इंदौर में कोरोना से फिर बढ़ी चिंता: 3 दिन में तीसरी महिला की मौत, सभी को थीं गंभीर बीमारियां

कोरोना की छाया एक बार फिर इंदौर पर, स्वास्थ्य विभाग सतर्क Best Indore News: इंदौर से आई ताज़ा रिपोर्ट ने एक बार फिर शहरवासियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। पिछले तीन दिनों में कोरोना वायरस (COVID-19) संक्रमण से तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है। सोमवार को एक और 60 वर्षीय महिला की मौत होने के बाद स्वास्थ्य महकमा एक बार फिर सतर्क मुद्रा में आ गया है। इंदौर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. बी.एस. सैनी ने बताया कि तीनों महिलाएं पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित थीं, और कोरोना संक्रमण ने उनकी स्थिति को और जटिल बना दिया। तीसरी महिला की मौत – क्या है पूरा मामला? स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह 60 वर्षीय महिला, जो पहले से डायबिटीज और किडनी की बीमारी से पीड़ित थीं, को बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में कोरोना पॉजिटिव पाई गईं और उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इससे पहले शनिवार और रविवार को दो अन्य महिलाओं की भी मौत हो चुकी है, जो 55 और 70 वर्ष की थीं। इन दोनों को भी पहले से हृदय रोग, अस्थमा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं थीं। क्या इंदौर में फिर बढ़ रहा है कोरोना? जनवरी से अब तक इंदौर में लगभग 200 कोरोना पॉजिटिव केस दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश मरीज होम आइसोलेशन में ठीक हो गए हैं। लेकिन बीते एक सप्ताह में पॉजिटिव केसों में धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा रही है। अब तक की स्थिति: CMHO डॉ. सैनी के अनुसार, “फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। जिन लोगों को पहले से बीमारियां हैं, वे विशेष रूप से सतर्क रहें।” कौन से वेरिएंट की आशंका? अभी तक किसी भी केस में कोविड के नए वेरिएंट (Variant of Concern) की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भोपाल भेजे हैं ताकि वायरस के म्यूटेशन की पहचान की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के नए वेरिएंट आमतौर पर तेज़ी से फैलते हैं लेकिन घातक नहीं होते, लेकिन यदि मरीज को पहले से बीमारी है, तो संक्रमण खतरनाक हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग की तैयारी स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया है। जिन मरीजों को बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, थकान, या बदन दर्द की शिकायत है, उन्हें तत्काल कोविड टेस्ट कराने की सलाह दी गई है। निर्देश: बुजुर्ग और बीमार लोगों के लिए विशेष सावधानी स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब कोरोना एक स्थायी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, लेकिन इससे निपटने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय है। “जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट या किडनी की बीमारी है, वे किसी भी संक्रमण को हल्के में न लें और डॉक्टर से संपर्क करें।” – डॉ. सैनी, CMHO विशेषज्ञों की राय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि: जनता के लिए आवश्यक सुझाव स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे कोविड को हल्के में न लें और निम्नलिखित एहतियात बरतें: इंदौर में तीन दिनों में कोरोना से तीन महिलाओं की मौत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि यह संक्रमण अब भी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। हालांकि आम लोगों में घबराने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन सावधानी, समय पर जांच और सतर्कता ही इसका सही समाधान है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर-सिवनी पेंचवैली एक्सप्रेस अब नैनपुर तक: 14 जुलाई से मिलेगा यात्रियों को बड़ा फायदा, इंदौर-दरभंगा सुपरफास्ट ट्रेन की मांग फिर तेज़

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी, पेंचवैली एक्सप्रेस का विस्तार Best Indore News: इंदौर से चलने वाली लोकप्रिय पेंचवैली एक्सप्रेस को अब यात्रियों की मांग को देखते हुए सिवनी से आगे नैनपुर तक बढ़ा दिया गया है। यह नई सुविधा 14 जुलाई 2025 से शुरू की जाएगी। पश्चिम मध्य रेलवे के निर्णय से मालवा और महाकौशल क्षेत्र के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा। रेलवे के इस फैसले से न केवल सिवनी, बालाघाट और नैनपुर जैसे छोटे शहरों को फायदा मिलेगा, बल्कि इंदौर के यात्रियों को भी सीधे नैनपुर जैसे वनवर्ती इलाकों तक की सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। विस्तार का शेड्यूल और ट्रेन संख्या इंदौर से चलने वाली यह ट्रेन अब रोज़ाना नैनपुर तक जाएगी। ट्रेन संख्या और समय