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इंदौर में MR-10 और स्कीम 114 में प्रॉपर्टी निवेश कितना फायदेमंद है?

Indore PropertyProperties in MR-10 and Scheme 114

इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें। इंदौर में जब भी प्रॉपर्टी निवेश की बात आती है, तो दो नाम निवेशकों और गृह खरीदारों की जुबान पर तेजी से आ रहे हैं – MR-10 रोड और स्कीम 114। ये दोनों इलाके अब न केवल विकसित हो रहे हैं, बल्कि आने वाले 5–10 वर्षों में इंदौर के सबसे प्रीमियम और हाई रिटर्न देने वाले क्षेत्रों में शामिल हो सकते हैं। यह ब्लॉग आपको बताएगा कि इन क्षेत्रों में प्रॉपर्टी खरीदना क्यों एक बुद्धिमानी भरा निर्णय साबित हो सकता है। MR-10 रोड: आधुनिकता और कनेक्टिविटी का संगम MR-10 रोड विजय नगर से सुपर कॉरिडोर और बायपास तक की सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करता है।यह क्षेत्र कॉर्पोरेट ऑफिस, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, होटल्स और हाई-राइज़ रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के लिए तेजी से विकसित हो रहा है। मुख्य विशेषताएं: स्कीम 114: व्यवस्थित और नियोजित विकास क्षेत्र स्कीम 114 इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित एक रिहायशी योजना है जो ग्रीन ज़ोन, गार्डन, और साफ-सुथरे इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ आती है।यह क्षेत्र मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए उपयुक्त होने के साथ ही निवेशकों के लिए भी भविष्य में भारी रिटर्न का वादा करता है। मुख्य लाभ: प्रॉपर्टी की वर्तमान दरें और संभावित वृद्धि क्षेत्र वर्तमान दरें (2025) संभावित वृद्धि (2028 तक) MR-10 रोड ₹3,500 – ₹6,500 / वर्गफीट 30% से 50% तक स्कीम 114 ₹2,800 – ₹5,000 / वर्गफीट 25% से 40% तक MR-10 कमर्शियल और हाई-राइज़ के लिए उपयुक्त है, जबकि स्कीम 114 रेजिडेंशियल निवेश के लिए अधिक फायदेमंद है। रेंटल इनकम और ROI इन दोनों क्षेत्रों में रेंटल इनकम की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यह दरें निवेशकों को 6%–8% तक वार्षिक रिटर्न दे सकती हैं, जो रियल एस्टेट में अच्छी मानी जाती है। भविष्य में आने वाली सुविधाएं और योजनाएं इन्वेस्टमेंट के लिए क्यों सही समय है? निवेश सारांश – MR-10 और स्कीम 114 क्षेत्र निवेश प्रकार उपयुक्त किसके लिए मुख्य लाभ MR-10 कमर्शियल/ऑफिस स्पेस बिजनेस, रियल एस्टेट इन्वेस्टर हाई रिटर्न, मेट्रो, IT कंपनियाँ स्कीम 114 रिहायशी/प्लॉट्स फैमिली, लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर शांत वातावरण, योजनाबद्ध विकास अगर आप इंदौर में सुरक्षित, भविष्यदर्शी और लाभदायक प्रॉपर्टी निवेश की योजना बना रहे हैं, तो MR-10 और स्कीम 114 दोनों ही आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। ये क्षेत्र अगले 5 वर्षों में इंदौर के सबसे मूल्यवान और प्रतिष्ठित क्षेत्रों में शामिल हो सकते हैं। Call For Vastu Consultation इंदौर के प्रसिद्ध ज्योतिषी साहू जीउनकी वर्षों की विशेषज्ञता और वास्तु में गहराई से समझ आपके नए घर को एक सकारात्मक और शुभ शुरुआत देने में मदद करेगी। Astrologer Sahu Ji428, 4th Floor, Orbit MallIndore, (MP)IndiaContact:  9039 636 706  |  8656 979 221For More Details Visit Our Website: Indore Jyotish

