों में चले जाते, जहां वाहन के असली मालिक की जांच करने वाला कोई नहीं होता। यहां वे कम दामों पर अनजान ग्रामीणों को ये गाड़ियाँ बेच देते थे। कार बेचने की तरकीब आरोपियों ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पहुंच बना रखी थी और वहां पहले से कुछ ‘बिचौलियों’ से संपर्क कर रखा था। वे वहां की भोली-भाली जनता को ये कहकर गाड़ियाँ बेचते थे कि यह बैंक से नीलामी में मिली है या मालिक विदेश जा रहा है। इस तरह वे एक नई गाड़ी को भी कम कीमत पर बेच देते थे और जल्द पैसा कमा लेते थे। दो आरोपी गिरफ्तार, गिरोह में और लोगों की तलाश पुलिस ने फिलहाल दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके नाम गोपनीय रखे गए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में इस रैकेट में और भी लोगों के शामिल होने की संभावना है, विशेषकर वे लोग जो ग्रामीण इलाकों में कारें खरीदते और बेचते हैं। पुलिस का कहना है कि जल्दी ही इस फ्रॉड रैकेट के मास्टरमाइंड को भी पकड़ा जाएगा। क्या बोले पुलिस अधिकारी? परदेशीपुरा थाना प्रभारी ने कहा – “यह एक सुनियोजित ठगी का मामला है। आरोपियों ने तकनीक का इस्तेमाल करके कारों को किराए पर लिया और फिर उन्हें बेचने की योजना बनाई। फरियादी की सतर्कता और समय पर रिपोर्टिंग से हम इस फ्रॉड का जल्दी खुलासा कर सके।” Zoom App जैसी सेवाओं के लिए चेतावनी इस घटना के बाद ऑनलाइन रेंटल प्लेटफॉर्म्स को भी सजग रहने की सलाह दी गई है। पुलिस ने कंपनियों से अपील की है कि वे बुकिंग के लिए यूज़ किए जा रहे दस्तावेजों की दोबारा जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रिपोर्ट करें। आम जनता के लिए सबक यह मामला आम नागरिकों के लिए भी एक चेतावनी है कि जब भी आप अपनी कार रेंट पर दें या किसी भी प्रकार की संपत्ति को किराए पर दें, तो सभी दस्तावेजों और उपयोग की निगरानी करें। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय आवश्यक सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। इंदौर पुलिस की तेज़ कार्यवाही ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। इस घटना से यह स्पष्ट है कि टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग करके भी फ्रॉड संभव है, लेकिन समय पर सतर्कता और सही कदम उठाकर इससे बचा जा सकता है। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए नागरिकों, प्लेटफॉर्म्स और प्रशासन – सभी को मिलकर काम करना होगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर के उर्दू स्कूलों में हिंदी-संस्कृत शिक्षकों की तैनाती बनी शिक्षा में बाधा

Best Indore News: मध्य प्रदेश की शैक्षणिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के कई शासकीय उर्दू स्कूलों में हिंदी और संस्कृत विषय के शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है, जबकि इन स्कूलों में सभी विषय उर्दू भाषा में पढ़ाए जाते हैं। नतीजा यह हो रहा है कि जिन छात्रों को उर्दू माध्यम में पढ़ाई करनी थी, वे या तो विषय के शिक्षक के अभाव में पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं या फिर उन्हें ऐसे विषय पढ़ाए जा रहे हैं जिनका उनके सिलेबस से कोई संबंध नहीं है। नियुक्ति में हो रहा है रसूख का दुरुपयोग मध्य प्रदेश स्थानीय सूत्रों और अभिभावकों की शिकायतों के अनुसार, कई हिंदी और संस्कृत विषय के शिक्षक अपने रसूख का उपयोग कर उर्दू माध्यम के स्कूलों में पदस्थापना ले लेते हैं। यहाँ आने के बाद वे जानते हैं कि उन्हें पढ़ाने की बाध्यता नहीं है, क्योंकि स्कूल की भाषा, पाठ्यक्रम और छात्रों की जरूरत उनके विषय से मेल नहीं खाती। परिणामस्वरूप, वे दिनभर विद्यालय में आराम करते हैं और समय पूरा होते ही घर चले जाते हैं। छात्रों के भविष्य पर असर इन स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग से आते हैं। उर्दू माध्यम ही उनकी पढ़ाई का एकमात्र सहारा है। लेकिन जब उनके लिए निर्धारित विषयों के शिक्षक ही नहीं मिलते, तो शिक्षा की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है। कई छात्र समझ ही नहीं पाते कि उन्हें हिंदी और संस्कृत पढ़ाई क्यों जा रही है, जबकि बोर्ड परीक्षा में उनकी भाषा उर्दू है। स्कूल प्रशासन मौन, शिक्षा विभाग भी उदासीन शहर के कुछ उर्दू स्कूलों के प्राचार्यों ने इस स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग से लिखित शिकायत भी की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। कुछ स्कूलों ने इस समस्या को लेकर नगरीय प्रशासन एवं शिक्षा मंत्री तक बात पहुँचाने का प्रयास किया है, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है। एक वरिष्ठ शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह सिस्टम की खामी है। शिक्षक तबादला लेकर उर्दू स्कूल में इसलिए आते हैं क्योंकि यहाँ अपेक्षाकृत कम कार्यभार है। लेकिन इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है।” कई स्कूल जहां हिंदी माध्यम के शिक्षकों की कमी इंदौर के विजय नगर, बाणगंगा आदि क्षेत्र में कई ऐसे शासकीय स्कूल हैं, जहां शिक्षकों की कमी है। बावजूद इसके उर्दू स्कूलों में आराम कर रहे शिक्षकों को पढ़ाने के लिए यहां नहीं भेजा जा रहा है। कई बार हो चुकी शिकायत उर्दू स्कूलों में हिंदी और संस्कृत माध्यम के शिक्षकों के स्थानांतरण के संबंध में पालक संघ ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को कई बार शिकायत की है। विद्यार्थी भी अपने स्तर पर स्कूलों के प्राचार्य समस्या बता चुके हैं। फिर भी निराकरण नहीं हुआ है। विद्यार्थियों ने बताया कि उर्दू स्कूलों में गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान ऐसे विषय भी उर्दू में पढ़ाए जाते हैं। इस कारण हिंदी भाषा के शिक्षक नहीं पढ़ा पा रहे हैं। समाधान की मांग अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और उर्दू भाषा से जुड़े शिक्षाविदों ने सरकार से मांग की है कि: इंदौर जैसे शिक्षित शहर में उर्दू माध्यम के छात्रों को उनके अधिकारों से वंचित किया जाना न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह शिक्षा की समावेशी नीति पर भी सवाल खड़े करता है। यदि सरकार और शिक्षा विभाग ने जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो यह उर्दू स्कूलों के भविष्य और वहाँ पढ़ रहे हजारों छात्रों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में शिवराज और कैलाश विजयवर्गीय की बंद कमरे में 18 मिनट की अहम बैठक

Best Indore News: इंदौर की राजनीतिक फिजा रविवार को उस समय अचानक गर्मा गई, जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य सरकार में वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की एक बंद कमरे में हुई मुलाकात चर्चा का विषय बन गई। यह मुलाकात लगभग 18 मिनट तक चली और खास बात यह रही कि इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ठाकुर को बाहर इंतजार करना पड़ा। घटना इंदौर के एक विशिष्ट कार्यक्रम की है, जिसमें कई भाजपा के वरिष्ठ नेता, राज्य सरकार के मंत्रीगण और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम से पहले ही यह साफ हो गया था कि शिवराज सिंह चौहान और कैलाश विजयवर्गीय किसी अहम विषय पर चर्चा करना चाहते हैं। इसी के चलते दोनों नेताओं ने खुद को एक कमरे में अलग किया, जहाँ करीब 18 मिनट तक बातचीत होती रही। क्या थी बंद कमरे की चर्चा? हालांकि बातचीत का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हैं कि यह चर्चा आने वाले मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार, लोकसभा उपचुनाव की रणनीति, या पार्टी के आंतरिक समन्वय से जुड़ी थी। सूत्रों के अनुसार, चर्चा का विषय भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, और हाल ही में सामने आई नीति मतभेदों को लेकर था। यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले समय में भाजपा के भीतर बड़ी जिम्मेदारियों के फेरबदल हो सकते हैं। 18 मिनट का इंतजार और अनुप्रिया ठाकुर का संयम जैसे ही शिवराज और कैलाश बंद कमरे में गए, कार्यक्रम में मौजूद अन्य नेताओं और अतिथियों के बीच हड़बड़ाहट और कुर्सियों पर कानाफूसी शुरू हो गई। सभी की निगाहें उस कमरे के दरवाज़े पर टिकी रहीं, जहाँ ये दोनों नेता भीतर विचार-विमर्श कर रहे थे। इस बीच, केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ठाकुर जो पहले से बैठक के लिए आमंत्रित थीं, उन्हें बाहर इंतजार करना पड़ा। उन्होंने संयमित व्यवहार दिखाते हुए किसी भी असहजता को सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन यह स्पष्ट था कि वह इस “अप्रत्याशित बैठक” से अनभिज्ञ थीं। राजनीतिक संदेश और संकेत इस मुलाकात ने राजनीतिक विश्लेषकों को एक बार फिर सक्रिय कर दिया है। जहाँ एक ओर शिवराज सिंह चौहान हाल ही में भाजपा संसदीय बोर्ड में नई भूमिका के लिए चर्चा में हैं, वहीं कैलाश विजयवर्गीय इंदौर और मध्य प्रदेश की राजनीति में एक पावर सेंटर माने जाते हैं। कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों नेताओं की यह मुलाकात एक “सहमति-संकेत” रणनीति का हिस्सा हो सकती है। इसमें वे यह तय कर रहे हैं कि राज्य में संगठन और प्रशासन के स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ना है। भाजपा कार्यकर्ताओं और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं भाजपा के कार्यकर्ताओं में इस चर्चा को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ इसे नेतृत्व के बीच अच्छा समन्वय मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इससे संदेश गलत जा सकता है, विशेषकर जब केंद्रीय मंत्री को इंतजार करना पड़े। विपक्ष ने भी इस पर चुटकी ली। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि यह भाजपा की आंतरिक अस्थिरता और वर्चस्व की लड़ाई को उजागर करता है। “जब एक केंद्रीय मंत्री को इंतजार करना पड़े और प्रदेश नेता बंद कमरे में बैठक करें, तो इससे कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े होते हैं,” – कांग्रेस नेता का बयान। आने वाले फैसलों पर असर? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह 18 मिनट की बातचीत आने वाले नौकरशाही फेरबदल, नीति निर्माण, और राजनीतिक नियुक्तियों को प्रभावित कर सकती है। खासकर इंदौर, भोपाल, उज्जैन जैसे प्रमुख जिलों में प्रशासनिक निर्णयों और पार्टी संगठन में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इंदौर में शिवराज सिंह चौहान और कैलाश विजयवर्गीय की बंद कमरे की बैठक केवल एक साधारण बातचीत नहीं थी। इसके पीछे कई गहरे राजनीतिक संदेश छुपे हो सकते हैं। आने वाले दिनों में भाजपा और मध्यप्रदेश सरकार के भीतर होने वाले बदलाव इस बैठक के प्रभाव को स्पष्ट कर देंगे। राजनीति में हर संकेत का एक संदेश होता है – और इस बार यह संदेश दिल्ली से भोपाल तक पहुंच चुका है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
FSSAI – अब खाद्य पैकिंग पर नहीं दिखेगा 100% शुद्धता का दावा

Best Indore News: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य पदार्थों की पैकिंग पर 100 प्रतिशत के चिह्न का उपयोग करने पर रोक लगा दी है। एफएसएसएआई का मानना है कि इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। यह निर्देश सभी तरह के खाद्य पदार्थों पर लागू होगा और पुरानी पैकिंग को सितंबर माह तक बाजार से हटा लिया जाएगा। किसी भी तरह के खाद्य पदार्थ की पैकिंग पर अब 100 प्रतिशत के चिह्न का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने इस पर रोक लगा दी है। प्राधिकरण ने माना है कि 100 प्रतिशत के दावे और निशान से उपभोक्ता भ्रमित हो रहे हैं। पहले प्राधिकरण ने सिर्फ पैक्ड फलों के रस को लेकर ऐसे निर्देश दिए थे लेकिन अब सभी तरह के खाद्य पदार्थों को इसके दायरे में लिया गया है। इसमें इंटरनेट मीडिया इंफ्लूएंसरों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। हालांकि उद्योगों का धड़ा इस नियम पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है। सभी को जारी किए निर्देश बीते दिनों एफएसएसएआई ने सभी खाद्य पदार्थ निर्माताओं के लिए निर्देश जारी करते हुए कहा कि खाद्य उत्पाद लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री पर 100 प्रतिशत शब्द का उपयोग न किया जाए। इसके साथ ही ऐसे शब्द या चिह्न वाली पुरानी पैकिंग भी सितंबर माह तक बाजार से हटा ली जाए। इस आदेश के पीछे कारण बताते हुए एफएसएसएआई ने माना कि नियामक प्रविधानों तहत इसमें अस्पष्टता है, ऐसे में इसकी गलत व्याख्या उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है। खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम 2018 में 100 प्रतिशत शब्द को किसी भी तरह से परिभाषित नहीं किया गया है। ऐसे में यह शब्द उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है। इस बीच देश में खाद्य तेल उत्पादकों की शीर्ष संस्था साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) ने एफएसएसएआई को ज्ञापन सौंप कर मांग रखी है कि जारी निर्देश पर पुनर्विचार किया जाए। नियमों में ही मिलावट की छूट दरअसल, देश के खाद्य सुरक्षा और मानक विनिमय में ही तमाम खाद्य पदार्थों में सम्मिश्रण या तय पैमानों तक सम्मिश्रण की छूट दे रखी है। जैसे किसी खाद्य वस्तु चाहे बिस्किट हो या घी-तेल से बना कोई पदार्थ या कुकिंग मीडियम, यदि उसमें दो प्रतिशत तक ट्रांसफेट है तो उसे नियमों में ट्रांसफेट फ्री माना जाएगा। इसी तरह खाद्य तेलों में 20 प्रतिशत तक ब्लेंडिंग (मिश्रण) की छूट सरकार ने ही दे रखी है, यानी एक तेल में दूसरे तेल की 20 प्रतिशत तक मिलावट की जा सकती है। सिर्फ सरसों तेल में किसी अन्य तेल की ब्लेंडिंग पर रोक है। काफी पावडर भी उदाहरण है क्योंकि देश के खाद्य सुरक्षा नियम छूट देते हैं कि इंस्टेंट काफी पावडर में चिकोरी के पौधों का पावडर मिलाया जा सकता है। तमाम इंस्टेंट काफी पावडर में 49 प्रतिशत तक चिकोरी की ब्लेंडिंग की छूट दी गई है। इसी तरह मक्खन के विकल्प के तौर पर बटरिन या माजरिन जैसे पदार्थ बाजार में बिक रहे हैं। किसी पदार्थ के 100 ग्राम या 100 मिली में 0.59 ग्राम