सारणी में भी आंशिक परिवर्तन किया गया है। नई समय-सारणी: रेलवे ने बताया कि रेल मार्ग की तकनीकी जांच और स्टॉपेज टाइमिंग के अनुसार कुछ बदलाव हो सकते हैं, जिसकी जानकारी पहले से दी जाएगी। नैनपुर: मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन नैनपुर स्टेशन कभी एशिया का सबसे बड़ा नैरोगेज जंक्शन हुआ करता था। हाल के वर्षों में इसका ब्रॉडगेज में परिवर्तन हुआ है। यहां तक सीधी ट्रेन चलने से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आवागमन में बहुत सुधार होगा। प्रमुख लाभ: यात्रियों की मांग: इंदौर-दरभंगा सुपरफास्ट ट्रेन फिर चर्चा में जहां एक ओर पेंचवैली एक्सप्रेस के विस्तार से रेल यात्रियों को राहत मिली है, वहीं इंदौर से दरभंगा के बीच चलने वाली सुपरफास्ट ट्रेन की पुरानी मांग फिर से जोर पकड़ रही है। इंदौर और आसपास के इलाकों में बिहार और झारखंड से आने वाले हजारों लोग कामकाज और शिक्षा के लिए रहते हैं। “त्योहारों में टिकट मिलना मुश्किल होता है। सुपरफास्ट ट्रेन की सुविधा मिलने से हम घर जल्दी पहुंच सकते हैं।” – आकाश यादव, बिहार निवासी और इंदौर में काम करने वाले युवा क्या है मांग की पृष्ठभूमि? पूर्व में रेलवे ने इंदौर से दरभंगा के लिए गर्मी और त्योहार विशेष ट्रेनें चलाई थीं, जो अत्यधिक भीड़ के बावजूद भी नियमित सेवा में नहीं बदली गईं। यात्रियों और सामाजिक संगठनों ने कई बार ज्ञापन और जन-आंदोलन के जरिए इस मांग को दोहराया है। मुख्य तर्क: रेलवे का पक्ष रेलवे अधिकारियों का कहना है कि नई ट्रेनों के संचालन के लिए ट्रैक क्षमता, समय स्लॉट और यात्री मांग का विश्लेषण किया जाता है। “हम यात्रियों की मांगों को गंभीरता से लेते हैं। इंदौर-दरभंगा रूट पर प्रस्ताव विचाराधीन है। तकनीकी और व्यावसायिक अध्ययन के बाद निर्णय लिया जाएगा।” – पश्चिम रेलवे अधिकारी यात्रियों की बढ़ती संख्या का दबाव इंदौर रेलवे स्टेशन पर पिछले कुछ वर्षों में प्रति दिन यात्रियों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है। विशेषकर त्योहारी मौसम में प्लेटफार्म पर भारी भीड़ होती है। इसलिए नए रूट्स और ट्रेन सेवाओं की आवश्यकता समय की मांग बन चुकी है। राजनीतिक और सामाजिक संगठन भी हुए सक्रिय कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी रेलवे बोर्ड से अनुरोध किया है कि इंदौर-दरभंगा रूट पर नियमित ट्रेन चलाई जाए। यह रूट उत्तर भारत और मध्य भारत के सामाजिक व आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा। पेंचवैली एक्सप्रेस का नैनपुर तक विस्तार मध्य प्रदेश के दूरवर्ती इलाकों को इंदौर से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे आम यात्रियों, पर्यटकों और व्यापारियों को सुविधा मिलेगी। साथ ही, इंदौर-दरभंगा सुपरफास्ट ट्रेन की मांग अब और भी मजबूती से उठ रही है, जिसे रेलवे को गंभीरता से लेना चाहिए। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में सांप्रदायिक टिप्पणी से तनाव: युवक ने सोशल मीडिया पर ‘गर्दन उतारने’ की धमकी दी, FIR दर्ज; हिंदू संगठन में रोष

सोशल मीडिया पर भड़काऊ टिप्पणी से फैला विवाद Best Indore News: इंदौर शहर एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव का केंद्र बन गया है, जहां एक युवक द्वारा सोशल मीडिया पर ‘गर्दन उतारने’ जैसी हिंसक धमकी देने से हड़कंप मच गया। मामला तब शुरू हुआ जब शहर के ‘धोबीघाट’ क्षेत्र को लेकर ‘यह हमारा है’ जैसे नारों पर विवाद उत्पन्न हुआ। हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक ने जब इस मुद्दे पर बयान दिया, तो संबंधित युवक ने उन्हें सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकी दी। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। क्या है पूरा मामला? घटना की शुरुआत धोबीघाट क्षेत्र में एक धार्मिक आयोजन और उससे जुड़े स्थान को ‘हमारा है’ कहे जाने वाले नारे से हुई, जिसे एक समुदाय ने अपनी अस्मिता से जोड़ लिया। हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक श्री संजय यादव ने जब मंच से इस पर विरोध जताया और कहा कि “धोबीघाट शहर का सार्वजनिक स्थान है, किसी एक समुदाय का नहीं”, तो जवाब में एक युवक ने फेसबुक पर आक्रामक पोस्ट करते हुए लिखा — ‘गर्दन उतार दूंगा’”। धमकी के बाद भड़की भावनाएं सोशल मीडिया पर यह कमेंट आते ही सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई। कई हिंदू संगठनों ने इसे सीधी धमकी और कट्टरपंथी मानसिकता का उदाहरण बताया। “यह केवल एक व्यक्ति की धमकी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। अगर हम अभी नहीं जागे, तो ऐसे लोग माहौल बिगाड़ते रहेंगे।” – संजय यादव, जिला संयोजक, हिंदू जागरण मंच FIR दर्ज, पुलिस ने लिया मामला संज्ञान में घटना की जानकारी मिलते ही चंदन नगर थाना पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ आईटी एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट से स्क्रीनशॉट एकत्र कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है। दर्ज धाराएं: “हम मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।” – थाना प्रभारी हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन इस मामले को लेकर मंगलवार को हिंदू जागरण मंच, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद सहित कई संगठनों ने संयुक्त रूप से चंदन नगर थाने का घेराव किया और ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पुलिस से शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की। “हम ऐसे किसी भी मानसिकता को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो समाज में भय और असुरक्षा फैलाने का प्रयास करती है।” – अभिषेक राठौर, बजरंग दल सोशल मीडिया पर बहस यह मामला फेसबुक और ट्विटर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक वर्ग इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे देश की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक मानसिकता करार दे रहा है। कुछ प्रतिक्रियाएं: प्रशासन की अपील: शांति बनाए रखें घटना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि कानून को अपने तरीके से कार्य करने दिया जाए। “इंदौर की गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। किसी भी उकसावे में आकर कोई कदम न उठाएं।” – एडीएम इंदौर सांप्रदायिक मामलों पर सख्ती ज़रूरी भारत जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता वाले देश में इस तरह की घटनाएं सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए ऐसी घटनाओं पर कानून और प्रशासन को जल्द और निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे। इंदौर की यह घटना सिर्फ एक धमकी का मामला नहीं, बल्कि यह बताती है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कैसे साम्प्रदायिक सौहार्द को खतरे में डाल सकता है। अब समय है कि समाज, प्रशासन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तीनों मिलकर ऐसी घटनाओं पर नकेल कसें। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर नगर निगम के 22 जोनों में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन: टैक्स वृद्धि के खिलाफ उठाई आवाज, कहा- जनता पर डाला जा रहा आर्थिक बोझ

इंदौर शहर में टैक्स बढ़ोत्तरी के विरोध में कांग्रेस का आंदोलन तेज Best Indore News: इंदौर शहर में नगर निगम द्वारा संपत्ति कर, जल कर, सफाई शुल्क और अन्य सेवाओं के शुल्क में की गई अचानक और अप्रत्याशित वृद्धि के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सोमवार को शहर के सभी 22 जोनों में एक साथ पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय नेता सड़कों पर उतरे और निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं ने इस कदम को “जनता के साथ अन्याय” बताया और कहा कि नगर निगम आर्थिक कुशासन और लापरवाह योजनाओं का बोझ अब सीधे आम नागरिकों पर डाल रहा है। क्या है टैक्स वृद्धि का मामला? नगर निगम इंदौर ने हाल ही में शहरवासियों के लिए संपत्ति कर (Property Tax), जल कर (Water Tax), सफाई शुल्क, और अन्य उपयोगिताओं में 15% से लेकर 30% तक की वृद्धि की है। निगम का तर्क है कि बढ़ती लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए यह आवश्यक है, लेकिन कांग्रेस और आम जनता इसे अनुचित और समय के विपरीत निर्णय मान रहे हैं। वृद्धि के प्रमुख बिंदु: क्या कहा कांग्रेस नेताओं ने? प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष चंद्रकुमार काले ने कहा: “यह टैक्स वृद्धि नहीं, जनता के जले पर नमक छिड़कना है। जब आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी और मंदी से जूझ रहा है, तब नगर निगम टैक्स बढ़ाकर उनके जीवन को और कठिन बना रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निगम द्वारा इस निर्णय से पहले जनता से कोई राय या परामर्श नहीं लिया गया, जो कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। प्रदर्शन की तस्वीरें – शहर भर में एक जैसा आक्रोश कांग्रेस ने शहर के सभी 22 जोनों में एक साथ प्रदर्शन किया। प्रत्येक जोन कार्यालय पर पार्टी के कार्यकर्ता पहुंचे और मुख्य द्वार के सामने धरना दिया, निगम आयुक्त और जोन अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया। प्रमुख जोन जहां प्रदर्शन हुआ: आम जनता की प्रतिक्रिया स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन को समर्थन दिया और कहा कि टैक्स वृद्धि ने उनके बजट को बिगाड़ दिया है। नगर निगम का पक्ष हालांकि नगर निगम प्रशासन ने अभी तक प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पूर्व में निगम आयुक्त ने कहा था: “शहर के विकास और बेहतर सेवाओं के लिए संसाधन जुटाना जरूरी है। टैक्स में वृद्धि नागरिक सुविधाओं को और सुदृढ़ करने के लिए की गई है।” लेकिन इस कथन को