कांच मंदिर, इंदौर – कांच में रची आध्यात्मिकता की बेमिसाल रचना

Best Indore Kanch Mandir, Indore, June , 2025

इंदौर, मध्यप्रदेश का दिल, जहां आधुनिकता और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह शहर जहां एक ओर व्यापार और खान-पान के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत भी लोगों को आकर्षित करती है। इसी विरासत में एक अनमोल रत्न है – कांच मंदिर (Kanch Mandir), जो कला, श्रद्धा और वास्तुकला का अद्भुत संगम है। निर्माण और इतिहास कांच मंदिर का निर्माण 20वीं सदी की शुरुआत (1903-1904) में इंदौर के प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी सर सेठ हुकुमचंद जैन द्वारा करवाया गया था। उन्हें ‘Cotton King’ और ‘Diamond King’ के नाम से भी जाना जाता था। उनका उद्देश्य था एक ऐसा मंदिर बनाना जो न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर हो, बल्कि कला और संस्कृति का जीवंत उदाहरण भी बने। उन्होंने बेल्जियम से आयातित शीशों, चीन से मोज़ेक सामग्री और राजस्थानी कारीगरों की मदद से इस मंदिर का निर्माण करवाया। उस समय इतनी भव्यता और बारीकी से बना यह मंदिर अपनी मिसाल खुद था। मंदिर की खासियत – कांच का जादू जैसा कि नाम से स्पष्ट है, पूरे मंदिर का इंटीरियर कांच और मिरर वर्क से बना हुआ है। मंदिर के अंदर कदम रखते ही एक अलग ही दुनिया में प्रवेश का अनुभव होता है:  कुछ खास बातें: इस तरह की सजावट भारत के अन्य किसी धार्मिक स्थल में देखने को नहीं मिलती, जिससे यह मंदिर वास्तुकला के प्रेमियों के लिए किसी संग्रहालय से कम नहीं। धार्मिक महत्व यह मंदिर दिगंबर जैन संप्रदाय से संबंधित है और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। प्रमुख धार्मिक विशेषताएं: यह स्थान केवल जैन धर्म के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र है। स्थापत्य और कला कला का बेजोड़ संगम:  रात्रि समय का दृश्य: रात में जब मंदिर की सजावट पर कृत्रिम प्रकाश पड़ता है, तो ऐसा लगता है जैसे पूरा मंदिर सितारों से सजा हो। स्थान और पहुंच कांच मंदिर, इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र के इत्तेफाक रोड पर स्थित है। यह राजवाड़ा महल से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर है और इंदौर रेलवे स्टेशन से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित है। सरवटे बस स्टैंड से मंदिर तक पहुंचने में केवल 10 से 15 मिनट का समय लगता है। यदि आप पास में हैं तो मंदिर तक पैदल भी आसानी से पहुंचा जा सकता है, या फिर ऑटो व कैब की सुविधा भी उपलब्ध है। खुलने का समय और प्रवेश ज्योतिषीय दृष्टिकोण जैन मंदिरों की ऊर्जा अत्यंत शुद्ध और सात्त्विक मानी जाती है। कांच मंदिर का दर्शन करने से: पास के अन्य दर्शनीय स्थल  यात्रा सुझाव कांच मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक कला-काव्य है। यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव देता है, बल्कि हर आने वाले व्यक्ति को अपनी अनोखी भव्यता से चकित करता है। अगर आप इंदौर की यात्रा कर रहे हैं, तो कांच मंदिर आपके सफर का एक अविस्मरणीय हिस्सा बन सकता है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

पितृ पर्वत, इंदौर – हनुमान जी की 71 फीट अष्टधातु मूर्ति वाला दिव्य धार्मिक और पर्यटन स्थल

Best Indore news Pitra Parvat, Indore June, 2025

पितृ पर्वत, इंदौर में स्थित एक भव्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है, जो श्रद्धा और प्राकृतिक सौंदर्य का ऐसा संगम प्रस्तुत करता है जिसे देखकर हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो जाता है। यह पर्वत इंदौर के बिजासन रोड पर स्थित है और यहां 71 फीट ऊँची अष्टधातु से निर्मित हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है, जो दूर से ही अपनी दिव्यता और भव्यता का आभास कराती है। धर्म और प्रकृति का समन्वय इस क्षेत्र को न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व के कारण भी देखा जाता है। वास्तव में, पितृ पर्वत एक ऐसा स्थल है जहां श्रद्धालु अपने पूर्वजों को स्मरण करते हैं, हनुमान जी की कृपा प्राप्त करते हैं और साथ ही साथ प्रकृति की गोद में शांति का अनुभव भी करते हैं। हनुमान जी की विशाल ध्यानमग्न मूर्ति यहाँ की सबसे प्रमुख विशेषता है — 71 फीट ऊँची अष्टधातु की हनुमान जी की मूर्ति, जो ध्यान की मुद्रा में स्थापित की गई है। ध्यान मुद्रा में विराजमान यह मूर्ति न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक बल का स्रोत है, बल्कि ध्यान और एकाग्रता की ऊर्जा भी प्रदान करती है। धार्मिक महत्व इस स्थान को विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है जो अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पूजन करना चाहते हैं। “पितृ पर्वत” नाम अपने-आप में ही दर्शाता है कि यह स्थान पितृ पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। इसी कारण, यह इंदौर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक बन गया है। लोकप्रिय पर्यटन स्थल पितृ पर्वत न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि पर्यटक स्थलों के रूप में भी अत्यंत लोकप्रिय होता जा रहा है। इंदौर और आसपास के क्षेत्रों से लोग यहाँ सैर-सपाटे के लिए भी आते हैं, क्योंकि पर्वत की ऊँचाई से इंदौर शहर का मनोरम दृश्य देखने योग्य होता है। यहाँ की हरियाली, स्वच्छता और वातावरण मन को शांति देने वाला होता है। आधुनिक सुविधाओं के साथ विकास की ओर इस क्षेत्र को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। यहाँ गौशाला, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, टॉयलेट्स, पार्किंग जैसी सुविधाएँ तेजी से विकसित की जा रही हैं ताकि यहाँ आने वाले भक्तों और पर्यटकों को कोई असुविधा न हो। इसके अतिरिक्त, यह भी ध्यान में रखा जा रहा है कि पर्वत की प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित रखते हुए विकास किया जाए। मास्टर प्लान की ओर कदम सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से पितृ पर्वत को एक विश्व स्तरीय तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान भी तैयार किया गया है। इस योजना में बेहतर सड़कों, लाइटिंग, धर्मशालाओं, ध्यान कक्षों, और यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि पितृ पर्वत, इंदौर का धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र के रूप में महत्त्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह वह स्थान है जहाँ हनुमान जी की कृपा, पितृ शांति, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा एक साथ अनुभव की जा सकती है। यदि आप इंदौर में हैं, या वहाँ जाने का विचार कर रहे हैं, तो पितृ पर्वत की यात्रा आपके जीवन में सकारात्मकता और दिव्यता अवश्य लाएगी। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