शुगर है तो उसे शुगर फ्री माना जाने की इजाजत नियम देते हैं। ऐसे में ऐसे तमाम उत्पादों पर 100 प्रतिशत का मार्का उपयोग किए जाने पर भी इससे पहले तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती थी। क्या कहती हैं मौजूदा नियमावली? भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम 2018 में 100 प्रतिशत शब्द की कोई परिभाषा नहीं है। जबकि नियम कई उत्पादों में सीमित मात्रा में मिलावट की छूट पहले से ही देते हैं: इन स्थितियों में “100 प्रतिशत” का दावा प्रैक्टिकली गलत साबित होता है। एफएसएसएआई का यह कदम खाद्य उत्पादों में गुणवत्ता और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है। उपभोक्ताओं को जहां इस निर्णय से लाभ मिलेगा, वहीं उद्योग जगत को अपनी ब्रांडिंग रणनीतियों पर नए सिरे से काम करना होगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में आरटीओ की कार्रवाई बनी चर्चा का विषय – बुक की टैक्सी, फिर किया जब्त

Best Indore News: इंदौर में आरटीओ ने बिना परमिट और पंजीकरण के टैक्सी सेवाएं देने वाले निजी वाहन चालकों पर कार्रवाई की। टीम ने यात्री बनकर निजी कारों को बुक किया और जब्त कर लिया। आरटीओ ने बताया कि यह वाहन तय नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, इसलिए उनको जब्त किया गया। इंदौर। इंदौर जिले में नियम विरुद्ध टैक्सी के रूप में उपयोग की जा रही निजी कारों पर बुधवार को आरटीओ द्वारा कार्रवाई की गई। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए यात्री बनकर निजी कारों को बुक किया। इन कारों में सवार होकर विजय नगर स्थित पुराने आरटीओ कार्यालय पहुंचे और यहां पर सभी कारों को जब्त कर लिया। आरटीओ की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही अन्य निजी वाहन चालक वाहन लेकर भाग गए। परिवहन विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ निजी वाहन चालक बगैर परमिट और पंजीकरण के टैक्सी सेवाएं दे रहे हैं। इसके कारण अधिकृत टैक्सी चालकों को नुकसान हो रहा है। कैसे हुई कार्रवाई? घटना इंदौर के विजय नगर क्षेत्र की बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग को शिकायत मिली थी कि शहर में कई टैक्सी व कैब सेवा देने वाले वाहन बिना वैध परमिट, फिटनेस, या बीमा के दौड़ रहे हैं। इसके बाद आरटीओ की टीम ने एक योजना बनाई। उन्होंने एक ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर ऐप से एक टैक्सी बुक की। जैसे ही टैक्सी ड्राइवर बताए गए स्थान पर पहुंचा, आरटीओ टीम ने मौके पर ही उसकी गाड़ी की फिटनेस, बीमा, परमिट और प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच शुरू कर दी। जांच में सामने आया कि वाहन के दस्तावेज अपूर्ण और अवैध थे। टैक्सी का बीमा समाप्त हो चुका था, साथ ही उसका कमर्शियल परमिट भी नहीं था। इसके बाद वाहन को वहीं से सीज (जब्त) कर लिया गया। प्राइवेट कार को बना लिया टैक्सी नियमों का उल्लंघन की शिकायत मिलने पर परिवहन विभाग की टीम ने टैक्सी बुक कर निजी नंबर प्लेट के वाहनों को उपयोग करते पाए जाने पर कार्रवाई की गई। आरटीओ प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि एयरपोर्ट एवं उसके आसपास के क्षेत्र में लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ निजी वाहन ड्राइवर बिना परमिट और पंजीकरण के टैक्सी सेवाएं दे रहे हैं। यह वाहन तय नियमों का उल्लंघन कर रहे थे, इसलिए उनको जब्त किया गया। टैक्सी गाड़ियों में फिटनेस जरूरी निजी कारों का टैक्सी के रूप में उपयोग परमिट बनाने के बाद ही किया जा सकता है। इन कारों का फिटनेस भी बनता है, ताकि यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। दस साल से पुरानी कार को टैक्सी परमिट नहीं दिया जाता है। वहीं स्पीड गवर्नर, पैनिक बटन भी अनिवार्य होता है। इंदौर शहर के सुगम, सुरक्षित, सुखद यातायात के लिए नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक लाने के उद्देश्य से नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई भी की जा रही है। इसी कड़ी में यातायात पुलिस के सूबेदार अमित कुमार यादव व टीम तेजाजी नगर क्षेत्र में यातायात प्रबंधन कर रहे थे। इस दौरान अनधिकृत हूटर लगे वाहनों की जांच भी की गई। तीन वाहनों पर हूटर लगा होने पर रोका गया। परीक्षण करने पर अनधिकृत हूटर लगा होने के लिए तीन-तीन हजार का जुर्माना कर हूटर उतरवाया गया। यातायात नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई। पुलिस उपायुक्त यातायात प्रबंधन अरविंद तिवारी के दिशा-निर्देशन में यातायात प्रबंधन पुलिस द्वारा सघन यातायात जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आप क्या करें यदि आपके पास टैक्सी या कमर्शियल वाहन है? इंदौर में RTO की यह कार्रवाई साफ तौर पर यह संदेश देती है कि अब लापरवाह टैक्सी ऑपरेटरों के लिए “नो टॉलरेंस पॉलिसी” लागू हो गई है। ऐसे मामलों में विभाग सख्त रुख अपनाएगा और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। अगर आप टैक्सी या कमर्शियल गाड़ी चला रहे हैं, तो आज ही अपने सभी दस्तावेज जांच लें, क्योंकि अगली बुकिंग RTO की हो सकती है! इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में भारी बारिश का यलो अलर्ट, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