विपक्ष ने सिरे से नकारते हुए इसे जनविरोधी निर्णय करार दिया है। राजनीतिक समीकरण और आगामी रणनीति कांग्रेस ने साफ किया है कि अगर निगम प्रशासन इस टैक्स वृद्धि को वापस नहीं लेता तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी तेज किया जाएगा। पार्टी ने चेतावनी दी कि वे पूरे शहर में हस्ताक्षर अभियान, जनजागरण यात्राएं और नगर निगम मुख्यालय का घेराव भी करेंगे। “हम इसे सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं रखेंगे, यह अब जनता की लड़ाई है।” — राजेश यादव, युवा कांग्रेस अध्यक्ष इंदौर में टैक्स वृद्धि के मुद्दे ने जनता और राजनीति दोनों को झकझोर दिया है। जहां एक ओर नगर निगम अपनी वित्तीय मजबूरियों का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर आम जनता इसे एक अनुचित आर्थिक भार के रूप में देख रही है। कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन इस ओर संकेत करता है कि आने वाले समय में यह मुद्दा केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित न रहकर राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है, खासकर जब नगर निगम चुनाव निकट हों। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में मानवता शर्मसार: युवक ने स्ट्रीट डॉग और उसके बच्चों को बेरहमी से पीटा, दो की मौत

इंसानियत हुई शर्मसार, मासूम पशुओं पर बेरहमी की हद Best Indore News इंदौर शहर में एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। एक युवक ने सड़क पर रहने वाली एक मादा कुतिया और उसके नवजात बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट की। युवक ने उन्हें पहले डंडे से पीटा, फिर उन्हें बोरे में बंद कर बिजली के खंभे से बार-बार पटका, जिससे दो मासूम पिल्लों की मौत हो गई और अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। यह घटना केवल एक पशु क्रूरता का मामला नहीं, बल्कि समाज में गहराती संवेदनहीनता और मानसिक विकृति का उदाहरण है। घटना का वीडियो वायरल इस भयावह घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें आरोपी युवक को बोरे में बंद पिल्लों को बिजली के पोल से जोर-जोर से पटकते हुए देखा जा सकता है। आसपास के लोग चिल्ला रहे हैं, लेकिन आरोपी लगातार हिंसा करता रहा। वीडियो में क्या दिखा: आरोपी के खिलाफ केस दर्ज घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पशु प्रेमियों और NGO कार्यकर्ताओं ने पुलिस से संपर्क किया। कणाडिया थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम और IPC की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। “हमने आरोपी को चिन्हित कर लिया है, उसे जल्द हिरासत में लिया जाएगा। मामला गंभीर है और पुलिस कार्रवाई प्राथमिकता पर की जा रही है।” – थाना प्रभारी, कणाडिया कानूनी धाराएं जो लगाई गईं: घायल जानवरों का इलाज जारी घटना के तुरंत बाद स्थानीय एनिमल वेलफेयर संस्था “प्यूप्स एंड पaws” ने मौके पर पहुंचकर घायल पिल्लों और उनकी मां को नजदीकी पशु चिकित्सालय में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार दो पिल्लों की मौत घटनास्थल पर ही हो चुकी थी, जबकि तीन अन्य का इलाज चल रहा है। “हमने कई मामले देखे हैं, लेकिन इतनी बेरहमी बहुत ही दुर्लभ है। यह केवल क्रूरता नहीं, बल्कि मानसिक विकृति का संकेत है।” — एनजीओ सदस्य नागरिकों में आक्रोश, विरोध प्रदर्शन की तैयारी इस घटना के वायरल होते ही इंदौर के नागरिकों, पशु प्रेमियों और छात्रों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोग इस बात को लेकर खासे नाराज हैं कि कैसे कोई इंसान इतनी निर्दयता दिखा सकता है। पशु प्रेमियों की अपील पशु अधिकार संगठनों ने प्रशासन से पशु क्रूरता को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में लाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। “जानवरों को भी जीने का हक है। वे न बोल सकते हैं, न बचाव कर सकते हैं। उनके लिए हमें बोलना होगा।” – ऐश्वर्या पटेल, पशु अधिकार कार्यकर्ता क्या कहता है कानून? भारत में पशुओं की रक्षा के लिए कई कानूनी प्रावधान हैं, लेकिन इनकी प्रभावी क्रियान्वयन की कमी के चलते ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। प्रमुख कानून: फिर भी, अधिकांश मामलों में आरोपी जमानत पर छूट जाते हैं, और क्रूरता का चक्र चलता रहता है। इंदौर में स्ट्रीट डॉग और उसके नवजात बच्चों पर हुई क्रूरता केवल एक पशु हिंसा की घटना नहीं, बल्कि यह मानवता के पतन का संकेत है। समाज के रूप में यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम न सिर्फ इंसानों के, बल्कि जानवरों के अधिकारों की भी रक्षा करें। कानून को सख्त करना, जनजागरण बढ़ाना और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करना ही ऐसे घिनौने कृत्यों की रोकथाम का मार्ग है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार ने की आत्महत्या: पत्नी से विवाद के चलते तनाव में थे