“हुकमचंद घंटाघर (इंद्र भवन): इंदौर की ऐतिहासिक शान का प्रतीक”

Best Indore Hukamchand Clock Tower (Indra Bhawan) Indore 2025 June, 27

इंदौर, मध्यप्रदेश का हृदय, न केवल अपनी औद्योगिक प्रगति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरें भी शहर को एक अनोखी पहचान देती हैं। इन्हीं धरोहरों में से एक है – हुकमचंद घंटाघर, जिसे इंद्र भवन के नाम से भी जाना जाता है। इतिहास की झलक यह भव्य भवन लगभग 100 साल पुराना है और इसे इंदौर के जाने-माने उद्योगपति, समाजसेवी और कपड़ा सम्राट सर सेठ हुकमचंद जी द्वारा बनवाया गया था। हुकमचंद जी को इंदौर का टाटा या बिड़ला कहा जाता था, और उन्होंने न केवल व्यापार में सफलता प्राप्त की, बल्कि धर्म, समाज और शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया।  इंद्र भवन की भव्यता इंद्र भवन को देखने पर लगता है मानो आप किसी राजमहल में आ गए हों। इसकी महल जैसी वास्तुकला, ऊँचे बुर्ज, और खूबसूरत मेहराबें इसकी शान को बढ़ाती हैं। इसके चारों ओर फैला हुआ हरा-भरा बाग़, जिसमें इटली से लाए गए सुंदर संगमरमर के स्टैच्यूज़ (मूर्तियाँ) लगे हैं, इसे एक यूरोपीय टच प्रदान करता है। यह भवन अपने समय में इंदौर की सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहाँ होने वाले आयोजन आज भी इंदौरवासियों को अपनी ओर खींचते हैं। सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियाँ आज भी हुकमचंद घंटाघर परिसर में स्थानीय मेले, चित्रकला प्रदर्शनियाँ, हस्तशिल्प बाजार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस ऐतिहासिक धरोहर ने इंदौर की रचनात्मक आत्मा को हमेशा जीवित रखा है। इस स्थल पर कई कलाकारों और स्थानीय शिल्पकारों को अपनी कला को प्रदर्शित करने का मंच मिलता है, जिससे यह भवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि जीवंत संस्कृति का भी प्रतीक बन चुका है।  हुकमचंद जी का योगदान सर सेठ हुकमचंद जी न केवल एक सफल व्यापारी थे, बल्कि उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज सेवा को समर्पित किया। उन्होंने इंदौर में कई विद्यालय, अस्पताल और धर्मशालाएँ बनवाईं। हुकमचंद चंदनमल बालिका विद्यालय, हुकमचंद नेत्र चिकित्सालय, और कई धर्मार्थ संस्थाएँ आज भी उनके परोपकारी कार्यों की गवाही देती हैं। आज का हुकमचंद घंटाघर हालांकि समय के साथ इस भवन की चमक कुछ फीकी पड़ी है, परंतु इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता आज भी वैसी ही है। कई पर्यटक और इतिहास प्रेमी यहाँ आते हैं, इसकी वास्तुकला को निहारते हैं और इंदौर के गौरवशाली अतीत से जुड़ाव महसूस करते हैं। इंदौर नगर निगम और कुछ स्थानीय संगठन अब इसके संरक्षण एवं पुनर्निर्माण के प्रयास में जुटे हैं ताकि यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके। हुकमचंद घंटाघर या इंद्र भवन केवल एक इमारत नहीं है – यह एक प्रेरणा है, एक इतिहास है, और इंदौर की आत्मा का प्रतीक है। जब भी आप इंदौर जाएँ, इस स्थान पर अवश्य जाएँ। यहाँ की शांति, स्थापत्य और ऐतिहासिक ऊर्जा आपको एक अलग ही अनुभव देगी। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