Indore Weather Updait: इंदौर, 26 जून 2025 – मौसम विभाग ने इंदौर और आसपास के इलाकों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। चेतावनी में कहा गया है कि आज दीर्घावधि बादल और मॉनसून की सक्रियता के चलते मध्यम स्तर की बारिश होगी, साथ ही बिजली और तेज हवाओं की संभावना भी बनी रहेगी । पिछले 24 घंटों में पूर्वी इंदौर में 15.5 मिमी और पश्चिमी भाग में 1 मिमी बारिश दर्ज हुई महत्वपूर्ण राहत मिली है इस सप्ताह, इंदौर का तापमान लगभग 4–6°C नीचे दर्ज किया जा रहा है—अधिकतम रीडिंग 28–29°C के आसपास और न्यूनतम 23–24°C बनी हुई है । इंदौर में आज भारी बारिश के आसार हैं, मौसम विभाग ने इसके लिए यलो अलर्ट जारी किया है। शहर में गरज-चमक के साथ भारी वर्षा हो सकती है और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवा चल सकती है। विभाग के अनुसार, वर्तमान में उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश पर ऊपरी हवा का चक्रवात और बंगाल की खाड़ी पर एक चक्रवात सक्रिय है। परिस्थिति और अगले चार दिन का पूर्वानुमान मौसम विज्ञानियों के अनुसार, आज से लेकर आगामी शनिवार तक इंदौर में मानसून की सक्रियता बनी रहेगी। अगले 4–7 दिनों में हल्की से मध्यम बारिश, आंशिक बादल, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी रहेगा । विशेष दिन-wise पूर्वानुमान है: 27 जून के बाद बारिश में आएगी कमी वहीं अरब सागर से एक द्रोणिका उत्तर-पूर्व मप्र की ओर जा रही है। ऐसे में अरब सागर से आ रही नमी के कारण इंदौर में अभी मध्यम से भारी वर्षा की स्थितियां दिखाई दे रही हैं। गुरुवार को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनेगा। इस वजह से बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी पर रोक लगेगी। ऐसे में 27 जून को शहर में मध्यम बारिश होगी और इसके बाद बारिश में कमी आएग क्या जोखिम है – तैयारी आवश्यक संभावित चुनौतियों पर नजर अपनी सुरक्षा के लिए उठाएं ये कदम सावधान रहें, सुरक्षित रहें मौसम की यह सक्रियता किसानों के लिए फायदेमंद है, लेकिन शहरवासियों के लिए यह चुनौतियाँ भी ला सकता है—खासकर ट्रैफिक और स्वास्थ्य के संदर्भ में।इसलिए आवश्यकता है कि हम सभी योजना और समय की निगरानी के साथ सतर्क रहें, बारिश से उत्पन्न जोखिमों को नियंत्रित करें। बारिश जारी है, लेकिन सावधानी के साथ आप शिविर में सुरक्षित रह सकते हैं। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में अब सिर्फ ऑनलाइन PUC सर्टिफिकेट ही मान्य

Best Indore News: जून 2025 – इंदौर में अब वाहन चालकों को अपने प्रदूषण नियंत्रण (Pollution Under Control – PUC) प्रमाणपत्र को लेकर नई व्यवस्था के अनुसार चलना होगा। परिवहन विभाग और नगर प्रशासन ने मिलकर निर्णय लिया है कि अब से केवल ऑनलाइन जारी किए गए PUC सर्टिफिकेट ही वैध माने जाएंगे, जबकि ऑफलाइन या मैनुअल प्रमाणपत्रों को पूरी तरह से अमान्य घोषित कर दिया गया है। यह निर्णय बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण, फर्जी सर्टिफिकेट की बढ़ती संख्या और ट्रैकिंग की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। क्या है PUC सर्टिफिकेट? PUC सर्टिफिकेट यह प्रमाणित करता है कि वाहन से निकलने वाला धुआं और गैसें तय सीमा के भीतर हैं और वह वाहन पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है। भारत सरकार द्वारा यह नियम केंद्रीय मोटर व्हीकल नियम 1989 के अंतर्गत लागू किया गया है और हर वाहन के लिए यह सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है। क्यों हुआ यह बदलाव? इंदौर आरटीओ और परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शहर में बड़ी संख्या में वाहन मालिक अब भी फर्जी या मैनुअल प्रमाणपत्र बनवा कर चल रहे हैं। यह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि शहर की वायु गुणवत्ता को भी नुकसान पहुंचा रहा है। आरटीओ इंदौर के अधिकारी शिवराज पटेल के अनुसार: “अब शहर में PUC सर्टिफिकेट केवल ऑनलाइन ही मान्य होंगे। यह कदम पारदर्शिता, सटीकता और डेटा ट्रैकिंग की सुविधा के लिए लिया गया है।” ऑनलाइन सर्टिफिकेट