पत्रकारिता की दुनिया में गूंजा शोक: पारिवारिक विवाद बना कारण Best Indore News इंदौर शहर से एक मर्मस्पर्शी और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कार्यरत युवा पत्रकार ने घरेलू विवाद के चलते आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी से पिछले कुछ समय से मनमुटाव चल रहा था, जिस कारण वह मानसिक रूप से बेहद तनाव में थे। कई बार उन्होंने सुलह की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी, तो उन्होंने अपना जीवन समाप्त करने का कठोर निर्णय ले लिया। मृतक पत्रकार की पहचान और पृष्ठभूमि मृतक पत्रकार की पहचान राहुल शर्मा (उम्र 32 वर्ष) के रूप में हुई है, जो इंदौर के एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल में रिपोर्टर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने बीते 7 वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपनी सेवाएं दीं और अपनी निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए पहचाने जाते थे। “राहुल बहुत मेहनती और शांत स्वभाव का था। उसकी मौत से पूरा पत्रकारिता जगत स्तब्ध है।” — सहकर्मी विवाद की वजह बना पारिवारिक मतभेद परिवारिक सूत्रों और पड़ोसियों के अनुसार, राहुल और उनकी पत्नी के बीच पिछले कुछ महीनों से मनमुटाव और आपसी तकरार चल रही थी। कई बार बात बढ़कर झगड़े तक पहुंच जाती थी, जिसे लेकर राहुल मानसिक रूप से परेशान रहते थे। उन्होंने कई बार रिश्ते को संभालने की कोशिश की लेकिन पत्नी अलग रहने की ज़िद पर अड़ी हुई थी। आत्महत्या से पहले की घटनाएं: पुलिस जांच और घटनास्थल का विवरण घटना की जानकारी मिलते ही तिलक नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। कमरे में फांसी के फंदे से लटका शव मिला, और पास ही एक छोटा सा सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है जिसमें राहुल ने अपने फैसले के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया, लेकिन अपने तनाव और टूटी हुई उम्मीदों का ज़िक्र किया है। “हम मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी और पत्नी से भी पूछताछ की जाएगी।” — थाना प्रभारी, तिलक नगर पत्रकार जगत में शोक की लहर राहुल शर्मा की असामयिक मृत्यु ने इंदौर की मीडिया बिरादरी को झकझोर कर रख दिया है। सहकर्मियों और पत्रकार संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए, प्रशासन से मनोवैज्ञानिक सहयोग और पत्रकारों के लिए काउंसलिंग सुविधा की मांग की है। “यह सिर्फ एक पत्रकार की मौत नहीं, बल्कि समाज के उस वर्ग का टूटना है जो हर दिन दूसरों की आवाज़ बनता है, लेकिन खुद की पीड़ा नहीं कह पाता।” — प्रेस क्लब सदस्य मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक तनाव यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संतुलन का कितना गहरा संबंध होता है। कई बार व्यक्तिगत संघर्ष और अकेलापन व्यक्ति को उस मोड़ पर ला देता है, जहां उसे मौत ही एकमात्र रास्ता दिखाई देती है। विशेषज्ञों की राय: आत्महत्या कोई समाधान नहीं राहुल जैसे संवेदनशील और जागरूक व्यक्ति की आत्महत्या इस बात की गवाही देती है कि चाहे व्यक्ति कितना भी मजबूत दिखाई दे, भीतर से वह टूट रहा होता है। समाज और परिवार को चाहिए कि वे समय रहते सुनें, समझें और सहारा दें। “कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसका हल मौत हो। अगर आप अकेले हैं, तो बात करें – दोस्तों से, परिवार से, हेल्पलाइन से।” इंदौर में पत्रकार राहुल शर्मा की आत्महत्या एक चिंताजनक सामाजिक संदेश है। जब समाज की आवाज़ कहे जाने वाला पत्रकार अपनी ही आवाज़ को नहीं बचा पाया, तो यह सवाल बन जाता है — क्या हम वाकई अपनों को सुनते हैं? इस घटना से यह सीख लेने की आवश्यकता है कि भावनात्मक तनाव को गंभीरता से लिया जाए, और हर उस व्यक्ति तक मदद पहुंचाई जाए जो अंदर से टूट रहा हो। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में प्रॉपर्टी विवाद के चलते स्कूल गेट पर जड़ा ताला: बच्चे बाहर खड़े रहे, प्रिंसिपल थाने गए तो मिला टालमटोल

शिक्षा के मंदिर में विवाद की तालेबंदी Best Indore News इंदौर जैसे शिक्षित और विकसित शहर में बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। शहर के एक निजी स्कूल में प्रॉपर्टी विवाद के चलते स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया गया, जिससे छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक स्कूल के बाहर घंटों खड़े रहे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब स्कूल प्रशासन स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराने गया, तो पुलिस ने स्पष्ट कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालने की कोशिश की, जिससे अभिभावकों में गुस्सा और प्रशासन के प्रति नाराज़गी देखी गई। क्या है पूरा मामला? यह घटना इंदौर के एक प्रमुख रिहायशी