इस्कॉन मंदिर इंदौर: भक्ति, संस्कृति और शांति का केंद्र

Best Indore ISKCON Temple Indore 2025 June, 27

 इंदौर, मध्य प्रदेश का हृदय स्थल, जहां आध्यात्मिकता और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिलता है। इस शहर में स्थित इस्कॉन मंदिर, न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भक्तों के लिए आत्मिक शांति, भक्ति और सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुका है। इस्कॉन मंदिर का इतिहास इस्कॉन (ISKCON) अर्थात् इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस की स्थापना 1966 में ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा की गई थी। इंदौर में इस्कॉन मंदिर की स्थापना भक्तों की सेवा भावना और श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से की गई। मंदिर की विशेषताएं इस्कॉन इंदौर में होने वाले प्रमुख आयोजन मंदिर का समय और प्रवेश इस्कॉन मंदिर का आध्यात्मिक प्रभाव कैसे पहुँचें इस्कॉन मंदिर इंदौर इस्कॉन मंदिर इंदौर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा है जहाँ तन, मन और आत्मा को शुद्धता प्राप्त होती है। यहाँ आने वाला प्रत्येक भक्त शांति, प्रेम और भक्ति का अनुभव करता है। यदि आप भी श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होना चाहते हैं और अपने जीवन को एक दिव्य दिशा देना चाहते हैं, तो इस्कॉन मंदिर इंदौर की यात्रा अवश्य करें। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

इंदौर का गौरव – छत्रपति शिवाजीराव होलकर की समाधि स्थल

Best Indore The tomb of Chhatrapati Shivaji Rao Holkar, Indore june,2025

इंदौर शहर इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से समृद्ध रहा है। इस शहर के गौरवशाली अतीत को जीवंत करने में होलकर वंश का विशेष योगदान रहा है। उन्हीं में से एक थे छत्रपति शिवाजीराव होलकर, जिनकी वीरता, राजनैतिक समझ और जनसेवा के कार्यों ने उन्हें इतिहास में अमर बना दिया। इंदौर में स्थित उनकी समाधि न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि आज भी यह स्थान लोगों को प्रेरणा और श्रद्धा का केंद्र प्रदान करता है। शिवाजीराव होलकर कौन थे? शिवाजीराव होलकर द्वितीय (शासनकाल: 1834 – 1886) मराठा साम्राज्य के एक प्रमुख राजा थे, जो होलकर वंश से संबंधित थे। वह होलकर रियासत के महाराजाधिराज थे, जिनका योगदान इंदौर के सामाजिक और शैक्षणिक विकास में अविस्मरणीय रहा है। उनका शासन काल ब्रिटिश राज के समय था, परंतु उन्होंने भारतीय परंपराओं और मराठा गौरव को बनाए रखा। वे न केवल एक पराक्रमी शासक थे, बल्कि जनता के प्रिय और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने कई धर्मशालाओं, विद्यालयों, मंदिरों और सरायों का निर्माण कराया। समाधि स्थल – एक सांस्कृतिक धरोहर इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र के निकट स्थित यह समाधि स्थल उनकी मृत्यु के बाद निर्मित किया गया था। यहाँ उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार वैदिक विधि से हुआ और उस स्थान को एक स्मारक के रूप में विकसित किया गया। समाधि स्थल की विशेषताएं: यह समाधि स्थल उन पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है जो मराठा इतिहास और इंदौर की विरासत को नजदीक से देखना चाहते हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्व होलकर वंश शिवभक्त और ज्योतिष में विश्वास रखने वाले शासक रहे हैं। छत्रपति शिवाजीराव होलकर स्वयं नक्षत्रों, ग्रहों और शुभ मुहूर्तों के अनुसार कार्य करते थे। उनकी समाधि पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करने से, विशेषकर मंगलवार या शनिवार के दिन, जातक को: समय और दर्शन की जानकारी क्यों जाएँ इस समाधि स्थल पर? नजदीकी पर्यटन स्थल: समापन विचार छत्रपति शिवाजीराव होलकर की समाधि न केवल एक राजसी स्मृति है, बल्कि वह एक जीवित प्रेरणा है। इस स्थल की यात्रा हमें यह स्मरण कराती है कि किस प्रकार एक राजा ने अपनी बुद्धिमत्ता, पराक्रम और जनता के कल्याण के लिए जीवन समर्पित किया। यदि आप इंदौर में हैं, तो इस समाधि स्थल पर अवश्य जाएँ और इतिहास की इस अमूल्य धरोहर को नमन करें। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2025: आस्था, परंपरा और मोक्ष का पर्व