कैसे प्राप्त करें? अब वाहन मालिकों को अपने नजदीकी प्रमाणित PUC केंद्र पर जाकर वाहन की जांच करवानी होगी, और वहां से ऑनलाइन PUC प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इसे वाहन पोर्टल पर भी देखा और डाउनलोड किया जा सकता है। प्रक्रिया: ऑफलाइन सर्टिफिकेट रखने वालों को चेतावनी परिवहन विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऑफलाइन सर्टिफिकेट अब अवैध माने जाएंगे। किसी भी चेकिंग में अगर वाहन चालक के पास ऑफलाइन या मैनुअल प्रमाणपत्र पाया गया तो उस पर ₹1000 से ₹5000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इस नियम का उल्लंघन करने पर वाहन जब्त तक किया जा सकता है। इस फैसले के पीछे की पर्यावरणीय चिंता इंदौर, जो पहले ही देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध है, अब वायु प्रदूषण को भी नियंत्रित करने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है। शहर में प्रति दिन लाखों वाहनों का आवागमन होता है, जिनमें से कई प्रदूषण मानकों पर खरे नहीं उतरते। शहर की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को स्थिर बनाए रखने और नागरिकों को स्वस्थ पर्यावरण देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। डेटा ट्रैकिंग और निगरानी होगी आसान ऑनलाइन सर्टिफिकेट से अब प्रशासन को यह जानना आसान होगा कि कौन-से वाहन समय पर पीयूसी करवा रहे हैं और कौन नहीं। साथ ही, यह सिस्टम वाहनों की नियमित निगरानी, धोखाधड़ी रोकने, और बड़े पैमाने पर डेटा एनालिसिस में मददगार होगा। पर्यावरण विभाग के अफसरों ने भी इसे स्मार्ट ट्रैकिंग के लिए एक जरूरी कदम बताया है। टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर चालकों पर होगा असर इंदौर में लगभग 70% वाहन दोपहिया और ऑटो रिक्शा हैं। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं, खासकर पुराने वाहनों से, प्रदूषण का बड़ा कारण बनता है। इसलिए प्रशासन की नजर अब टू-व्हीलर्स पर भी विशेष रूप से है। कब से लागू होगा यह नियम? यह नियम 1 जुलाई 2025 से पूरे इंदौर जिले में प्रभावी होगा। PUC केंद्रों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे मैनुअल प्रमाणपत्र जारी न करें, और पूरी तरह से ऑनलाइन प्रणाली को अपनाएं। PUC केंद्रों की सूची और शुल्क इंदौर में वर्तमान में 150+ प्रमाणित पीयूसी सेंटर हैं, जिनकी सूची परिवहन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। दोपहिया वाहनों के लिए औसतन शुल्क ₹50 और चार पहिया डीजल वाहनों के लिए ₹100 तक है। जनता से अपील प्रशासन ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे समय पर PUC जांच करवाएं, फर्जी सर्टिफिकेट से बचें और ऑनलाइन सर्टिफिकेट ही प्राप्त करें। इस पहल से न केवल प्रदूषण पर अंकुश लगेगा बल्कि नागरिकों को भी सड़क पर परेशानी नहीं होगी। इंदौर नगर प्रशासन और परिवहन विभाग का यह निर्णय भविष्य की दृष्टि से अत्यंत सराहनीय है। जहां एक ओर यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम है, वहीं दूसरी ओर वाहन चालकों के लिए भी डिजिटल ट्रैकिंग और कानूनी रूप से सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करता है। अगर हर वाहन मालिक समय पर सही तरीके से PUC सर्टिफिकेट लेगा, तो इंदौर न केवल स्वच्छता में नंबर 1 बना रहेगा, बल्कि वायु गुणवत्ता के मामले में भी देश में उदाहरण बनेगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
नगर निगम का बड़ा फैसला: संपत्ति कर में बढ़ोतरी, बदले रेट जोन और स्लैब

Best Indore News: इंदौर नगर निगम (IMC) ने शहरवासियों के लिए संपत्ति कर (Property Tax) से जुड़ी एक अहम घोषणा की है, जिससे हजारों नागरिकों पर सीधा असर पड़ेगा। निगम ने रेट जोन (Rate Zone) की सीमा और संपत्ति कर स्लैब में व्यापक बदलाव करते हुए वार्षिक किराया मूल्य (Annual Rental Value) को भी संशोधित कर दिया है। इस बदलाव के कारण कई क्षेत्रों में लोगों का कर भार दो से तीन गुना तक बढ़ सकता है। इस निर्णय को निगम प्रशासन ने राजस्व वृद्धि और शहर की स्मार्ट सिटी रैंकिंग में सुधार के लक्ष्य से जोड़ा है, लेकिन आम नागरिकों और व्यापारियों में इसे लेकर चिंता और आक्रोश दोनों ही दिखाई दे रहा है। क्या है रेट जोन और क्यों हुआ बदलाव? नगर निगम शहर को विभिन्न रेट जोन में बांटता है – जैसे कि प्राइम लोकेशन, कमर्शियल जोन, रेसिडेंशियल जोन आदि। इन जोनों के आधार पर संपत्ति कर की गणना होती है। अबकी बार निगम ने लगभग 60% इलाकों की श्रेणी में बदलाव कर उन्हें ऊंची श्रेणी में कर दिया है। उदाहरण के लिए: किराया मूल्य में हुआ इजाफा निगम ने संपत्ति कर की गणना में उपयोग किए जाने वाले वार्षिक किराया मूल्य (ARV) को नए तरीके से निर्धारित किया है। पुराना किराया मूल्य – ₹12 प्रति वर्गफुट (आवासीय)नया किराया मूल्य – ₹30-40 प्रति वर्गफुट (क्षेत्र विशेष के अनुसार) इसका असर यह होगा किजिनका पहले सालाना संपत्ति कर ₹3,000 था, अब उन्हें ₹7,000 से ₹10,000 तक देना पड़ सकता है। कमर्शियल प्रॉपर्टी पर पड़ेगा सीधा असर नया नियम खासकर दुकानदारों, ऑफिस बिल्डिंग्स और कमर्शियल हब्स पर ज्यादा असर डालेगा। रेसिडेंशियल जोनों में भी बढ़ोतरी हुई है लेकिन व्यापारिक संपत्तियों पर टैक्स भार तीन गुना तक बढ़ेगा। नगर निगम का तर्क: राजस्व सुधार और विकास जरूरी नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि: “पिछले पांच वर्षों से संपत्ति कर में कोई वृद्धि नहीं की गई थी, जबकि शहर की आबादी, सेवाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर लागत लगातार बढ़ रही है। इस बदलाव से लगभग ₹200 करोड़ अतिरिक्त राजस्व मिलेगा जिससे नागरिक सुविधाएं बेहतर की जा सकेंगी।” निगमायुक्त ने कहा कि ये राशि पेयजल, सफाई, सीवरेज और सड़क विकास में लगाई जाएगी। नागरिकों का विरोध और असंतोष इन बदलावों के खिलाफ आमजन में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में RWA (Resident Welfare Association) ने विरोध जताया है। अनामिका जैन (सुदामा नगर निवासी) कहती हैं: “हम पहले ही महंगाई से परेशान हैं, अब टैक्स भी तीन गुना कर दिया गया। नगर निगम ने हमसे पूछे बिना फैसला क्यों लिया?” इंदौर व्यापार महासंघ ने भी कहा है कि: “यह फैसला छोटे व्यापारियों को खत्म कर देगा। हम इसे न्यायालय में चुनौती देंगे।” संपत्ति कर की नई स्लैब दरें (उदाहरण) जोन प्रकार पुराना टैक्स नया टैक्स (संभावित) ZONE-C आवासीय ₹2,500 ₹5,000 ZONE-B दुकान ₹7,000 ₹14,000 ZONE-A ऑफिस ₹10,000 ₹28,000 नोट: वास्तविक दरें क्षेत्र और वर्गफुटेज पर आधारित होती हैं। टैक्स पेमेंट की नई व्यवस्था निगम ने यह भी घोषणा की है कि कर भुगतान के लिए ऑनलाइन पेमेंट पोर्टल को अपग्रेड किया गया है। इसके अंतर्गत: रियायत और सुझाव आमंत्रण का आश्वासन हालांकि विरोध के बाद नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि: कर बोझ या विकास का आधार? इंदौर में रेट जोन और किराया मूल्य में बदलाव नगर निगम की विकास-नीति का हिस्सा है। लेकिन जब तक इसकी सही तरीके से सामाजिक और आर्थिक वर्गों पर विवेचना नहीं होगी, तब तक यह निर्णय भारी विवाद का कारण बन सकता है। आम नागरिकों और व्यापारियों की राय, राहत योजना और पारदर्शिता के साथ लागू की गई व्यवस्था ही इस फैसले को स्वीकार्य बना सकती है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में गंदे पानी पर नगर निगम का सख्त एक्शन:

Best Indore News: इंदौर नगर निगम अब शहर में मिल रहे गंदे पानी को लेकर पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार कई कॉलोनियों और वार्डों से पीने के पानी में गंदगी, बदबू, और मटमैले रंग की शिकायतें मिल रही थीं, जिससे आम जनता बेहद परेशान थी। अब इस पर निगमायुक्त हरीश राठौड़ ने सख्त रुख अपनाते हुए जलप्रदाय विभाग और जोन अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि “अब किसी भी क्षेत्र से गंदे पानी की शिकायत नहीं आनी चाहिए।” शिकायतों का सिलसिला और जनता की नाराज़गी पिछले महीने इंदौर के कई क्षेत्रों – जैसे राजेंद्र नगर, माणिकबाग, सिलिकॉन सिटी, खजराना, मालवा मिल, और सुदामा नगर – से गंदे पानी की शिकायतें दर्ज की गईं। लोगों ने बताया कि पानी में बदबू आ रही है, उसमें कीड़े हैं या वह नहाने तक लायक नहीं है। कुछ जगहों पर यह पानी पीने से डायरिया और स्किन एलर्जी जैसी बीमारियों की भी खबरें आईं। स्थानीय निवासी भावना तिवारी (वार्ड 36) का कहना है – “पिछले 5 दिनों से लगातार पीले रंग का पानी आ रहा है। इसे पीना तो दूर, कपड़े धोने पर भी बदबू आती है।” निगमायुक्त ने की सख्त बैठक इन बढ़ती शिकायतों के बीच निगमायुक्त हरीश राठौड़ ने सोमवार को नगर निगम मुख्यालय में सभी 19 जोन के ज़ोनल अफसरों, जलप्रदाय अभियंताओं और सुपरवाइज़रों के साथ आपात बैठक की। उन्होंने कहा कि: “हर शिकायत का समाधान 24 घंटे के भीतर किया जाए। जो अधिकारी कार्य में लापरवाही करेगा, उस पर वेतन रोक और निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने ये भी निर्देश दिए कि: जड़ में है पाइपलाइन का जाल और पुरानी व्यवस्था नगर निगम के जलप्रदाय विभाग के अनुसार, शहर में लगभग 2600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन फैली है। इनमें से कई लाइनें 25 वर्ष से भी पुरानी हैं, जो अब जंग खा चुकी हैं और उनमें सीवेज का रिसाव हो रहा है। नई कॉलोनियों को जोड़ने के चक्कर में कई पुरानी लाइनों पर दबाव भी बढ़ा है। नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार: “जहां भी गंदा पानी आ रहा है, वहां पाइपलाइन या तो लीकेज है या सीवेज पाइप से क्रॉस-कनेक्शन हो चुका है।” डिजिटल शिकायत प्रणाली होगी मजबूत निगमायुक्त ने IMC ऐप और 311 हेल्पलाइन पर दर्ज हो रही शिकायतों का भी विश्लेषण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि: जल गुणवत्ता परीक्षण के निर्देश हर जोन में जल गुणवत्ता परीक्षण यूनिट को एक्टिव कर दिया गया है। निगम ने 50 से अधिक नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है, ताकि पता चले कि किस इलाके का पानी पीने लायक है और कहां खतरे की आशंका है। टैंकर व्यवस्था और वैकल्पिक आपूर्ति जहां गंदा पानी लगातार आ रहा है, वहां तत्काल प्रभाव से टैंकरों से शुद्ध पानी की सप्लाई की जा रही है। साथ ही, नगर निगम 15 नए हाई-प्रेशर वाटर टैंकर भी किराए पर ले रहा है। निगमायुक्त की अपील: जनता का सहयोग जरूरी अपने संदेश में निगमायुक्त हरीश राठौड़ ने नागरिकों से अपील की कि वे: स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट पर नगर निगम ने स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट कर दिया है। नगर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों – जैसे एमवाय, बॉम्बे हॉस्पिटल और ग्रेटर कैलाश – में जलजनित बीमारियों की रिपोर्टिंग की समीक्षा की जा रही है। डॉक्टरों ने भी लोगों से उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी है। अब उम्मीदें जागीं, लेकिन इंतज़ार है कार्रवाई का इंदौर नगर निगम द्वारा गंदे पानी को लेकर लिया गया यह एक्शन आम जनता के लिए राहत का संकेत है। हालांकि यह देखना बाकी है कि केवल निर्देश और चेतावनी से हालात सुधरते हैं या वास्तविक सुधार कार्य भी ज़मीन पर दिखेंगे। शहरवासी अब यह देखना चाहते हैं कि “शब्दों से आगे बढ़कर निगम कितनी तेजी से पानी की व्यवस्था को दुरुस्त करता है।” इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर समेत 16 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट

MP weather Updait: मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी रफ्तार में है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के 16 से अधिक जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, देवास, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, विदिशा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। मौसम विभाग के मुताबिक यह स्थिति आगामी चार दिनों तक बनी रह सकती है, इसलिए सभी को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। क्या कहता है मौसम विभाग का अलर्ट? IMD के अनुसार, गुजरात और राजस्थान की सीमा पर बना एक ऊपरी हवा का चक्रवात अब मध्य प्रदेश की ओर तेजी से प्रभाव डाल रहा है। इस सिस्टम के चलते अरब सागर से आने वाली नमी की वजह से राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने 25 जून से 28 जून तक “येलो” और “ऑरेंज अलर्ट” जारी किया है। इंदौर और भोपाल की बारिश से जीवन प्रभावित भोपाल में सोमवार को दिनभर बादल छाए रहे और शाम को रुक-रुककर तेज बौछारें पड़ीं। कुछ इलाकों में जलभराव हो गया। अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई जिससे उमस तो घटी लेकिन लोगों को निकलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इंदौर में मंगलवार सुबह से लगातार रिमझिम बारिश का दौर जारी रहा। शहर के कई निचले इलाके जलभराव से प्रभावित हुए। एमजी रोड, पलासिया, विजय नगर जैसे क्षेत्रों में ट्रैफिक स्लो हो गया और स्कूली बच्चों को परेशानी हुई। किन जिलों में है अलर्ट? अलर्ट श्रेणी जिलों के नाम ऑरेंज अलर्ट भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, देवास, उज्जैन येलो अलर्ट विदिशा, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, धार, अशोकनगर, सीहोर, नीमच ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने की आशंका है, इसलिए खेतों और खुले स्थानों में न जाने की सलाह दी गई है। आगामी मौसम पूर्वानुमान बुधवार से शनिवार तक:राज्य के अधिकांश भागों में हल्की से भारी बारिश, दिन में बादल, रात्रि में बूंदाबांदी, और कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। क्या है प्रभाव? किसानों के लिए विशेष सलाह सावधानी और सुझाव मध्य प्रदेश में मानसून ने दस्तक दे दी है और अब यह धीरे-धीरे पूरे राज्य को भिगो रहा है। बारिश जहां किसानों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं शहरवासियों को इससे सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन लगातार अलर्ट जारी कर रहा है, ऐसे में हमें भी सजग और सुरक्षित रहना चाहिए।