क्षेत्र में स्थित एक निजी स्कूल की है। सोमवार की सुबह बच्चे रोज़ की तरह स्कूल पहुंचे, लेकिन स्कूल का गेट बंद था और उस पर बाहर से ताला लगा हुआ था। स्कूल स्टाफ और प्रिंसिपल जब पहुंचे तो उन्होंने गेट खोलने की कोशिश की लेकिन असफल रहे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह विवाद स्कूल की जमीन को लेकर है, जिस पर एक निजी व्यक्ति का दावा है। उसी व्यक्ति ने सुबह स्कूल शुरू होने से पहले गेट पर ताला जड़ दिया। “हम सुबह 7:45 बजे पहुंचे, लेकिन स्कूल गेट बंद था। बच्चे बाहर खड़े रहे, बारिश हो रही थी, और कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।” — अभिभावक पुलिस प्रशासन का उदासीन रवैया स्कूल की प्रिंसिपल जब निकटवर्ती पुलिस स्टेशन पहुंचीं और स्थिति की गंभीरता बताई, तो पुलिसकर्मी ने कहा कि “अभी सुबह-सुबह आए हो, बाद में आओ”। प्रिंसिपल ने जब दोबारा अधिकारियों से संपर्क किया, तो उत्तर मिला — “स्टाफ नहीं है, देख नहीं सकते।” पुलिस की प्रतिक्रिया: “जब बच्चों की सुरक्षा का सवाल हो, तो पुलिस की निष्क्रियता समझ से बाहर है। क्या इसी तरह से हमारे बच्चों को स्कूल भेजें?” — गुस्साए अभिभावक बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर असर बारिश के बीच गेट के बाहर खड़े रहना, स्कूल न खुलना और पूरा घटनाक्रम बच्चों के लिए मानसिक रूप से परेशान करने वाला रहा। कई बच्चे रोने लगे, कुछ तो डरे हुए घर लौट गए। शिक्षक भी अंदर नहीं जा सके, और पूरी स्कूल व्यवस्था ठप हो गई। ज़मीन विवाद का कानूनी पक्ष स्थानीय सूत्रों के अनुसार, स्कूल जिस ज़मीन पर बना है, उसे लेकर कई वर्षों से विवाद चल रहा है। एक पक्ष का दावा है कि स्कूल प्रशासन ने लीज की अवधि समाप्त होने के बाद भी कब्जा नहीं छोड़ा, जबकि स्कूल प्रबंधन का कहना है कि उनके पास सभी वैध कागज़ात हैं। कानूनी स्थिति: अभिभावकों की मांग और आक्रोश घटना के बाद अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और प्रशासन से सवाल पूछे: “अगर यही हाल रहा तो हमें बच्चों का एडमिशन किसी और स्कूल में कराना पड़ेगा। पढ़ाई से ज्यादा, अब उनकी सुरक्षा ज़रूरी हो गई है।” — एक माता-पिता प्रशासन की प्रतिक्रिया मामला तूल पकड़ने के बाद स्थानीय शिक्षा अधिकारी, SDM और नगर निगम ने जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति का जायज़ा लिया और स्कूल प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। “हम बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होने देंगे। विवादित गेट की बजाए एक अन्य प्रवेश द्वार से अस्थाई व्यवस्था की जा रही है।” — शिक्षा विभाग अधिकारी इंदौर में स्कूल के गेट पर ताला जड़ने की घटना सिर्फ एक ज़मीन विवाद नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक तत्परता और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। इस घटना ने यह दिखा दिया है कि जब तक प्रशासन सजग नहीं होगा, तब तक आम नागरिक और मासूम छात्र कानूनी झगड़ों के बीच पिसते रहेंगे। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
48 घंटे में 2 कोरोना पॉजिटिव महिलाओं की मौत: दोनों को थीं गंभीर बीमारियां, इस साल इंदौर में कोविड से तीसरी मौत

कोरोना फिर दे रहा दस्तक, इंदौर में बढ़ी चिंता Best Indore News इंदौर, जो कभी देश में कोरोना संक्रमण के दौरान सबसे अधिक प्रभावित शहरों में शामिल रहा था, एक बार फिर से कोविड संक्रमण के मामलों में इज़ाफ़ा देख रहा है। बीते 48 घंटों में दो कोरोना संक्रमित महिलाओं की मौत हो गई है। दोनों ही महिलाएं पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं और इलाज के दौरान उनकी हालत और बिगड़ गई। इन दो मौतों के साथ ही वर्ष 2025 में इंदौर में कोरोना से मरने वालों की संख्या तीन तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा भले ही छोटा लगे, लेकिन विशेषज्ञ इसे आगामी लहर की एक हल्की चेतावनी मान रहे हैं। क्या है मामला? स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दोनों मृतक महिलाएं 60 वर्ष से अधिक आयु की थीं और पहले से ही कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। मृत महिलाओं का विवरण: दोनों ही मामलों में इलाज के दौरान स्थिति बिगड़ती गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। “ये मौतें कोरोना के सीधे प्रभाव से नहीं, बल्कि उसकी वजह से पहले से कमजोर स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव से हुई हैं।” — जिला स्वास्थ्य अधिकारी, इंदौर 2025 में अब तक कोरोना का अपडेट इंदौर में कोरोना के सक्रिय केस बहुत कम हैं, लेकिन धीरे-धीरे मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि अस्पताल में भर्ती होने की दर बेहद कम है, फिर भी वरिष्ठ नागरिकों, गंभीर रोगियों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरा बना हुआ है। किस वेरिएंट का असर? स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज द्वारा लिए गए सैंपल्स की जीनोम सिक्वेंसिंग में कोई नया खतरनाक वेरिएंट सामने नहीं आया है। फिलहाल जो संक्रमण हो रहे हैं, वे ओमिक्रॉन परिवार के हल्के और तेजी से फैलने वाले उप-संस्करण से जुड़े हुए हैं। “लक्षण बेहद सामान्य हैं – हल्का बुखार, खांसी, गले में खराश। लेकिन कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है।” — एम.