Best Indore Jagannath Rath Yatra 2025 , June 2025

पुरी, ओडिशा में 27 जून से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा 2025। यह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि भक्ति, संस्कृति और सामाजिक समरसता का भव्य संगम भी है। हर वर्ष की तरह, 2025 में भी ओडिशा के पुरी शहर में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथ यात्रा बड़े धूमधाम से आरंभ होगी। इस वर्ष रथ यात्रा का शुभारंभ 27 जून 2025, शुक्रवार को होगा। इस अद्भुत परंपरा में भाग लेना केवल दर्शन का विषय नहीं, बल्कि यह मोक्ष की कामना और आध्यात्मिक उन्नति का सशक्त माध्यम माना जाता है। रथ यात्रा 2025 की तिथि और विशेष योग उदयातिथि के अनुसार, रथ यात्रा 27 जून 2025 को मनाई जाएगी। द्वितीया तिथि 26 जून दोपहर 1:24 बजे से आरंभ होकर 27 जून सुबह 11:19 बजे तक रहेगी। रथ यात्रा का यह पर्व कुल 9 दिनों तक चलेगा और इसका समापन 5 जुलाई 2025 को होगा। रथ यात्रा की शुरुआत और रथों का निर्माण इस भव्य उत्सव की तैयारियाँ अक्षय तृतीया से प्रारंभ होती हैं। इस दिन विशेष नीम की लकड़ी जिसे “दर्शनिया दारु” कहते हैं, से तीनों रथों का निर्माण आरंभ किया जाता है। विश्वकर्मा, बढ़ई, लोहार, माली, दर्जी, कुम्हार और चित्रकार—सभी समुदाय मिलकर इन रथों को बनाते हैं, जो सामूहिक सेवा और एकता का प्रतीक है। इसके अलावा, रथों को जोड़ने में लोहे की कील का उपयोग नहीं किया जाता। केवल लकड़ी के खूंटों और पारंपरिक जोड़ विधियों का प्रयोग होता है, जो इस निर्माण को विशेष और पवित्र बनाता है। तीनों रथों की विशेष पहचान तीनों देवताओं के रथों की बनावट, रंग और ऊंचाई में विशेष भिन्नता होती है: छेरा पाहरा: सेवा का संदेश पुरी के गजपति राजा हर वर्ष रथों के समक्ष सोने की झाड़ू लगाकर “छेरा पाहरा” की परंपरा निभाते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भगवान के समक्ष सभी एक समान हैं—राजा हो या रंक। यही नहीं, यह परंपरा विनम्रता और समानता का प्रतीक बन चुकी है। अनासार काल: भगवान की मानवीय अवस्था ज्येष्ठ पूर्णिमा को 108 कलशों से स्नान कराने के पश्चात भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और उन्हें 15 दिनों के लिए ‘अनासार गृह’ में विश्राम हेतु रखा जाता है। इस काल को “अनासार” कहा जाता है, जहाँ उन्हें औषधीय काढ़ा और विशेष देखभाल दी जाती है। गुंडीचा यात्रा और सात दिवसीय विश्राम रथ यात्रा के पहले दिन भगवान गुंडीचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं, जिसे मौसी का घर कहा जाता है। वहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा सात दिन विश्राम करते हैं। इस दौरान गुंडीचा मंदिर में ‘आड़प-दर्शन’ और विशेष भोग की परंपरा निभाई जाती है। हेरा पंचमी और बहुदा यात्रा इसके बाद, पांचवें दिन हेरा पंचमी मनाई जाती है, जब माता लक्ष्मी नाराज़ होकर गुंडीचा मंदिर जाती हैं और भगवान जगन्नाथ से मिलती हैं। यह विवाह के प्रेम और नाराजगी की सुंदर लीला मानी जाती है। अंततः नौवें दिन, देवता वापस मंदिर लौटते हैं, जिसे “बहुदा यात्रा” कहा जाता है। जगन्नाथ मंदिर की महाप्रसाद परंपरा पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर को दुनिया की सबसे बड़ी रसोई का दर्जा प्राप्त है। यहाँ प्रतिदिन हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार होता है। खास बात यह है कि हांडियों में ऊपर रखी हांडी सबसे पहले पकती है, जो इस मंदिर की रसोई की वैज्ञानिकता और दिव्यता को दर्शाती है। रथ यात्रा से जुड़ी पौराणिक कथाएं 1. सुभद्रा की नगर-दर्शन की इच्छा एक बार देवी सुभद्रा ने पुरी नगर भ्रमण की इच्छा प्रकट की थी। भगवान जगन्नाथ और बलभद्र ने उन्हें रथ पर बैठाकर नगर भ्रमण कराया। तभी से हर वर्ष यह यात्रा आयोजित होती है। 2. कृष्ण की मथुरा यात्रा का प्रतीक एक अन्य कथा के अनुसार, रथ यात्रा भगवान कृष्ण की मथुरा यात्रा की स्मृति है, जब वे बलराम और सुभद्रा के साथ मथुरा गए थे। सामाजिक समरसता और भक्तों की सहभागिता रथ यात्रा के दिन, पुरी की गलियाँ हरिनाम संकीर्तन, भक्ति संगीत और मंत्रोच्चार से गूंज उठती हैं। लाखों भक्त बिना किसी भेदभाव के रथ खींचते हैं और शंखचूड़ नामक रस्सी को स्पर्श कर मोक्ष की कामना करते हैं। डिजिटल युग में रथ यात्रा दर्शन जो श्रद्धालु पुरी नहीं जा सकते, वे टीवी चैनलों और ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से रथ यात्रा 2025 के लाइव दर्शन कर सकते हैं, जिससे वे भी इस दिव्य अनुभव से वंचित नहीं रहते। जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, एकता, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा का विराट उत्सव है। यदि आप पुण्य लाभ, आत्मिक शांति और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस वर्ष 27 जून को रथ यात्रा में अवश्य भाग लें या श्रद्धा से दर्शन करें। यह उत्सव आपको न केवल ईश्वर के निकट लाएगा, बल्कि आपके भीतर की भक्ति, सेवा और विनम्रता को भी जागृत करेगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

मध्यप्रदेश के GMC में बनेगी देश की दूसरी मल्टी‑डिसिप्लिनरी मेडिकल रिसर्च यूनिट

MP News: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज होने जा रही है। यहां जल्द ही देश की दूसरी मल्टी‑डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MDRU) की स्थापना की जाएगी। यह कदम न सिर्फ स्थानीय स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने वाला है, बल्कि पूरे भारत में चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को भी मजबूत करेगा। भोपाल: राजधानी का गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जल्द ही चिकित्सा अनुसंधान (मेडिकल रिसर्च) का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। यहां इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) के निर्देशन में देश की दूसरी ‘मेडिकल रिसर्च स्किल यूनिट’ स्थापित की जा रही है। इस तरह की यूनिट पहले पुणे में स्थापित की जा चुकी है। यह ऐसी इकाई होगी, जहां डाक्टरों को अनुसंधान की आधुनिक तकनीकों और नैतिक बारीकियों का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह यूनिट भोपाल समेत राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, पंजाब, चेन्नई, मुंबई, भुवनेश्वर और पूर्वोत्तर राज्यों के चिकित्सकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र के रूप में काम करेगी। जीएमसी में बनने वाली इस नई यूनिट के लिए तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला की शुरुआत बुधवार को हुई। MDRU क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण? MDRU यानी मल्टी‑डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट ऐसे केंद्र होते हैं जहाँ कई मेडिकल विभाग शोध कार्यों को संयोजित रूप से अंजाम देते हैं।भोपाल की यह यूनिट रायपुर (GMC का पहला MDRU) के बाद देश भर में दूसरी होगी, जिसे ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय की मान्यता मिली है GMC में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार यह मॉर्डनाइजेशन डॉक्टरों को सुविधाजनक और समयबद्ध चिकित्सा जांच की सुविधा प्रदान करेगा। खास शोध—क्या होंगे प्रमुख फोकस? MDRU के तहत कई गंभीर और सामूहिक स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध होगा: ये सभी पहलें न सिर्फ मरीजों को लाभ देंगी, बल्कि वैज्ञानिक और मेडिकल छात्रों के लिए भी अत्यधिक शिक्षाप्रद होंगी। शैक्षणिक और चिकित्सा छात्रों पर लाभ भोपाल चिकित्सा इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण योगदान अभी भी चुनौती क्या हैं? क्या कहते हैं जिम्मेदार? भोपाल होगा रिसर्च राजधानी भोपाल का GMC चिकित्सकीय अनुसंधान में नई गति प्राप्त करने वाला है।MDRU की स्थापना से: यह पहल मध्यप्रदेश को मेडिकल रिसर्च के मानचित्र में एक नई ऊँचाई प्रदान कर सकती है। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