जी.एम मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ एहतियात अभी भी ज़रूरी हालांकि सरकार और प्रशासन की ओर से कोई विशेष पाबंदी लागू नहीं की गई है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि अब भी सावधानी की आदत को छोड़ा नहीं जाना चाहिए। क्या करें: अस्पतालों की तैयारी कोविड के संभावित मामलों को देखते हुए इंदौर के सरकारी अस्पतालों को सतर्क कर दिया गया है। एम.वाय. अस्पताल, बॉम्बे हॉस्पिटल और अरबिंदो हॉस्पिटल में कोविड वार्डों को दोबारा तैयार किया जा रहा है। “फिलहाल घबराने की बात नहीं है, लेकिन सतर्कता ज़रूरी है। हम रोज़ स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।” — मुख्य चिकित्सा अधिकारी, इंदौर जनता से अपील स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अनावश्यक डर नहीं फैलाने की अपील की है, लेकिन यह भी कहा है कि यदि किसी को सर्दी-खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ हो रही हो, तो वह खुद को अलग रखकर टेस्ट कराए। “भले ही कोरोना के केस कम हैं, लेकिन हमें पिछली लहरों से मिले सबक को नहीं भूलना चाहिए। जागरूक रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।” इंदौर में 48 घंटे के अंदर दो कोरोना संक्रमित महिलाओं की मौत ने यह साफ कर दिया है कि कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो पहले से बीमार हैं या बुज़ुर्ग हैं, यह संक्रमण अब भी खतरनाक हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम सभी अपनी जिम्मेदारी समझें, लक्षण नजर आते ही जांच कराएं और दूसरों की सुरक्षा के लिए भी स्वस्थ आदतें अपनाएं। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
इंदौर में आज भी सुबह से बादलों का दौर: जुलाई और अगस्त में हो जाती है कोटे की आधी बारिश;

बादलों की दस्तक, बारिश का इंतज़ार जारी Best Indore News मध्यप्रदेश की व्यस्ततम और आधुनिकता से भरी नगरी इंदौर में आज फिर सुबह से बादलों की आवाजाही बनी हुई है। हल्की ठंडी हवा और छिटपुट बूंदाबांदी तो हो रही है, लेकिन तेज बारिश का जो इंतज़ार लोग कर रहे हैं, वह अभी भी अधूरा है। इंदौर शहरवासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कब आसमान खुलकर बरसेगा और चारों ओर हरियाली फैल जाएगी। लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि अब कोई मजबूत सिस्टम बनने के बाद ही शहर में अच्छी बारिश देखने को मिलेगी। जुलाई और अगस्त में होती है कोटे की अधिकतर बारिश मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इंदौर में हर वर्ष औसतन 35 से 38 इंच बारिश होती है, जिसमें से करीब 60% बारिश जुलाई और अगस्त महीने में दर्ज की जाती है। लेकिन इस बार जुलाई के तीसरे सप्ताह तक मात्र 30% बारिश ही हो पाई है। अब तक की वर्षा स्थिति: “बारिश की सही शुरुआत नहीं होने से खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं, किसान चिंतित हैं।” — कृषि विशेषज्ञ, देवी अहिल्या कृषि विश्वविद्यालय कमजोर सिस्टम बना रुकावट मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाले सिस्टम इस बार कमजोर अवस्था में हैं। मध्यप्रदेश में अब तक कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम नहीं बना है, जिससे दक्षिण-पश्चिमी हवाएं पर्याप्त मात्रा में नमी नहीं ला पा रहीं। संभावित कारण: खेती और जलस्तर पर असर कम बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ता है। इंदौर के आसपास के ग्रामीण इलाकों जैसे: इन क्षेत्रों में कई किसानों ने अब तक धान, सोयाबीन, मूंग आदि की बुवाई पूरी नहीं की है। वहीं तालाब और जलाशयों में भी पानी का स्तर सामान्य से नीचे है। “जुलाई का तीसरा सप्ताह निकल गया और अभी खेतों में सिर्फ ट्रैक्टर ही चल रहे हैं, बीज नहीं पड़े।” — किसान, सांवेर मौसम कैसा रहेगा आने वाले दिनों में? मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी 4–5 दिनों तक तेज बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि, छिटपुट हल्की बूंदाबांदी और बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। अनुमान: “मौसम में फिलहाल बदलाव तभी आएगा जब बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम सक्रिय होगा।” — वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक, IMD भोपाल शहरी जनजीवन पर असर बारिश नहीं होने से जहां एक ओर किसान चिंतित हैं, वहीं शहर के आम नागरिक भी परेशान हैं: कई इलाकों में नगर निगम को टैंकर से पानी सप्लाई करनी पड़ रही है क्योंकि बोरवेल और हैंडपंप सूखने लगे हैं। नगर निगम और प्रशासन सतर्क बारिश में देरी को देखते हुए नगर निगम ने ड्रेनेज और साफ-सफाई के कामों को तेज कर दिया है ताकि भारी बारिश होने पर जलभराव की स्थिति से निपटा जा सके। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग को भी डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। “भारी बारिश की आशंका को देखते हुए हम पहले से तैयारी कर रहे हैं ताकि नागरिकों को परेशानी न हो।” — नगर आयुक्त, इंदौर इंदौर में बारिश का जो इंतज़ार है, वह अभी अधूरा है। जुलाई और अगस्त महीने को हमेशा वर्षा के लिहाज से सबसे उपजाऊ माना जाता है, लेकिन इस बार मानसून की चाल धीमी है। किसानों से लेकर शहरी लोगों तक, सभी की नजरें अब बंगाल की खाड़ी से उठने वाले सिस्टम पर टिकी हुई हैं। अब सवाल यह है कि क्या आने वाले सप्ताहों में इंदौर को समान्य बारिश का लाभ मिलेगा या फिर शहर को इस साल कमजोर मानसून से समझौता करना होगा? इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।
पीथमपुर का सामुदायिक भवन बदहाल: स्कूल बसों की अवैध पार्किंग, टूटी सुविधाएं और गंदगी से परेशान रहवासी

सुविधाओं के लिए बना भवन अब बना सिरदर्द Best Indore News: धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में लोगों की सुविधाओं और सामाजिक आयोजनों के लिए बनाए गए सामुदायिक भवन की हालत इन दिनों बेहद जर्जर हो चुकी है। यह भवन कभी स्थानीय निवासियों के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज यह अवैध पार्किंग, टूट-फूट और गंदगी का अड्डा बन गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर परिषद और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अवैध पार्किंग बनी सबसे बड़ी समस्या इस सामुदायिक भवन का परिसर अब स्कूल बसों और निजी वाहनों की पार्किंग स्थल बन गया है। सुबह से शाम तक यहां 10-15 बसें खड़ी रहती हैं, जिससे न केवल भवन की गरिमा घट रही है, बल्कि आसपास के रहवासियों को भी असुविधा हो रही है। “यह भवन बच्चों के स्कूल या निजी वाहन खड़े करने की जगह नहीं है। इससे आवाजाही बाधित होती है और भवन की दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं।” — निवासी, वार्ड नं. 14 जर्जर संरचना और टूटी सुविधाएं भवन के अंदर और बाहर की दीवारों पर सीलन, छत से टपकता पानी, और टूटी खिड़कियाँ साफ दिखाई देती हैं। भवन की मूल सुविधाएं जैसे: यह सभी समस्याएं इसे उपयोग में लाने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा हैं। सफाई का अभाव, गंदगी का आलम भवन के चारों ओर और अंदर जगह-जगह कचरे के ढेर, झाड़-झंखाड़ और मच्छरों का प्रकोप देखने को मिलता है। कई लोग इसे अब ‘भूतिया भवन’ कहकर मजाक भी बनाने लगे हैं। “बच्चे यहां खेलने नहीं आते क्योंकि जगह गंदगी से भरी है और मवेशी घूमते रहते हैं। रात को तो अंधेरा इतना होता है कि डर लगता है।” — महिला रहवासी लोगों की मांग: पुनर्निर्माण या नवीनीकरण स्थानीय नागरिकों की मांग है कि या तो इस भवन का पुनर्निर्माण किया जाए, या फिर इसे संपूर्ण रूप से मरम्मत कर दोबारा उपयोग योग्य बनाया जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो यह भवन पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो जाएगा। नागरिकों की प्रमुख मांगें: प्रशासन की चुप्पी और जिम्मेदारी नगर परिषद और जनप्रतिनिधियों को कई बार ज्ञापन और मौखिक रूप से शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। अफसर केवल निरीक्षण करके लौट जाते हैं, लेकिन कार्यवाही ठंडे बस्ते में चली जाती है। “हमने तीन बार ज्ञापन सौंपा है, लेकिन जवाब नहीं मिला। जब चुनाव आते हैं, तभी अधिकारी और नेता यहां आते हैं।” — सामाजिक कार्यकर्ता, पीथमपुर सुरक्षा का सवाल भी गंभीर भवन की टूटी दीवारें और सुनसान वातावरण असामाजिक तत्वों के लिए मुफ़ीद जगह बनता जा रहा है। रात के समय शराबियों और युवाओं की भीड़ लगती है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को डर बना रहता है। “रात को कुछ युवक बाइक खड़ी करके यहां शराब पीते हैं, हम बाहर निकलने से भी डरते हैं।” — वरिष्ठ नागरिक सुधार की संभावना और पहल यदि स्थानीय प्रशासन और पंचायत ठान लें तो इस भवन को फिर से: के लिए एक सशक्त सामुदायिक केंद्र बनाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है: पीथमपुर का सामुदायिक भवन वर्तमान में उपेक्षा और अनदेखी का शिकार है। यह भवन, जो कभी सामाजिक समरसता और उत्सवों का केंद्र हुआ करता था, अब गंदगी, खतरनाक ढांचे और अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है। अब समय आ गया है कि स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद और जनप्रतिनिधि मिलकर इसे फिर से जीवंत बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। इससे न केवल रहवासियों को लाभ होगा, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।