महात्मा गांधी हॉल, इंदौर — शहर का गौरवशाली प्रतीक

Best Indore Mahatma Gandhi Hall, Indore june,2025

महात्मा गांधी हॉल इंदौर की उन गिनी-चुनी ऐतिहासिक इमारतों में से एक है, जो शहर की सांस्कृतिक और औपनिवेशिक विरासत की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है। यह भवन न केवल स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि इंदौर के शहरी जीवन के विकास की गवाही भी देता है। शहर के मध्य स्थित यह स्थल अपनी भव्यता, ऐतिहासिकता और सामाजिक गतिविधियों के कारण इंदौरवासियों के लिए गौरव का विषय बना हुआ है। यहाँ साल भर सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक आयोजन होते रहते हैं, जिससे यह स्थान जीवंत बना रहता है। इतिहास की झलक: महात्मा गांधी हॉल का इतिहास 1904 से शुरू होता है, जब ब्रिटिश शासनकाल के दौरान इसका निर्माण करवाया गया था। इसे शुरू में ‘किंग एडवर्ड हॉल’ के नाम से जाना जाता था, जो उस समय ब्रिटिश सम्राट किंग एडवर्ड सप्तम के नाम पर रखा गया था। यह इमारत ब्रिटिश प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हुआ करती थी। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद जब देश भर में अंग्रेजी प्रभाव को हटाकर भारतीय पहचान को प्रमुखता दी जा रही थी, तब इस हॉल का नाम बदलकर ‘महात्मा गांधी हॉल’ रख दिया गया। यह नाम परिवर्तन न केवल राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बना, बल्कि इस भवन को स्वतंत्र भारत के गौरव से भी जोड़ दिया। इस हॉल ने समय के साथ इंदौर के सामाजिक बदलावों को नजदीक से देखा है और आज भी यह शहर की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में खड़ा है। वास्तुकला की विशेषताएं: महात्मा गांधी हॉल की वास्तुकला इसकी सबसे प्रमुख विशेषता है। इसे इंडो-गॉथिक शैली में डिज़ाइन किया गया है, जो भारतीय और यूरोपीय स्थापत्य शैलियों का सुंदर समावेश है। इस भवन को बंबई (अब मुंबई) के प्रसिद्ध वास्तुविद चार्ल्स फ्रेडरिक स्टीवंस ने डिज़ाइन किया था। इस हॉल का सबसे आकर्षक भाग है इसका घड़ी टॉवर, जिसे चारों दिशाओं से देखा जा सकता है। यह टॉवर हॉल के केंद्र में स्थित है और एक भव्य गुंबद से सुसज्जित है। इसी कारण इसे ‘घंटाघर’ या ‘क्लॉक टॉवर’ भी कहा जाता है। भवन में बने राजपूत शैली के गुंबद, मीनारें, सजावटी पट्टियाँ, खुली छतें, और ऊँची छतों वाले कक्ष इसकी भव्यता में चार चांद लगाते हैं। पूरा परिसर एक ही समय में लगभग 2000 लोगों को समायोजित कर सकता है, जिससे यह बड़े आयोजनों के लिए आदर्श स्थल बनता है। हॉल में मौजूद सुविधाएँ: इस ऐतिहासिक इमारत में आधुनिकता के साथ-साथ उपयोगिता का भी पूरा ध्यान रखा गया है। हॉल के अंदर एक पुस्तकालय है, जो ज्ञान-पिपासु पाठकों के लिए एक शांतिपूर्ण अध्ययन स्थल प्रदान करता है। यहां स्थानीय इतिहास, साहित्य और सामाजिक विषयों से जुड़ी कई पुस्तकें उपलब्ध हैं। बच्चों के लिए एक सुंदर पार्क भी मौजूद है, जो परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों के लिए एक अतिरिक्त आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा परिसर में एक छोटा मंदिर भी स्थित है, जहाँ स्थानीय लोग श्रद्धा से दर्शन करने आते हैं। वाहन पार्किंग की भी सुविधा यहाँ उपलब्ध है, जिससे पर्यटक बिना किसी असुविधा के अपने निजी वाहन लेकर आ सकते हैं। यहाँ की साफ-सफाई और सुव्यवस्थित रख-रखाव भी दर्शकों को प्रभावित करता है। संस्कृति और आयोजन स्थल: महात्मा गांधी हॉल केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं है, बल्कि यह इंदौर की सांस्कृतिक गतिविधियों का एक जीवंत केंद्र भी है। वर्ष भर यहाँ संगीत, नृत्य, नाटक, चित्रकला प्रदर्शनियां, तथा स्थानीय मेले और सरकारी समारोह आयोजित किए जाते हैं। यह हॉल कलाकारों, कवियों, चित्रकारों और सांस्कृतिक संगठनों को एक सशक्त मंच प्रदान करता है जहाँ वे अपनी कला और विचारों को समाज के सामने रख सकते हैं। इसके विशाल प्रेक्षागृह और खुले परिसर बड़े-बड़े आयोजनों को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने में सहायक होते हैं। पर्यटन महत्व: महात्मा गांधी हॉल इंदौर के विरासत पर्यटन का एक अभिन्न हिस्सा है। जो भी इंदौर आता है, वह इस ऐतिहासिक स्थल को अवश्य देखना चाहता है। यह इमारत शहर के गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह हॉल न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक शैक्षणिक और सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करता है। इसकी भव्य बनावट और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से प्रभावित होकर अनेक फोटोग्राफर, ब्लॉगर और इतिहास प्रेमी यहां आते हैं। इंदौर की पहचान के रूप में यह हॉल आज भी शहर के हृदयस्थल पर अपनी गरिमा के साथ स्थित है। घूमने का समय: महात्मा गांधी हॉल प्रतिदिन प्रातः से सायं तक खुला रहता है। पर्यटक किसी भी दिन यहाँ भ्रमण कर सकते हैं, परंतु यदि आप किसी विशेष आयोजन या प्रदर्शनी में सम्मिलित होना चाहते हैं, तो यात्रा से पूर्व आयोजनों की जानकारी लेना और समय की पुष्टि करना उचित रहेगा। हॉल की प्रकाश व्यवस्था और देखरेख शानदार है, जिससे शाम के समय भी यहाँ घूमना सुखद अनुभव बनता है। स्थान और पहुँच: यह ऐतिहासिक हॉल इंदौर जंक्शन रेलवे स्टेशन से बेहद निकट स्थित है, जिससे यहाँ पहुँचना सुविधाजनक है। चाहे आप रेल, बस या निजी वाहन से यात्रा कर रहे हों, महात्मा गांधी हॉल तक पहुँचना सरल और सीधा है। पास में ऑटो, टैक्सी और सिटी बस की उपलब्धता भी है। महात्मा गांधी हॉल, इंदौर की उन विरासत स्थलों में से है जो अतीत और वर्तमान को एक साथ जोड़ता है। इसकी स्थापत्य कला, सांस्कृतिक योगदान और सामाजिक उपयोगिता इसे एक अनोखी पहचान प्रदान करते हैं। यदि आप इंदौर की यात्रा पर हैं, तो महात्मा गांधी हॉल को देखना न भूलें। यह स्थान न केवल आपकी स्मृतियों में रहेगा, बल्कि शहर के इतिहास से आपका साक्षात्कार भी कराएगा। इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।

इंदौर में गंदे पानी पर नगर निगम का सख्त एक्शन:

Best Indore News: Municipal Corporation on dirty water

Best Indore News: इंदौर नगर निगम अब शहर में मिल रहे गंदे पानी को लेकर पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार कई कॉलोनियों और वार्डों से पीने के पानी में गंदगी, बदबू, और मटमैले रंग की शिकायतें मिल रही थीं, जिससे आम जनता बेहद परेशान थी। अब इस पर निगमायुक्त हरीश राठौड़ ने सख्त रुख अपनाते हुए जलप्रदाय विभाग और जोन अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि “अब किसी भी क्षेत्र से गंदे पानी की शिकायत नहीं आनी चाहिए।” शिकायतों का सिलसिला और जनता की नाराज़गी पिछले महीने इंदौर के कई क्षेत्रों – जैसे राजेंद्र नगर, माणिकबाग, सिलिकॉन सिटी, खजराना, मालवा मिल, और सुदामा नगर – से गंदे पानी की शिकायतें दर्ज की गईं। लोगों ने बताया कि पानी में बदबू आ रही है, उसमें कीड़े हैं या वह नहाने तक लायक नहीं है। कुछ जगहों पर यह पानी पीने से डायरिया और स्किन एलर्जी जैसी बीमारियों की भी खबरें आईं। स्थानीय निवासी भावना तिवारी (वार्ड 36) का कहना है – “पिछले 5 दिनों से लगातार पीले रंग का पानी आ रहा है। इसे पीना तो दूर, कपड़े धोने पर भी बदबू आती है।” निगमायुक्त ने की सख्त बैठक इन बढ़ती शिकायतों के बीच निगमायुक्त हरीश राठौड़ ने सोमवार को नगर निगम मुख्यालय में सभी 19 जोन के ज़ोनल अफसरों, जलप्रदाय अभियंताओं और सुपरवाइज़रों के साथ आपात बैठक की। उन्होंने कहा कि: “हर शिकायत का समाधान 24 घंटे के भीतर किया जाए। जो अधिकारी कार्य में लापरवाही करेगा, उस पर वेतन रोक और निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने ये भी निर्देश दिए कि: जड़ में है पाइपलाइन का जाल और पुरानी व्यवस्था नगर निगम के जलप्रदाय विभाग के अनुसार, शहर में लगभग 2600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन फैली है। इनमें से कई लाइनें 25 वर्ष से भी पुरानी हैं, जो अब जंग खा चुकी हैं और उनमें सीवेज का रिसाव हो रहा है। नई कॉलोनियों को जोड़ने के चक्कर में कई पुरानी लाइनों पर दबाव भी बढ़ा है। नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार: “जहां भी गंदा पानी आ रहा है, वहां पाइपलाइन या तो लीकेज है या सीवेज पाइप से क्रॉस-कनेक्शन हो चुका है।” डिजिटल शिकायत प्रणाली होगी मजबूत निगमायुक्त ने IMC ऐप और 311 हेल्पलाइन पर दर्ज हो रही शिकायतों का भी विश्लेषण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि: जल गुणवत्ता परीक्षण के निर्देश हर जोन में जल गुणवत्ता परीक्षण यूनिट को एक्टिव कर दिया गया है। निगम ने 50 से अधिक नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है, ताकि पता चले कि किस इलाके का पानी पीने लायक है और कहां खतरे की आशंका है। टैंकर व्यवस्था और वैकल्पिक आपूर्ति जहां गंदा पानी लगातार आ रहा है, वहां तत्काल प्रभाव से टैंकरों से शुद्ध पानी की सप्लाई की जा रही है। साथ ही, नगर निगम 15 नए हाई-प्रेशर वाटर टैंकर भी किराए पर ले रहा है। निगमायुक्त की अपील: जनता का सहयोग जरूरी अपने संदेश में निगमायुक्त हरीश राठौड़ ने नागरिकों से अपील की कि वे: स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट पर नगर निगम ने स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट कर दिया है। नगर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों – जैसे एमवाय, बॉम्बे हॉस्पिटल और ग्रेटर कैलाश – में जलजनित बीमारियों की रिपोर्टिंग की समीक्षा की जा रही है। डॉक्टरों ने भी लोगों से उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी है। अब उम्मीदें जागीं, लेकिन इंतज़ार है कार्रवाई का इंदौर नगर निगम द्वारा गंदे पानी को लेकर लिया गया यह एक्शन आम जनता के लिए राहत का संकेत है। हालांकि यह देखना बाकी है कि केवल निर्देश और चेतावनी से हालात सुधरते हैं या वास्तविक सुधार कार्य भी ज़मीन पर दिखेंगे। शहरवासी अब यह देखना चाहते हैं कि “शब्दों से आगे बढ़कर निगम कितनी तेजी से पानी की व्यवस्था को दुरुस्त करता है।” इंदौर की अधिक जानकारी, हर क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विकल्प और स्थानीय अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट Best Indore पर जरूर विजिट करें।